अनुपयुक्त व्यक्ति

अध्याय दो


1 शमूएल 16:11-13

Ron Meyers

11तब शमूएल ने यिशै से कहा, “क्या सब लड़के आ गए?” वह बोला, “नहीं, छोटा तो रह गया, और वह भेड़–बकरियों को चरा रहा है।” शमूएल ने यिशै से कहा, “उसे बुलवा भेज; क्योंकि जब तक वह यहाँ न आए तब तक हम खाने को न बैठेंगे।” 12तब वह उसे बुलाकर भीतर ले आया। उसके तो लाली झलकती थी, और उसकी आँखें सुन्दर, और उसका रूप सुडौल था। तब यहोवा ने कहा, “उठकर इस का अभिषेक कर : यही है।” 13तब शमूएल ने अपना तेल का सींग लेकर उसके भाइयों के मध्य में उसका अभिषेक किया; और उस दिन से लेकर भविष्य को यहोवा का आत्मा दाऊद पर बल से उतरता रहा। तब शमूएल उठकर रामा को चला गया।


दाऊद को राष्ट्र में आत्मिक और सार्वजनिक नेतृत्व के लिए प्रभु द्वारा चुना गया था, परन्तु ऐसा लगता है कि वह अपने परिवार में एक अयोग्य व्यक्ति था। इससे हम सीख सकते हैं कि अपने आस-पास के लोगों से अलग होना ठीक है, विशेष रूप से जब उस अंतर को एक अच्छे काम के लिए अलग रखा जाना है, जो परमेश्‍वर हमारे माध्यम से करना चाहता है, जबकि अन्य लोग पैसे कमाने, मस्ती मारने और सुख की खोज करने जैसी छोटी चीजों में व्यस्त रहते हैं। एक ऐसा व्यक्ति होना सर्वोत्तम है, जो परमेश्‍वर के साथ मेल खाता हो, हालाँकि वे दूसरों के साथ कम मूल्यों की भावना और शाश्‍वत मूल्य की कम उपलब्धियों के साथ गलत हैं।


परमेश्‍वर शायद ही कभी हमें अपनी पसन्द पहले दिखाता है। सोच और काम दोनों में, आरम्भ करने और रुकने, आगे बढ़ने और खत्म करने की प्रक्रिया में विकल्पों के एक चक्र के बाद ही परमेश्‍वर आखिरकार हमें उन बहुमूल्य और सच्चे निर्णयों को खोजने में सहायता प्रदान करता है, जो उसने हमारे जीवन के लिए रखे हैं। शमूएल के रूप में, हमें अक्सर 'सात' गलत विकल्पों को अस्वीकार करना पड़ता है, इससे पहले कि हम पूरी तरह से कुछ भूल जाएँ, हम 'आठवीं' संभावना में उसे पाते हैं; एक या वह बात जिसे हम सदैव से ढूँढ रहे थे।


संभवतः दाऊद को कई प्रतिभाशाली लोगों का सामान्य अनुभव था – अजीब से, सामान्य लोगों के बीच बड़े होना, जो उसे बहुत कम आंकते थे और उसे बहुत ज्यादा कम पसन्द करते थे। उसके असामान्य संगीत, बौद्धिक, काव्यात्मक और अगुवाई-की ओर उन्मुख उपहारों ने उसे अपने भाइयों के लिए अपमानजनक बना दिया होगा। अस्वीकृति या प्रशंसा की कमी एक कठिन पाठशाला है; परन्तु जब यह हमारे अच्छे व्यवहार को बुरा नहीं बनाती है, तो इसके विपरीत, यह लोगों को मजबूत बना देती है। दाऊद की स्पष्ट अस्वीकृति या, कम से कम, उसके परिवार और एकान्त में रहने वाले चरवाहे के जीवन द्वारा उसके उपहारों के लिए प्रशंसा की कमी ने उसे कई बहुमूल्य सबक और अन्य लाभों के साथ सिखाए, जिसने उसे एकान्त में अकेले परमेश्‍वर के साथ समय व्यतीत करने का अमूल्य उपहार दिया। अकेला रहना और अकेलापन महसूस करना दो अलग-अलग बातें हैं। एकान्त में काव्य रचना करा, वीरता और गहरी व्यक्तिगत आत्मिकता जैसी अच्छी चीजें पैदा कर सकता है। अस्वीकार, दाऊद के विषय में उसे अपने परमेश्‍वर के साथ एक गहरे व्यक्तिगत संबंध में ले गया।


हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि दाऊद असाधारण था। भजन संहिता 8, भजन संहिता 19:1-6 और भजन संहिता 23 जैसी उसकी कविताओं को देखें, जो हमें कुछ ऐसा दिखाती हैं, जो शायद दाऊद ने भेड़ों को देखते हुए सीखा होगा। 


भजन संहिता 8:  हे यहोवा हमारे प्रभु, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर क्या ही प्रतापमय है! तू ने अपना वैभव स्वर्ग पर दिखाया है। तू ने अपने बैरियों के कारण बच्‍चों और दूध पिउवों के द्वारा सामर्थ्य की नींव डाली है, ताकि तू शत्रु और पलटा लेनेवालों को रोक रखे। जब मैं आकाश को, जो तेरे हाथों का कार्य है, और चंद्रमा और तारागण को जो तू ने नियुक्‍त किए हैं, देखता हूँ; तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले? क्योंकि तू ने उसको परमेश्‍वर से थोड़ा ही कम बनाया है, और महिमा और प्रताप का मुकुट उसके सिर पर रखा है। तू ने उसे अपने हाथों के कार्यों पर प्रभुता दी है; तू ने उसके पाँव तले सब कुछ कर दिया है : सब भेड़–बकरी और गाय–बैल और जितने वनपशु हैं, आकाश के पक्षी और समुद्र की मछलियाँ, और जितने जीव–जन्तु समुद्रों में चलते फिरते हैं। हे यहोवा, हे हमारे प्रभु, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर क्या ही प्रतापमय है।


भजन संहिता 19:1-6  आकाश परमेश्‍वर की महिमा का वर्णन कर रहा है; और आकाशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है। न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहाँ उनका शब्द सुनाई नहीं देता है। उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूँज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुँच गए हैं। उन में उसने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है, जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर के समान अपनी दौड़ दौड़ने में हर्षित होता है। वह आकाश के एक सिरे से निकलता है, और वह उसके दूसरे सिरे तक चक्‍कर मारता है; और उसकी गर्मी सबको पहुँचती है। 


आकाश परमेश्‍वर की महिमा का वर्णन कर रहा है


הַשָּׁמַיִם, מְסַפְּרִים כְּבוֹד-אֵל;


कितना सरल परन्तु कितना गहरा कथन है। यह विचार कहाँ से आया? दाऊद को किसने सिखाया?


भजन संहिता 23: यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी। वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है; वह मेरे जी में जी ले आता है। धर्म के मार्गों में वह अपने नाम के निमित्त मेरी अगुवाई करता है। चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में होकर चलूँ, तौभी हानि से न डरूँगा; क्योंकि तू मेरे साथ रहता है; तेरे सोंटे और तेरी लाठी से मुझे शान्ति मिलती है। तू मेरे सतानेवालों के सामने मेरे लिये मेज़ बिछाता है; तू ने मेरे सिर पर तेल मला है, मेरा कटोरा उमड़ रहा है। निश्‍चय भलाई और करुणा जीवन भर मेरे साथ साथ बनी रहेंगी; और मैं यहोवा के धाम में सर्वदा वास करूँगा।


भविष्य के राजा के लिए बैतलहम के पास एकांत वाली पहाड़ियों पर एक अकेले चरवाहे के जीवन की तुलना में कई बदतर और अधिक कठिन पाठशालाएँ थीं, परन्तु इस महत्वपूर्ण घटना ने नेतृत्व विकास की जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया को आरम्भ किया।


दाऊद खेतों में भेड़ों को चरा रहा था, और उसे वहीं छोड़ दिया गया था, हालाँकि उसके पिता के घर में एक बलिदान और जेवनार थी।  परिवारों में सबसे छोटी सन्तान को अक्सर पसन्द किया जाता है और इस कारण वह अक्सर खराब भी हो जाती है, परन्तु ऐसा प्रतीत होता है कि दाऊद यिशै के सभी बेटों में सबसे कम पसन्द किया जाता था; या तो उन्होंने उसकी उत्कृष्ट भावना को नहीं समझा या उसे सही ढंग से महत्व नहीं दिया। यदि हमें अनदेखा किया जाता है, तो परमेश्‍वर के बजाय मनुष्य द्वारा अनदेखा किया जाए।  दाऊद यिशै की अतिथि सूची में भी नहीं था, परन्तु परमेश्‍वर की सूची में सबसे ऊपर था।


