एक आदर्श चरवाहा

अध्याय सात


1 शमूएल 17:32-37

Ron Meyers

32तब दाऊद ने शाऊल से कहा, “किसी मनुष्य का मन उसके कारण कच्‍चा न हो; तेरा दास जाकर उस पलिश्ती से लड़ेगा।” 33शाऊल ने दाऊद से कहा, “तू जाकर उस पलिश्ती के विरुद्ध युद्ध नहीं कर सकता; क्योंकि तू तो लड़का ही है, और वह लड़कपन ही से योद्धा है।” 34दाऊद ने शाऊल से कहा, “तेरा दास अपने पिता की भेड़ बकरियाँ चराता था; और जब कोई सिंह या भालू झुण्ड में से मेम्ना उठा ले जाता, 35तब मैं उसका पीछा करके उसे मारता, और मेम्ने को उसके मुँह से छुड़ा लेता; और जब वह मुझ पर हमला करता, तब मैं उसके केश को पकड़कर उसे मार डालता था। 36तेरे दास ने सिंह और भालू दोनों को मारा है। और वह खतनारहित पलिश्ती उनके समान हो जाएगा, क्योंकि उसने जीवित परमेश्‍वर की सेना को ललकारा है।” 37फिर दाऊद ने कहा, “यहोवा जिसने मुझे सिंह और भालू दोनों के पंजे से बचाया है, वह मुझे उस पलिश्ती के हाथ से भी बचाएगा।” शाऊल ने दाऊद से कहा, “जा, यहोवा तेरे साथ रहे।”


इससे पहले, पहले शमूएल के अध्याय 17 में, हमने देखा कि दाऊद का चरित्र इस्राएली सैनिकों और उसके भाई एलीआब के साथ बातचीत में प्रकट होती है। अब दाऊद, शाऊल और गोलियत की बातों को सुनकर और अधिक सीखते हैं। दाऊद का विश्‍वास और अच्छा व्यवहार शाऊल की कायरता और गोलियत के अहंकार के विपरीत है। शाऊल और गोलियत विपरीत चरम सीमाओं का चित्रण करते हैं, जिनसे हम बचना चाहेंगे, जबकि दाऊद एक आदर्श प्रदान करता है, जिसे हम उत्सुकता से दोहराने का प्रयास करेंगे। शाऊल एक डरपोक व्यक्ति था, वह लड़ने से डरता था, गोलियत घमण्डी था, आत्म-निर्भर था, परन्तु दाऊद ने परमेश्‍वर में विश्‍वास, साहस और भरोसा दिखाया।


1. दाऊद का विश्‍वास शाऊल की कायरता के विपरीत था

"किसी मनुष्य का मन उसके कारण कच्‍चा न हो" (वचन 32)। दाऊद विशेष रूप से कह सकता था कि राजा को हियाव नहीं छोड़ना चाहिए था, परन्तु अपने सामान्य कथन में वह उस बात से बचता है, जिसे आरोप के रूप में लिया जा सकता है और शाऊल को किसी भी निंदा से मुक्त करता है। दाऊद ने जो कहा उस में कोई अड़चन नहीं थी। यदि हम दयालुता से बोलना सीखते हैं, तो पवित्र आत्मा दोष-सिद्ध करने के लिए स्वतंत्र है। यदि हम आक्रमण करते हैं, तो कबूतर जैसे पवित्र आत्मा काम नहीं करेगा।


दाऊद ने शक्तिशाली नेतृत्व दिखाया – उसने अपने जीवन के नमूने द्वारा अगुवाई की। "किसी मनुष्य का मन उसके कारण कच्‍चा न हो...तेरा दास जाकर उस पलिश्ती से लड़ेगा।" किसी को डरने की आवश्यकता नहीं है। मुझे कोई डर नहीं है। दाऊद ने उदाहरण देकर दिखाया कि हर किसी का व्यवहार कैसा होना चाहिए। अपने जीवन के नमूने द्वारा नेतृत्व करना अभी भी सबसे शक्तिशाली नेतृत्व शैली है।


