शाऊल को पीछे हटाया जाना, दाऊद का ऊपर उठाया जाना
अध्याय तीन
1 शमूएल 16:14-19

Ron Meyers
14यहोवा का आत्मा शाऊल पर से उठ गया, और यहोवा की ओर से एक दुष्ट आत्मा उसे घबराने लगा। 15तब शाऊल के कर्मचारियों ने उससे कहा, “सुन, परमेश्वर की ओर से एक दुष्ट आत्मा तुझे घबराता है। 16हमारा प्रभु अपने कर्मचारियों को जो उपस्थित हैं आज्ञा दे, कि वे किसी अच्छे वीणा बजानेवाले को ढूँढ़ ले आएँ; और जब जब परमेश्वर की ओर से दुष्ट आत्मा तुझ पर चढ़े, तब तब वह अपने हाथ से बजाए, और तू अच्छा हो जाए।” 17शाऊल ने अपने कर्मचारियों से कहा, “अच्छा, एक उत्तम वीणा–वादक देखो, और उसे मेरे पास लाओ।” 18तब एक जवान ने उत्तर देके कहा, “सुन, मैं ने बैतलहमवासी यिशै के एक पुत्र को देखा जो वीणा बजाना जानता है, और वह वीर योद्धा भी है, और बात करने में बुद्धिमान और रूपवान भी है; और यहोवा उसके साथ रहता है।” 19तब शाऊल ने दूतों के हाथ यिशै के पास कहला भेजा, “अपने पुत्र दाऊद को, जो भेड़–बकरियों के साथ रहता है मेरे पास भेज दे।”
1 शमूएल 15 में शाऊल की घटना शाऊल और शमूएल दोनों के अपने-अपने मार्ग पर जाने के साथ समाप्त हुई। 1 शमूएल 16 में दाऊद के अगले राजा बनने के लिए अभिषिक्त होने के बाद शाऊल की कहानी को फिर से लिया गया है। शाऊल अब उसकी अपनी सबसे बड़ी समस्या था, क्योंकि वह स्वयं के लिए ही एक समस्या बन गया था। वचन 14 कहता है, "...यहोवा का आत्मा शाऊल पर से उठ गया, और यहोवा की ओर से एक दुष्ट आत्मा उसे घबराने लगा।" शाऊल परमेश्वर की अवज्ञा की ओर असफल हो गया, इसलिए परमेश्वर ने धर्मी न्याय को करते हुए शाऊल से उस भले आत्मा की सहायता वापस ले ली, जो परमेश्वर ने उसे दी थी और जिसके द्वारा शाऊल को सैन्य और राज्य विषयों में निर्देशित, प्रेरित और प्रोत्साहित किया जाता था। उसकी अवज्ञा के कारण, शाऊल ने अपने अच्छे गुण खो दिए। जब प्रभु का आत्मा हमसे दूर हो जाता है, तो भलाई और अच्छाई का स्रोत चला जाता है। हे प्रभु! कृपया हम में से किसी के बारे में यह कभी न कहा जाए कि आपका आत्मा हमसे दूर हो जाए।
1 शमूएल अध्याय 13 और 15 में दिखाए गए प्रभु के प्रति उसके लगातार, दृढ़ अभिमान और अवज्ञा के कारण, प्रभु यहोवा द्वारा उसकी अस्वीकृति उसके द्वारा ईश्वरीय आत्मा के ले लिए जाने का कारण बनी। परमेश्वर के धर्मी न्याय के प्रति विनम्रता से झुकने और परमेश्वर के शक्तिशाली हाथ के नीचे झुकने के बजाय, वह परमेश्वर के पवित्र मार्गों पर अप्रसन्नता और असंतोष के अधीन हो गया, और इसलिए उसे एक दुष्ट आत्मा की शक्ति के अधीन कर दिया गया, जिसने उसे परेशान किया और कभी-कभी उसे पागलपन की ओर भी धकेल दिया।
"...यहोवा की ओर से एक दुष्ट आत्मा उसे घबराने लगा।" यह एक भयानक वाक्य है। शाब्दिक रूप से इब्रानी में, इसका अर्थ है 'उस पर उतर आया और उसे भयभीत कर दिया।'