जब दाऊद आया तो वह कैसा दिखाई दिया होगा? उसके वस्त्रों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। इसमें कोई सन्देह नहीं है कि वह अपने काम के अनुसार एक चरवाहा था, साधारण और मोटा, जैसा कि चरवाहों के वस्त्र आम तौर पर होते हैं, और उसने यूसुफ की तरह उसने अपने वस्त्र नहीं बदले थे, फिर भी, दूसरी ओर, वह बहुत ईमानदार दिखता था, शालीन नहीं, जैसा कि शाऊल था, परन्तु वह कोमल और सुंदर था। वह शायद चरवाही के मैदान से आया था, जैसे वह था। वचन 12 में कहा गया है कि, "उसके तो लाली झलकती थी, और उसकी आँखें सुन्दर, और उसका रूप सुडौल था।।"


जैसा कि मूसा को यित्रो के झुंडों की देखभाल के लिए रखा गया था, जो इस्राएल के इतिहास में एक पूर्व पीढ़ी में एकान्त में विनम्रता और उत्पादकता का परमेश्‍वर-को-प्रसन्न करने वाला उदाहरण था, इसलिए दाऊद को अब परमेश्‍वर द्वारा चुना गया था और वह एक झुंड से दूसरे झुंड को चरवाही के लिए लेकर जाया करता था। भजन संहिता 78:70-72 कहता है, "फिर उसने अपने दास दाऊद को चुनकर भेड़शालाओं में से ले लिया; वह उसको बच्‍चेवाली भेड़ों के पीछे पीछे फिरने से ले आया कि वह उसकी प्रजा याकूब की अर्थात् उसके निज भाग इस्राएल की चरवाही करे। तब उसने खरे मन से उनकी चरवाही की, और अपने हाथ की कुशलता से उनकी अगुवाई की।"


शमूएल "...उठकर इस का अभिषेक कर : यही है" (वचन 13)। दाऊद का उसके परिवार के सामने अभिषेक किया गया। हम यह भी जानते हैं कि बाद में युद्ध के मैदान में एलीआब ने दाऊद के बारे में कम सोच को व्यक्त करता है। क्या यह एलीआब की ओर से ईर्ष्या वाली बात थी - आँशिक रूप से एलीआब पर हमारी कहानी में दाऊद के चयन के कारण? क्या एलीयाब ने सदैव दाऊद के बारे में इतना कम सोचा था? 1 शमूएल 17:28 हमें बताता है कि एलीआब ने उसके बारे में क्या सोचा थाः "तेरा अभिमान और तेरे मन की बुराई मुझे मालूम है; तू तो लड़ाई देखने के लिये यहाँ आया है।"


कुछ विद्वानों का कहना है कि दाऊद लगभग बीस वर्ष का था। मैंने यह भी पढ़ा है कि दाऊद लगभग सत्रह वर्ष का हो सकता है, जब उसने उस शूरवीर को मार डाला, जो अगले अध्याय में वर्णित है। इसलिए शाऊल के साथ दाऊद की परेशानियाँ - नेतृत्व के लिए उसका आगे का प्रशिक्षण - दस से तेरह वर्षों के बीच चला, क्योंकि हम जानते हैं कि दाऊद तीस वर्ष का था, जब उसने राज्य करना आरम्भ किया था।


शमूएल ने लोगों के समाज में दाऊद की शिक्षा की कमी, उसकी कम आयु, या उसके परिवार को उसके लिए कम सम्मान पर आपत्ति नहीं की, परन्तु ईश्‍वरीय आज्ञा के पालन में, उसके तेल के सींग को ले लिया और उसे अभिषेक किया।


उस स्थापित चिन्ह के साथ एक ईश्‍वरीय सामर्थ्य भी थी। तेल से अभिषेक पवित्र आत्मा के अभिषेक का प्रतीक था। तेल दृश्यमान सामग्री था; पवित्र आत्मा अदृश्य था, आत्मिक परन्तु तेल से भी अधिक वास्तविक था। दाऊद ने स्वयं को परिवर्तित, आँतरिक रूप से ज्ञान, साहस और परमेश्‍वर के झुंड के लिए चिंता में विकसित होते पाया। राजा बनने की दिशा में बदलाव उस दिन से ही आरम्भ हो गया, हालाँकि इसे पूरी तरह से विकसित होने में कई वर्ष लग गए। शायद भालू और शेर को मारने का उसका साहस या यहाँ तक कि उसकी काव्यात्मक और संगीत क्षमताएँ और गहरी आत्मिक धारणाएँ या तो अभिषेक से आई थीं, या कम से कम, इस अभिषेक से उल्लेखनीय रूप से बढ़ गई थीं। क्या यह शमूएल के कहने के बाद हुआ था कि दाऊद ने भालू और शेर को मार डाला? यदि ऐसा है, तो हम अनुमान लगा सकते हैं कि उसके जीवन पर पवित्र आत्मा के अभिषेक के साथ ईश्‍वरीय बुलाहट ने उसे नया हियाव दिया।