यह न तो केवल युवा साहस था, पर न ही खतरे के बारे में मूर्खतापूर्ण कम आंकलन, जिसने दाऊद के उत्तेजक शब्दों को प्रेरित किया। सच्चे विश्‍वास की अंगूठी उसमें है, और वह हमें दिखाता है कि कैसे मन के कच्चे होने से बचा जाए। हम गिदोन की सूखी ऊन की तरह बनना चाहते हैं, जो चारों ओर भूमि को संतृप्त करने वाले अविश्‍वासपूर्ण भय की ठंडी नमी से अछूती है। जो परमेश्‍वर पर भरोसा करता है, उसे आग के खम्भा की तरह होना चाहिए, आतंक के अंधेरे में चमकना चाहिए, और ऐसा करने में, कमजोर मनों के लिए एक मिलने वाले पड़ाव को प्रदान करना चाहिए। जब घबराहट दूसरों को थाम लेती है, तो मसीही जन के पास साहस का कारण होता है। गोलियत पर विजय प्राप्त करने से पहले दाऊद ने कई शूरवीरों, अहंकार, आत्म-निर्भरता, भय और कायरता पर विजय प्राप्त की। उन शूरवीरों को जीतना शायद सबसे बड़ी लड़ाई रही होगी।


जबकि दाऊद विश्‍वास और साहस का सही चित्र है, शाऊल सांसारिक ज्ञान और सावधानी से की जाने वाली गणना को दर्शाता है। दाऊद को असमान संघर्ष से सावधान करने के शाऊल के प्रयास में कोमलता का स्पर्श है। उसने संभावनाओं की बात की, और इस तरह की सभी गणनाओं की तरह, उसके परिणाम बहुत ज्यादा सही हैं, केवल इतना कि उसने मैदान पर सभी शक्तियों को ध्यान में नहीं रखा था। परमेश्‍वर की सामर्थ्य और ज्ञान की कमी ने उसे गलत निष्कर्ष पर पहुँचाया। यह बिल्कुल सच है कि दाऊद केवल एक युवा था और गोलियत एक विशालकाय और अनुभवी है; परन्तु क्या इतना ही कहा जा सकता है? यदि ऐसा है, तो लड़का पलिश्ती शूरवीर से नहीं लड़ सकता। परन्तु यदि शाऊल ने परमेश्‍वर को छोड़ दिया है, तो इससे बहुत ज्यादा फर्क पड़ता है। वही गलती आज भी अक्सर की जाती है और युद्ध या तो हार दिया जाता है या जीत लिया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप यह कारक मिलता है: किसी के विश्‍वास में परमेश्‍वर की भागीदारी।


आज सुबह ही एक जवान चरवाहा भेड़ चरा कर आया था, फिर भी वह इस्राएल के सभी शूरवीरों से अधिक साहसी था। उसने उन्हें प्रोत्साहित भी किया। परमेश्‍वर इस्राएल को अच्छे वचन भेजता है और संसार के निर्बल और मूर्ख कामों से भी उनके लिए अच्छे काम करता है।


दाऊद केवल पलिश्ती से लड़ने के लिए शाऊल की अनुमति चाहता था। वह उस प्रतिफल के बारे में कुछ नहीं कहता, जो शाऊल ने प्रस्तावित किया था। दाऊद राजा के प्रतिफल के बजाय परमेश्‍वर और अपने देश की सेवा करने के सम्मान के लिए महत्वाकांक्षी था।


दाऊद, ने जैसे भाई के आरोप का विनम्रता से उत्तर दिया था, वैसे ही उसने शाऊल के डर का उत्तर दिया, और शाऊल की संतुष्टि के लिए, जीत की उसकी आशा का कारण दिया।