मुझे लगता था कि परमेश्वर भली वस्तुओं को ही देता है।"क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिसमें न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, और न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है" (याकूब 1:17)। परमेश्वर ने शाऊल को एक अच्छा और परिपूर्ण उपहार दिया था। उस हर्ष के मौके पर, "परमेश्वर ने उसके मन को परिवर्तित किया"(1 शमूएल 10:9)। शाऊल एक और तरह का व्यक्ति बन गया, अर्थात् वह जो राजकीय विचारों, हियाव, विश्वास, ज्ञान और प्रेरणा से भरा हुआ व्यक्ति था, अब कुछ और बन गया। यदि आप 1 शमूएल अध्याय 10 से 12 पढ़ेंगे, तो आप देखेंगे कि आरम्भ में शाऊल कितना अच्छा था। शाऊल ने जो "आत्मा" खो दिया था, वह वही है, जो शाऊल को तब मिला था, जब उसका शमूएल ने उसका अभिषेक किया था। उसने अच्छा आरम्भ किया था।
जो अपनी अवज्ञा से भले आत्मा को अपने से दूर भगाते हैं, वे बुरी आत्माओं की शक्तियों के अधीन हो जाते हैं। यदि परमेश्वर और उसकी कृपा हम पर शासन नहीं करती है, तो पाप और शैतान की अधीनता में होंगे। शैतान ने, स्पष्ट रूप से परमेश्वर की अनुमति से, शाऊल को उसके शरीर की भ्रष्ट भावनाओं और उसके मन की भावनाओं के द्वारा परेशान और भयभीत कर दिया। शैतान हमारी समस्याओं पर आक्रमण करता है - उसकी "सहायता" के बिना, वह उन्हें बदतर बना देता है। अवज्ञा में जीना बुरा, दु:खद, कठिन, निराशाजनक और पीड़ा देने वाला होता है, परन्तु शैतान इसका लाभ उठाता है और इसे बदतर बना देता है।
वचन 14 में कहा गया है, "यहोवा की ओर से एक दुष्ट आत्मा उसे घबराने लगा।" जब मनुष्य जानबूझकर पाप द्वारा आत्मा को दु:खी करते और उसे बुझा देते हैं, तो परमेश्वर का आत्मा चला जाता है; वह सदैव हमें कायल करने की कोशिश नहीं करेगा। परमेश्वर को बहुत दूर धकेलना संभव है। शाऊल ने ऐसा ही किया।
जब परमेश्वर का आत्मा मनुष्य से अलग हो जाता है, तो वह केवल अपने लिए अकेला नहीं छोड़ा दिया जाता है, बल्कि जैसा कि शाऊल का उदाहरण दिखाता है, उसका हृदय दुष्ट आत्मा का घर बन जाता है। जहाँ से ईश्वरीय आत्मा चला जाता है, वहाँ दुष्ट आत्मा उसके स्थान पर आ जाता है। एक या दूसरी आत्मा हम पर कब्जा कर लेती है।
जब परमेश्वर का आत्मा हमें सुधारता है और हमारा मार्गदर्शन करता है, तो यह हम पर एक दयालुता भरी दया होती है। पवित्र आत्मा, जो विश्वास हमें देता है, वह हमारे लिए अच्छा है। यह हमारी रक्षा कर सकता है, यदि हम उसके प्रति अनुकूल प्रतिक्रिया देंगे। परन्तु यदि हम अवज्ञा करना जारी रखते हैं और कठोर हो जाते हैं, तो परमेश्वर अंततः हमें अस्वीकार कर देगा और इसका मतलब है कि वह अपने पवित्र आत्मा को हमसे वापस ले लेगा। प्रत्येक विश्वासी के लिए इसे समझना महत्वपूर्ण है, परन्तु इससे भी अधिक महत्वपूर्ण है, जिसे एक मसीही अगुवे करता है।