इसलिए यह घटना भविष्यद्वक्ता शमूएल का गंभीर अन्तिम कार्य था - अर्थात् राजाशाही को स्थानांतरित करना; परन्तु यह दाऊद के लिए दो तरह से सिंहासन के लिए उसके प्रशिक्षण का आरम्भ था। पहला, प्रभु का आत्मा उस दिन से दाऊद पर उतरा। दूसरा, उसके बुलाहट की जागरूकता निश्‍चित रूप से उसे तेजी से परिपक्व बनाती है, यह शांत विचार, कमजोरी की एक विनम्र भावना और परमेश्‍वर में दृढ़ विश्‍वास लाती है, जिसने उसे बुलाया था। इसके अतिरिक्त, जब वह झुंड में लौट आया, तो उसे अब अपनी युवा महत्वाकांक्षाओं में धैर्य और आत्म-नियंत्रण जोड़ना पड़ा।


यहाँ एक बड़ा सबक यह है कि परमेश्‍वर शक्तिशाली चीजों को भ्रमित करने के लिए संसार की कमजोर चीजों को चुनता है। इस प्रकार परमेश्‍वर अपनी पसन्द की प्रभुता सम्पन्न स्वतंत्रता और अपने आत्मा की सामर्थ्य दोनों को बढ़ाता है, जिसने युवा चरवाहे को भेड़शाला से हटा दिया, उसे एक अस्वीकृत, क्रोधित और खतरनाक शाऊल के कठोर मार्गदर्शन के अधीन राजा – बनने का प्रशिक्षण दिया, और इस तरह उसे राजनीतिक और आत्मिक दोनों तरह से परमेश्‍वर के लोगों का नेतृत्व करने के लिए योग्य बनाया।

यहाँ उन सभी युवा और उत्सुक लोगों के लिए एक सबक दिया गया है, जो वर्तमान में निम्न कार्यों तक ही सीमित हैं, और अज्ञात और धीमे भविष्य में कुछ ऊँचे की प्राप्ति के लिए बुलाहट महसूस कर रहे हैं। धैर्य, आज के तुच्छ कार्यों को विश्‍वासयोग्यता से करना, आत्म-त्याग की आदत, हमारे परमेश्‍वर में शांत भरोसा, जो उचित समय पर मार्ग खोलता है, वह दाऊद और उसके जैसे अन्य लोगों और स्त्रियों के लिए आवश्यक है, जो मसीही नेतृत्व के लिए परमेश्‍वर-प्रदत्त आकांक्षा रखते हैं। ये, और उनके जैसे अन्य गुण, संकेत थे कि दाऊद को सिंहासन पर विराजमान होने के लिए बुलाया गया था, और यह कि परमेश्‍वर का आत्मा उसे इसके लिए तैयार कर रहा था। वे ऐसे गुण हैं, जो भविष्य में परमेश्‍वर ने हमारे लिए जो कुछ भी रखा है, उसके लिए हमें सबसे अच्छी तरह से तैयार करते हैं। दाऊद के तेरह वर्षों के प्रतीक्षा और प्रशिक्षण को स्मरण करें और धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करें।


जो लोग केवल देखने वाली चीजों के अनुसार निर्णय लेते हैं, वे सामान्य तौर पर धोखा खाते हैं; परन्तु जो परमेश्‍वर हृदय की गहराई तक देखते हैं, यहाँ तक कि इसकी सबसे धीमी गति में भी, और हमारे चरित्र को भी, जो उसके लिए बहुत स्पष्ट है, जो हम से भी ज्यादा हमें सर्वोत्तम जानता है।


सच है, हृदय की गहरी विनम्रता मनुष्य में प्रमुख दिखाई देने वाला "रूप" है, जो परमेश्‍वर को प्रसन्न करता है "क्योंकि जो महान् और उत्तम और सदैव स्थिर रहता, और जिसका नाम पवित्र है, वह यों कहता है, "मैं ऊँचे पर और पवित्रस्थान में निवास करता हूँ, और उसके संग भी रहता हूँ, जो खेदित और नम्र है, कि नम्र लोगों के हृदय और खेदित लोगों के मन को हर्षित करूँ"  (यशायाह 57:15)। परमेश्‍वर अन्य सभी गुणों के आधार पर हृदय की विनम्रता की खोज करता है, क्योंकि इसमें परमेश्‍वर के भय के लिए स्थान होता है। परन्तु घमण्डी मन में परमेश्‍वर का डर आसानी से अनदेखा हो जाता है।