2. दाऊद का व्यवसाय इस काम के विपरीत था।

दाऊद ने अपने व्यवसाय के बारे में बात की और बताया कि उसने इसे कितनी अच्छी तरह से किया। शाऊल ने परमेश्‍वर के काम को ध्यान में नहीं रखा, और इसलिए दाऊद ने उसके साथ तर्क करते हुए, पहले अपने तर्कों को शाऊल के संदर्भ के साथ प्रस्तुत किया, न कि अपने मन के अनुसार। उसने अनुभव से तर्क दिया। हालाँकि वह एक युवा था और कभी युद्ध में नहीं गया था, फिर भी, उसने गोलियत को मारने के बराबर जो भी मुश्किल काम किया था, वह उसने एक शेर और एक भालू पर जय प्राप्त करने के बारे में बताया। एक शेर और एक भालू को मारने के बारे में बताना अच्छा है, परन्तु उन प्रमाणों को प्राप्त करने के लिए उसे अनुभव होना चाहिए था। वह उस दिन उस अनुभव को पैदा नहीं कर सका, जब उसे इसकी आवश्यकता थी; इसे पहले से तैयार किया जाना था। आप कल की योग्यता का विवरण आज लिख रहे हैं। आज आप जो कर रहे हैं, वह अपने अनुभवों की सूची का निर्माण करना है, ताकि आप भविष्य में इसका उपयोग कर सकें। अब आप अपनी योग्यता का विवरण तैयार करने के लिए क्या कर रहे हैं? आप क्या बनना चाहते हैं? अब आप इसके लिए स्वयं को योग्य बनाने के लिए क्या कर रहे हैं? इन दोनों प्रश्नों का एक-दूसरे से कुछ लेना-देना होना चाहिए।


दाऊद ने उस खतना न किए हुए पलिश्ती की तुलना एक जानवर से की। दाऊद ने शाऊल को यह समझने में सहायता की कि वह उतना अनुभवहीन नहीं है, जितना कि शाऊल ने पहले सोचा था। या तो शेर या भालू आसानी से मनुष्य को मार सकता है और खा सकता है। फिर भी दाऊद ने दोनों को मार डाला था।


एक साधारण व्यवसाय और एक असामान्य व्यक्ति के बीच के अंतर पर ध्यान दें। वह केवल एक चरवाहा है, परन्तु वह आत्मा से भरे हुए व्यक्ति की तरह अपनी कहानी बताता है। उसे यह कहने में शर्म नहीं आती कि वह अपने पिता की भेड़ों की रखवाली करता था, भले ही उसके सबसे बड़े भाई ने केवल एक चरवाहा होने के लिए उसकी आलोचना की थी। इस बात से इनकार करने के बजाय कि वह भेड़ों की रखवाला करता था, उसने बताया कि उसने यह कैसे किया। एक दीन चरवाहे के रूप में उसके काम की भरपाई से कहीं अधिक थी, क्योंकि वह एक साधारण चरवाहा नहीं था। एक चरवाहे के रूप में उसका काम बहुत सामान्य था, परन्तु अपने चरवाहे की जिम्मेदारियों के लिए उसका निपटारा करना बहुत असामान्य था। हमारी स्थिति कितनी भी प्रभावशाली क्यों न हो, अपनी जिम्मेदारियों का निपटारा प्रभावशाली होने दें। काम चाहे कितना भी छोटे क्यों न हो, उसे बहुत ऊँचा किया जाए। हालाँकि कार्य को अनदेखा करें, सेवा को बड़ी होने दें।


दाऊद एक भेड़ के बच्चे को संकट में नहीं देख सकता था, परन्तु उसे बचाने के लिए वह अपनी जान जोखिम में डालने के लिए तैयार था। इस मनोवृत्ति ने उसे एक ऐसा राजा बनने के योग्य बना दिया, जिसके लिए उसकी प्रजा का जीवन प्रिय था और जिसका लहू बहुमूल्य था। "वह उनके प्राणों को अन्धेर और उपद्रव से छुड़ा लेगा; और उनका लहू उसकी दृष्‍टि में अनमोल ठहरेगा" (भजन संहिता 72:14)।


जंगली जानवरों के साथ अपनी लड़ाई के बारे में दाऊद की उत्सुक कहानी शाऊल की आपत्ति का उत्तर देने के लिए है, (1) उसे यह दिखाकर कि, जैसा वह युवा था, उसने अपनी शक्ति प्रमाणित कर दी थी, और उसके बाद ही, (2) उसने शाऊल की गणना में कमी वाले तत्व को पूरा किया। इसलिए उसने बताया कि पहले उसने शेर को कैसे मारा, उसने अपनी कहानी को विश्‍वनीय बनाने के लिए पर्याप्त विवरण दिया, और फिर अपने विश्‍वास के लिए सही आधार बताया, "यहोवा जिसने मुझे सिंह और भालू दोनों के पंजे से बचाया है, वह मुझे उस पलिश्ती के हाथ से भी बचाएगा" (वचन 37)। विश्‍वास को अतीत से भविष्य के साथ बहस करने का अधिकार है - परमेश्‍वर जिसने पहले सहायता की थी, वही फिर से सहायता करेगा। जिसने दिया है, वह देता है और देगा। जो प्रार्थना का उत्तर देता है, वह उत्तर देता है और देगा। जिसने आपके अतीत की कठिनाइयों के माध्यम से आपको आगे बढ़ाया, वह आपको कठिनाइयों के माध्यम से आगे ले जाता है और आपको कठिनाइयों के माध्यम से ले जाएगा। जिसने आपको पहले सांत्वना दी है, वह करता है, और करेगा।