जो स्वयं को परमेश्वर के आत्मा द्वारा शासित नहीं होने देता है, और उसे बाहर निकाल देता है; और जब वह बाहर निकाल दिया जाता है, तब वहाँ कोई तीसरी स्थिति संभव नहीं रहती, इसके अतिरिक्त, कि उसमें दुष्ट आत्मा फिर से प्रवेश करती है। परमेश्वर की आज्ञा का अर्थ है, परमेश्वर के साथ या परमेश्वर के पक्ष में रहना और यदि हम परमेश्वर के पक्ष में नहीं हैं और परमेश्वर के साथ मिले नहीं रहते हैं, तो हम तितर-बितर हो जाते हैं। लूका 11:23-26 में यीशु ने कहा, "जो मेरे साथ नहीं वह मेरे विरोध में है, और जो मेरे साथ नहीं बटोरता वह बिखेरता है। "जब अशुद्ध आत्मा मनुष्य में से निकल जाती है तो सूखी जगहों में विश्राम ढूँढ़ती फिरती है, और जब नहीं पाती तो कहती है, ‘मैं अपने उसी घर में जहाँ से निकली थी लौट जाऊँगी।’ और आकर उसे झाड़ा–बुहारा और सजा–सजाया पाती है। तब वह जाकर अपने से बुरी सात और आत्माओं को अपने साथ ले आती है, और वे उसमें पैठकर वास करती हैं, और उस मनुष्य की पिछली दशा पहले से भी बुरी हो जाती है।"" ये बहुत कठिन शब्द हैं; ". ..उस मनुष्य की पिछली दशा पहले से भी बुरी हो जाती है।" शाऊल के साथ ऐसा ही हुआ। हमारे पास एक या दूसरे प्रकार की आत्मा होगी, इसलिए हमें उन लोगों पर भी दया करनी चाहिए, जो अपने पापों के कारण स्वयं पर परमेश्वर के दण्ड को ले आएँ हैं, और उन्हें सलाह देनी चाहिए कि उनका समाधान कैसे सर्वोत्तम हो सकता है। और हमें स्वयं सावधान रहना चाहिए कि ऐसा कुछ न करें या न सोचें, जो पवित्र आत्मा को हमारे जीवन में अप्रिय बना दे। परन्तु दाऊद के विपरीत, शाऊल के जीवन से हमारे लिए सबसे बड़ा सबक यह है कि शाऊल ने अपनी अवज्ञा से परमेश्वर के आत्मा को अपने से दूर कर दिया और दाऊद ने अपनी आज्ञाकारिता से परमेश्वर के आत्मा की निरंतर उपस्थिति का स्वागत किया।
जब दाऊद ने शाऊल को देखा, तो उसने देखा कि परमेश्वर के आत्मा का चले जाना और एक दुष्ट आत्मा का उसके स्थान लेना कैसा होता है। जब दाऊद ने बतशेबा के साथ पाप किया, तो उसने प्रार्थना की, "मुझे अपने सामने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझ से अलग न कर" (भजन संहिता 51:11)। वह नहीं चाहता था कि उसके साथ ऐसा हो। क्या आप देख सकते हैं कि दाऊद ने शाऊल के दरबार में जो देखा, उसके माध्यम से परमेश्वर उसे कैसे प्रशिक्षित कर रहा था? हम देख सकते हैं कि परमेश्वर कैसे दाऊद को प्रशिक्षित कर रहा था। यदि वह आज भी इन्हीं तरीकों का उपयोग करता है, और करता भी है, तो हमें भी अपने आस-पास होने वाली चीजों से सीखना चाहिए। उसने जो देखा, वह शाऊल के साथ हुआ था। इससे हमें सिखाना चाहिए कि जैसे दाऊद ने प्रार्थना की, वैसे ही प्रार्थना करें।
यदि हम हठ करके परमेश्वर पर दबाव डालेंगे, तो वह अपना प्रेम हम से हटा लेगा। बाद में इस इतिहास में, 2 शमूएल 7:15 में नातान के अनुसार, दाऊद को दी गई एक भली प्रतिज्ञा में, परमेश्वर कहता है कि उसने शाऊल से अपना प्रेम वापस ले लिया है। "परन्तु मेरी करुणा उस (दाऊद के वंशज से) पर से ऐसे न हटेगी, जैसे मैं ने शाऊल पर से हटा ली थी और उसको तेरे आगे से दूर किया था।" मैं नहीं चाहता कि परमेश्वर अपने प्रेम या आत्मा को मुझसे हटा ले। और ना ही आप ऐसा कर सकते हैं! शाऊल के विपरीत, ध्यान दें कि जब कठिनाइयाँ आईं, तो दाऊद ने क्या किया। "मृत्यु की रस्सियों से मैं चारों ओर घिर गया हूँ, और अधर्म की बाढ़ ने मुझ को भयभीत कर दिया; पाताल की रस्सियाँ मेरे चारों ओर थीं, और मृत्यु के फन्दे मुझ पर आए थे। अपने संकट में मैं ने यहोवा परमेश्वर को पुकारा; मैं ने अपने परमेश्वर की दोहाई दी; और उसने अपने मन्दिर में से मेरी बातें सुनी; और मेरी दोहाई उसके पास पहुँचकर उसके कानों में पड़ी" (भजन संहिता 18:4-6)।