सच्ची मसीहियत विश्‍वास में शारीरिक रूप से इतनी महत्वपूर्ण नहीं है, और शारीरिक सौंदर्य वास्तविक पवित्रता नहीं है। दाऊद के जीवन के अगुवों के लिए 150 पाठों की इस पूरी श्रृँखला में चरित्र हमारे ध्यान का एक प्रमुख उद्देश्य रहेगा। एक मनभावनी बाहरी हिस्सा आकर्षक होता है और हम चाहते हैं कि यह केवल उस हद तक परमेश्‍वर की महिमा करे,  परन्तु हम मनोवृत्तियों, कार्यों और मन के मुद्दों के बारे में अधिक चिन्ता होती है। हमें इसका दो तरीकों से अभ्यास करने की आवश्यकता है। (1) अपने बाहरी शारीरिक रूप में व्यस्त न रहें और (2) दूसरों के केवल शारीरिक रूप से मसीही नेतृत्व के लिए अधिक मूल्यवान आत्मिक योग्यता से प्रभावित या अंधे न हों। प्रश्न पूछने, उत्तरों को सुनने, व्यवहारों को देखने, एक सुंदर हृदय के आत्मिक संकेतों को देखने का अभ्यास करें। मसीही अगुवे इन दो जिम्मेदारियों को समझेंगे, यदि उन्होंने इस शिक्षा से अच्छी तरह से सबक सीखा होगा।


इस पाठ के मूल्य को हमारी अपनी पीढ़ी तक लाने के लिए, अपने जीवन में आत्मिक अगुवों, मसीही अगुवों के बारे में सोचें, जिन्होंने आपको सबसे अच्छे के लिए सबसे अधिक प्रभावित किया है। क्या उनके हृदय और आत्मिक गुणों ने आपको सबसे अधिक प्रभावित नहीं किया है? आप ऐसे लोगों को जानते हैं, जो सुंदर या सुडौल हैं, जो अच्छे चरित्र विकास के लिए आपको प्रभावित नहीं करते हैं। हम अब दाऊद के जीवन के अगुवों के लिए 150 पाठों की एक श्रृँखला में आरम्भ कर रहे हैं। पूरी श्रृँखला के दौरान दाऊद के आत्मिक गुणों पर ध्यान देना सीखें और परमेश्‍वर से उन्हें विकसित करने में आपकी सहायता करने के लिए कहें। परमेश्‍वर इस तरह के अध्ययनों की एक श्रृँखला का उपयोग कर सकता है, जैसे कि वह एक बाइबल स्कूल या सेमिनरी कक्षा का उपयोग करता है। "नेतृत्व विकास" के बारे में सुनने से बहुत पहले से ही परमेश्‍वर आत्मिक अगुवों का विकास कर रहा होता है।


यदि आप एक मसीही अगुवे, पास्टर, प्रचारक, मिशनरी या शिक्षक हैं, या बनने की इच्छा रखते हैं, तो ये ऐसे सबक हैं, जो हमारे लिए सीखना अच्छा है। हम दूसरों को दिए गए निर्देशों, आदेशों या सुझावों की तुलना में अपने जीवन के नमूने और कार्यों से अधिक नेतृत्व करते हैं, जो हमारे मन से बहते रहते हैं। यहाँ, दाऊद के जीवन के इस अध्ययन के आरम्भ से, दाऊद की तरह परमेश्‍वर के लोगों को बुद्धिमानी और दयालुता से नेतृत्व करने के लिए स्वयं को विकसित करने की दिशा में एक दृष्टिकोण के साथ, इस प्रमुख मुद्दे को हल करने का एक अच्छा समय है। हृदय संबंधी बातें, चरित्र, विनम्रता और परमेश्‍वर के प्रति गहरा प्रेम परमेश्‍वर के राज्य में नेतृत्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण योग्यताएँ हैं। परमेश्‍वर इस तरह के गुणों की खोज करता है, जब वह अपने सेवकों को सेवकाई के लिए बुलाता है। आइए हम उन्हें अपने भीतर विकसित और पोषित करें और उन लोगों को प्रोत्साहित करें, जिन्हें हम नेतृत्व के लिए प्रशिक्षित करना चाहते हैं। हो सकता है कि दाऊद अपने परिवार में अनुपयुक्त रहा हो, परन्तु वह उसके, इस्राएल और मसीही मण्डली के लिए परमेश्‍वर की योजना में अनुपयुक्त नहीं था।

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