3. दाऊद चरवाहा और यीशु चरवाहा की तुलना की।

एक अच्छा चरवाहा होने के नाते, वह अच्छे चरवाहे यीशु के लिए एक प्रतीक बनने के लिए भी योग्य है, जो "वह चरवाहे के समान अपने झुण्ड को चराएगा, वह भेड़ों के बच्‍चों को अँकवार में लिए रहेगा और दूध पिलानेवालियों को धीरे–धीरे ले चलेगा" (यशायाह 40:11)। यीशु ने अपनी भेड़ों के लिए अपने प्राण दे दिए, परन्तु एक भेड़ या भेड़ के मेम्ने को बचाने के लिए अपने प्राण जोखिम में डालना बलिदान के बराबर है, क्योंकि यह दाऊद की इच्छा को इंगित करता है कि यदि इसकी आवश्यकता होती तो वह ऐसा करता।


"यहोवा जिसने मुझे सिंह और भालू दोनों के पंजे से बचाया है, वह मुझे उस पलिश्ती के हाथ से भी बचाएगा" (वचन 37)। दाऊद ने स्वीकार किया कि यह परमेश्‍वर ही था, जिसने उसे शेर और भालू से बचाया था। जब दाऊद अपने झुंड के लिए एक अच्छा चरवाहा रहा था, उसी समय परमेश्‍वर चरवाहा अपनी छोटी भेड़ के मेम्ने दाऊद की रक्षा कर रहा था। दाऊद ने उस उपलब्धि के लिए परमेश्‍वर की स्तुति की।


शेर और भालू केवल मेरे और मेरी भेड़ों के शत्रु थे और केवल अपने हितों की रक्षा के लिए मैंने उन पर आक्रमण किया, परन्तु गोलियत परमेश्‍वर और इस्राएल का शत्रु है। वह जीवित परमेश्‍वर की सेना की अवहेलना करता है और यह परमेश्‍वर के सम्मान के लिए है कि मैं उस पर आक्रमण करता हूँ। परमेश्‍वर का सम्मान एक बहुत बड़ा कारण है।

जो समुद्र की लहरों और जंगली जानवरों के क्रोध की सीमा निर्धारित करता है, वह दुष्ट लोगों के क्रोध को रोक सकता है और रोकेगा। पौलुस, जैसे ही अपने जीवन के अंत के निकट आता है, स्वयं को दाऊद और अच्छे चरवाहे यीशु की कहानियों में रखता हैः "परन्तु प्रभु मेरा सहायक रहा और मुझे सामर्थ्य दी, ताकि मेरे द्वारा पूरा पूरा प्रचार हो और सब अन्यजातीय सुन लें। मैं सिंह के मुँह से छुड़ाया गया। और प्रभु मुझे हर एक बुरे काम से छुड़ाएगा, और अपने स्वर्गीय राज्य में सुरक्षित पहुँचाएगा। उसी की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन" (2 तीमुथियुस 4:17, 18)।


खेल में, एक पेशेवर समूह के पास कुशल खिलाड़ियों की खोज करने वाले प्रतिभा-खोज-खिलाड़ी होते हैं, जिन्हें विकसित किया जा सकता है और राष्ट्रीय या पेशेवर प्रतिस्पर्धा में उपयोग किया जा सकता है। प्रतिभा-खोज-खिलाड़ी पेशेवर लोग होते हैं, जिन्हें सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को खोजने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। एक बार एक प्रतिभा-खोज-खिलाड़ी से पूछा गया था कि जब वह ऐसे खिलाड़ियों की खोज कर रहा था, जो प्रमुख प्रतिस्पर्धाओं में सफल हो सकते थे, तो वह क्या खोज रहा था। उसका उत्तर गहरा था। मैं किसी ऐसे व्यक्ति की खोज नहीं करता, जो एक पेशेवर खिलाड़ी या एक प्रमुख प्रतिस्पर्धा खिलाड़ी बनने के लिए विकसित हो सके। मैं उन खिलाड़ियों की खोज करता हूँ, जो पहले से ही मुख्य प्रतिस्पर्धा वाला खेल खेल रहा होता है, परन्तु अभी भी निम्न स्तर की प्रतिस्पर्धा खेल समूह में हैं। परमेश्‍वर उन पुरुष और स्त्रियों की खोज कर रहा होता है, जो पहले से ही एक विनम्र, परन्तु आत्म-विश्‍वास से भरे अगुवा की तरह सेवा कर रहा होता या होती है।