दाऊद, को देखना होगा कि शाऊल के दरबार में आगे क्या कुछ है। शाऊल की मनोवृत्ति, व्यवहार और बर्ताव में वही आत्मिक स्थिति वर्षों तक बनी रही। दो अध्यायों के बाद, 1 शमूएल के 18:10 एवं 11 में ऐसे लिखा है, "दूसरे दिन परमेश्वर की ओर से एक दुष्ट आत्मा शाऊल पर बल से उतरा, और वह अपने घर के भीतर नबूवत करने लगा; दाऊद प्रतिदिन के समान अपने हाथ से बजा रहा था, और शाऊल अपने हाथ में अपना भाला लिए हुए था। तब शाऊल ने यह सोचकर कि “मैं ऐसा मारूँगा कि भाला दाऊद को बेधकर भीत में धँस जाए,” भाले को चलाया, परन्तु दाऊद उसके सामने से दोनों बार हट गया।"
एक दुष्ट आत्मा प्रभु यहोवा की ओर से कैसे आ सकती है? मनुष्य या तो ऊपर से आए आत्मा द्वारा या नीचे से आई आत्मा द्वारा शासित होता है; कोई तीसरा मार्ग नहीं है; वह या तो प्रकाश या अंधेरे के राज्य की ओर से होना चाहिए; वह या तो प्रभु यहोवा का आत्मा या दुष्ट आत्मा द्वारा निर्देशित होता है। मनुष्य या तो पवित्र आत्मा या फिर दुष्ट आत्माओं के अधीन है। परन्तु यह दु:खद कहानी हमें और अधिक कुछ सिखाती हैः अर्थात्, जब हम अपनी पसन्द से परमेश्वर के तरीकों को अस्वीकार करते हैं, तो परमेश्वर अवज्ञाकारी व्यक्ति को दण्ड के लिए दुष्ट आत्माओं की शक्ति पर लिए छोड़ देता है। गलत के लिए दण्ड दिया जाना, परमेश्वर द्वारा उपयोग किए जाने वाले "साधन" की परवाह किए बिना, सदैव "परमेश्वर की ओर" होता है। आपको मुझे यह समझाने में मुश्किल होगा कि केवल दण्ड "अच्छा और सही उपहार" नहीं है। धार्मिकता से भरा, उचित और निष्पक्ष दण्ड चेतावनी देता है, यह एक निवारक के रूप में कार्य करता है, और मुझे सावधानी देता है - ये सभी मेरे लिए अच्छे हैं।
बहुत ही रुचिपूर्ण रीति से, हम देखते हैं कि परमेश्वर ने, बिना किसी के उलट-फेर के, दाऊद के लिए अपने प्रशिक्षण का अगला चरण आरम्भ करने के लिए एक मार्ग तैयार किया। जब शाऊल के सलाहकार देखते हैं कि उनके राजा में एक दुष्ट आत्मा काम कर रही है, तो वे उसे शांत करने के लिए एक योजना की अनुशंसा करते हैं। वचन 16 कहता है, "...किसी अच्छे वीणा बजानेवाले को ढूँढ़ लिया जाए...तब तब वह अपने हाथ से बजाए" (वचन 16)। परमेश्वर दाऊद को राजा के दरबार में शासन संबंधित कार्यों में प्रशिक्षित करने के लिए एक स्थान तैयार करने पर काम कर रहा था।
वे शाऊल के कितने अच्छे सेवक होते, यदि उन्होंने उसे सलाह दी होती कि वह सच्चा पश्चाताप करके परमेश्वर के साथ मेल-मिलाप कर ले, शमूएल को बुलाए, उसके साथ प्रार्थना करे और यह कि वह उसके लिए परमेश्वर से याचना करे, क्योंकि बुरी आत्मा प्रभु यहोवा की ओर से थी! तब शायद उसे न केवल कुछ समय के लिए वर्तमान में राहत मिली होगी, बल्कि भली आत्मा उसके पास लौट आई होगी। परन्तु उनकी योजना उसे प्रसन्न करना है, और इसलिए उसे चंगा करना था। वे उसे "अच्छा" महसूस कराने में ही संतुष्ट थे, परन्तु उसे "अच्छा" होने में सहायता करने का अवसर गँवा बैठे।