दाऊद ने अभी तक एक विशालकाय जानवर से लड़ाई नहीं की थी, परन्तु उसने जंगली जानवरों से लड़ाई की थी और उन पर जय प्राप्त की थी, जो एक विशालकाय जानवर के बराबर थे। वह पहले ही कुछ कर चुका था। आप एक मसीही अगुवे बनना चाहते हैं। आपने क्या प्राप्त किया है? मसीही नेतृत्व के लिए स्वयं को तैयार या योग्य बनाने के लिए आप क्या कर रहे हैं?


क्या आप ऐसी पुस्तकें पढ़ रहे हैं, जो आपको विकसित करने में सहायता करेंगी? क्या आपने अपने बच्चों की बाइबल कक्षा को पढ़ाया है? क्या आप किसी को यीशु के पास ले गए हैं? क्या आपने किसी ऐसे व्यक्ति के लिए प्रार्थना की है, जो बीमार था और परमेश्‍वर ने उन्हें चंगा कर दिया? क्या आप नियमित रूप से बाइबल पढ़ते हैं? क्या आप बाइबल का अध्ययन करते हैं? क्या आप बाइबल सिखा सकते हैं? क्या आप बाइबल से प्रचार कर सकते हैं? क्या आप एक धर्मी मसीही के रूप में अच्छी प्रतिष्ठा रखते हैं? जब आप विपरीत लिंग के किसी व्यक्ति के साथ होते हैं, तो क्या आप उसके साथ सही व्यवहार करते हैं? क्या आप नियमित रूप से प्रार्थना में समय बिताते हैं? क्या आप समस्याओं के माध्यम से अपने तरीके से प्रार्थना करते हैं या क्या आप अपनी समस्याओं को लोगों के पास ले जाते हैं और उन्हें आपके पास ले आने के लिए कहते हैं? क्या आप लोगों पर निर्भर हैं या आप परमेश्‍वर पर निर्भर हैं? क्या आप उपवास करते हैं और प्रार्थना करते हैं? क्या आप नियमित रूप से उपवास करते हैं? क्या आप अपने बचाव में अपनी आवाज उठाते हैं या आप परमेश्‍वर को अपनी रक्षा करने देते हैं? झगड़ा करते हो? क्या आप शिकायत करते हैं? क्या आप निरुत्साह को अपने ऊपर हावी होने देते हैं? क्या आप परमेश्‍वर की सेवा में विश्‍वासयोग्य हैं? क्या आप भरोसेमंद हैं, यदि आप कहते हैं कि आप कलीसिया में या परमेश्‍वर के लिए कुछ करेंगे? क्या आप अपनी बात रखते हैं? क्या आप परमेश्‍वर के लिए छोटे-छोटे काम करने के लिए तैयार हैं? क्या आपको सदैव पहचाने जाने की आवश्यकता है या क्या परमेश्‍वर की मान्यता आपके लिए पर्याप्त है? क्या आप लोगों के प्रति दयालु हैं? क्या आप कृपालु हैं? क्या आपके पास सेवकों वाला मन है? क्या आपको इस बारे में बात करने में आनन्द मिलता है कि परमेश्‍वर कितना भला है?


यदि आप एक अगुवा बनने या एक सर्वोत्तम अगुवा बनने के बारे में गंभीर हैं, तो स्वयं से पूछने के लिए ये कुछ प्रश्न दिए गए हैं और किस प्रकार के मुद्दों के बारे में प्रार्थना करनी है। यदि आप एक अगुवा बनना चाहते हैं, तो एक अच्छा अगुवा बनने का निर्णय लें।