फिर भी शाऊल के सेवकों ने पूरी तरह से चूक नहीं की, क्योंकि दाऊद द्वारा प्रदान किए गए संगीत ने परमेश्वर के आत्मा को फिर से काम करने का अवसर दिया। यहाँ तक कि भले भविष्यद्वक्ता एलीशा ने भी संगीत का अनुरोध किया था और अपनी आत्मा के शांत होने, आराम पाने और प्रभु यहोवा पर ध्यान केंद्रित करने के बाद ही वह प्रभु की वाणी को देने में सक्षम हुआ था। पर अब किसी बजानेवाले को मेरे पास ले आओ। जब बजानेवाला बजाने लगा, "तब यहोवा की शक्ति एलीशा पर हुई" (2 राजा 3:15)।
या वे एक भूत सिद्धि करने वाली स्त्री के पास उसे भेज सकते थे, (जिससे शाऊल ने स्वयं बाद में अपने जीवन में मुलाकात की), परन्तु उन्होंने ऐसा नहीं किया। दुष्टात्माओं, दुष्ट शक्तियाँ, या अंधेरे वाले क्षेत्रों की किसी भी वस्तु से परामर्श करना एक दुष्ट आत्मा से होने वाली परेशानी से निपटारा करने का एक बहुत ही बुरा तरीका है। यह और भी अधिक परेशानी को आमंत्रित कर रहा है। उनका समाधान न तो सबसे अच्छा था और न ही सबसे बुरा।
शाऊल का सेवक, दाऊद को दरबार में बुलाने के लिए शाऊल को मनाने के लिए, उसका विस्तार से वर्णन करता है, न केवल एक वीणा वादक के रूप में, बल्कि वह भी कि जो शाऊल के लिए विशेष रूप से रुचिपूर्ण होगा, एक बहादुर व्यक्ति, एक योद्धा व्यक्ति, और बुद्धिमान व्यक्ति, एक सुंदर व्यक्ति, जिसके साथ प्रभु यहोवा विद्यमान है। "सुन, मैं ने बैतलहमवासी यिशै के एक पुत्र को देखा जो वीणा बजाना जानता है, और वह वीर योद्धा भी है, और बात करने में बुद्धिमान और रूपवान भी है; और यहोवा उसके साथ रहता है"(वचन 18)। ये सभी विशेषताएँ दाऊद के इतिहास में स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं; इस जानकारी से स्पष्ट पता चलता है कि वह युवक स्पष्ट रूप से दाऊद से अच्छी तरह से परिचित था। दाऊद की अपने पड़ोस में एक अच्छी प्रतिष्ठा रही होगी। आपकी प्रतिष्ठा क्या है? "यहाँ तक कि एक बच्चा भी अपने कार्यों से जाना जाता है, चाहे वे अच्छे हों या बुरे।" क्या आप एक मसीही अगुवे बनना चाहते हैं? तब आपकी प्रतिष्ठा महत्वपूर्ण है। इसे अच्छा बनाएँ।
शाऊल से बात करने वाले सेवक के अनुसार, दाऊद की मुख्य योग्यता यह है कि प्रभु यहोवा उसके साथ है। जैसे ही दाऊद शमूएल द्वारा अभिषेक किए जाने के बाद अपने देश के व्यवसाय में लौटा, शायद उसके सिर पर तेल का कोई निशान नहीं बचा था, और वह अत्याधिक सावधान रहा कि उस अभिषेक को गुप्त रख जाए, फिर भी तेल द्वारा दर्शाई गई आत्मा की कार्य-पद्धति को छिपाया नहीं जा सका। अस्पष्टता में भी देखा जाए, तो पड़ोसियों ने उसके मन, दृष्टिकोण, कविता, संगीत और पुरुष कौशल में सुधार को आश्चर्य के साथ देखा। दाऊद, अपने चरवाहे की अंगरखे में भी, एक विजेता बन गया है और उसकी प्रसिद्धि राजा के दरबार तक और राजा के सेवक के माध्यम से, यहाँ तक कि राजा के कानों तक भी पहुँच गई है।
दाऊद की प्रभु यहोवा के साथ संगति और सहभागिता के इस वर्णन का चरम बिंदु का हमें पहले से ही अध्याय में पहले से ही पता है, और यह किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे अच्छी प्रशंसा है। प्रभु यहोवा उसके साथ था। कितनी अच्छी बात है।
परन्तु उसकी बुद्धिमानी पहली बार यहाँ दिखाई देती है। "...और बात करने में बुद्धिमान है...।" क्या ऐसा हो सकता है कि दाऊद पर प्रभु यहोवा के आत्मा के आने के कारण वह बुद्धिमान व्यक्ति बन गया था – अर्थात् बोलने में एक सर्वोत्तम वक्ता? चरित्र और वाणी का एक-दूसरे से क्या लेना-देना है? जब परमेश्वर का आत्मा हमारे साथ होता है, तो परिवर्तन होते हैं, हमारे पास अधिक साहस और आत्म-विश्वास आ जाता है, यह अक्सर हमारे बोलने को प्रभावित करता है, हम सर्वोत्तम रीति से बोलते हैं, हमारे मौखिक कौशल में वृद्धि होती है, हम अधिक शक्तिशाली तरीके से बोलते हैं। हम शायद अधिक शांति से और आत्म-विश्वास से बोलते हैं, और इसलिए, अधिक बलपूर्वक और प्रेरक रूप से उस सत्य के कारण, जिसे हम समझते हैं और समझाते हैं। महत्वहीन मुद्दों के बारे में बहुत ज्यादा बात करना, एक व्यर्थ की बात बोलने वाला होना, अच्छा नहीं है, परन्तु परमेश्वर के बारे में बात करने और जो हम कहते हैं, उससे परमेश्वर की महिमा करने में सक्षम होना बात करने और यहाँ तक कि बहुत बात करने का एक अच्छा कारण है। बस अगले ही अध्याय में हम दाऊद को बाइबल में सबसे अच्छे बातों को बोलते हुए देखेंगे। यह आत्म-विश्वास, हियाव, सटीक ईश-विज्ञान और परमेश्वर की सामर्थ्य और शक्ति की अद्भुत गवाही से भरा है।
1 शमूएल 17:45-47 कहता है, "दाऊद ने पलिश्ती से कहा, "तू तो तलवार और भाला और साँग लिये हुए मेरे पास आता है; परन्तु मैं सेनाओं के यहोवा के नाम से तेरे पास आता हूँ, जो इस्राएली सेना का परमेश्वर है, और उसी को तू ने ललकारा है। आज के दिन यहोवा तुझ को मेरे हाथ में कर देगा, और मैं तुझ को मारूँगा, और तेरा सिर तेरे धड़ से अलग करूँगा; और मैं आज के दिन पलिश्ती सेना के शव आकाश के पक्षियों और पृथ्वी के जीव जन्तुओं को दे दूँगा; तब समस्त पृथ्वी के लोग जान लेंगे कि इस्राएल में एक परमेश्वर है। और यह समस्त मण्डली जान लेगी कि यहोवा तलवार या भाले के द्वारा जयवन्त नहीं करता, इसलिये कि संग्राम तो यहोवा का है, और वही तुम्हें हमारे हाथ में कर देगा।"" हाँ, दाऊद एक अच्छा वक्ता बन चुका था और शायद ऐसा इसलिए था, क्योंकि शमूएल की अभिषेक की प्रार्थनाओं में परमेश्वर का आत्मा उस पर आ उतरा था।
दाऊद वीर है, अच्छा बोलता है और प्रभु योहवा उसके साथ है। ये गुण दाऊद को आगे बढ़ाते हैं। यदि हम सीखना चाहते हैं कि कैसे एक ईश्वरीय, प्रभावशाली, अनुकरणीय और प्रभावी अगुवा बनना है, तो हम इससे अधिक स्पष्ट सबक की खोज कर सकते हैं? यहाँ मुद्दा यह भी है कि शाऊल क्यों इनकार करता है; परमेश्वर अब उसके साथ नहीं था। शाऊल अवज्ञा करता है और एक दुष्ट आत्मा से पीड़ित होता है। एक प्रभावी अगुवा न बनने के तरीके को दिखाने के लिए इससे अधिक भयावह दृश्य और क्या हो सकता है?