परिणाम

अध्याय अड़तीस


1 शमूएल 25:36-44

Ron Meyers

39नाबाल के मरने का हाल सुनकर दाऊद ने कहा, “धन्य है यहोवा जिसने नाबाल के साथ मेरी नामधराई का मुक़द्दमा लड़कर अपने दास को बुराई से रोक रखा; और यहोवा ने नाबाल की बुराई को उसी के सिर पर लाद दिया है।” तब दाऊद ने लोगों को अबीगैल के पास इसलिये भेजा कि वे उससे उसकी पत्नी होने की बातचीत करें। 40जब दाऊद के सेवक कर्मेल को अबीगैल के पास पहुँचे, तब उससे कहने लगे, “दाऊद ने हमें तेरे पास इसलिये भेजा है, कि तू उसकी पत्नी बने।” 41तब वह उठी, और मुँह के बल भू्मि पर गिर दण्डवत् करके कहा, “तेरी दासी अपने प्रभु के सेवकों के चरण धोने के लिये दासी बने।” 42तब अबीगैल फुर्ती से उठी, और गदहे पर चढ़ी, और उसकी पाँच सहेलियाँ उसके पीछे पीछे हो लीं; और वह दाऊद के दूतों के पीछे पीछे गई, और उसकी पत्नी हो गई। 43दाऊद ने यिज्रेल नगर की अहिनोअम से भी विवाह कर लिया, और वे दोनों उसकी पत्नियाँ हुईं। 44परन्तु शाऊल ने अपनी बेटी, दाऊद की पत्नी, मीकल को लैश के पुत्र गल्‍लीमवासी पलती को दे दिया था।


अबीगैल की अच्छी सलाह मानने से दाऊद को अच्छे परिणाम मिले (बहुविवाह को छोड़कर)। किसी भी नीति, निर्णय या कार्य का मूल्य उसके परिणामों के मूल्याँकन पर आधारित होना चाहिए। इसका क्या परिणाम निकला? इसे लागू करने के बाद हमें किन स्थितियों का सामना करना पड़ा? क्या हमें परिणाम पसन्द आए? क्या यह परमेश्‍वर के कलीसिया के लिए अच्छा है? क्या इससे परमेश्‍वर की महिमा होती है? अबीगैल से दाऊद के विवाह के दीर्घकालिक परिणाम क्या थे?


पिछले पाठ में हमने सीखा था कि अबीगैल के हस्तक्षेप का एक परिणाम यह निकला कि दाऊद की प्रतिष्ठा पर कोई दाग नहीं लगा। उसने स्वयं को बदला लेने से रोक लिया। अब आइए, उस अच्छे कार्य के कुछ और परिणामों को देखें, जो अबीगैल ने दाऊद को नाबाल से स्वयं बदला लेने से रोककर किया था।


1. नाबाल को परमेश्‍वर के न्याय का सामना करना पड़ा। वचन 36-38

परमेश्‍वर ने नाबाल का न्याय किया—दाऊद को ऐसा करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। प्रेरित यहूदा कुछ ऐसे लोगों के बारे में बात करते हैं, जो "दो बार मरे हुए" थे—अर्थात् निष्फल और मृत। यहूदा के वचन 12 और 13 कहते हैं, "ये तुम्हारी प्रेम सभाओं में तुम्हारे साथ खाते–पीते, समुद्र में छिपी हुई चट्टान सरीखे हैं, और बेधड़क अपना ही पेट भरनेवाले रखवाले हैं; वे निर्जल बादल हैं, जिन्हें हवा उड़ा ले जाती है; पतझड़ के निष्फल पेड़ हैं, जो दो बार मर चुके हैं, और जड़ से उखड़ गए हैं;  ये समुद्र के प्रचण्ड हिलकोरे हैं, जो अपनी लज्जा का फेन उछालते हैं; ये डाँवाडोल तारे हैं, जिनके लिये सदा काल तक घोर अन्धकार रखा गया है।" नाबाल के लिए यह एक सटीक वर्णन होगा, क्योंकि उसके जीवन में कोई भी अच्छा परिणाम नहीं था; वह निष्फल और मृत था। हालाँकि, यह वर्णन उसे पूरी तरह से समझाने के लिए अपर्याप्त है। क्योंकि हम यहाँ देखते हैं कि नाबाल तीन बार मरा हुआ था; यद्यपि वह दाऊद की तलवार से अद्भुत रूप से बच गया और एक भयानक मृत्यु से बच गया था, फिर भी दुष्ट नाबाल का जीवन केवल एक और भी बुरी मृत्यु के लिए सुरक्षित रखा गया था—अर्थात् परमेश्‍वर के क्रोध के प्रहार के लिए। वह (1) अपने घर में नशे में धुत पड़ा था। अबीगैल घर लौटी, और शायद उसके आस-पास इतने अधिक लोग और इतनी अधिक समृद्धि थी कि उसे न तो अबीगैल की कमी खली और न ही उन सामग्रियों की, जो वह दाऊद के लिए ले गई थी। किसी भी स्थिति में, अबीगैल ने उसे उसकी मूर्खतापूर्ण जेवनार के बीच पाया; उसे जरा भी अनुमान नहीं था कि वह उस बड़े और अत्यंत सम्मानित दाऊद के कितना निकट था, जिसे उसने अपनी मूर्खता के कारण अपना शत्रु बना लिया था। वह अपने मेहमानों के मनोरंजन पर कितना ज्यादा खर्च कर रहा था: उसने राजाओं जैसी जेवनार दिए हुए था—इतनी वैभवशाली और भरपूर—भले ही उसके मेहमान केवल उसकी भेड़ों की ऊन काटने वाले लोग थे। वह भूल गया था कि परमेश्‍वर हमें धन और समृद्धि इसलिए देता है, ताकि हम दूसरों का भला कर सकें; न कि केवल अच्छा दिखने के लिए। वह दाऊद और उसके साथियों की भलाई के लिए कुछ भी खर्च नहीं करता था, परन्तु राजाओं जैसी जेवनार देने के लिए सदैव तैयार रहता था। वह अपने सोने-चाँदी पर तो बहुत ज्यादा घमण्ड करता था, परन्तु उसका सही उपयोग कभी नहीं करता था। परमेश्‍वर के साथ शांति से रहने के बजाय, उसे अपनी शारीरिक सुख-सुविधाएँ से ज्यादा प्रेम था। वह नशे में पूरी तरह से धुत था: अबीगैल ने अपनी बहुमूल्य बातें अर्थात् मोती ऐसे व्यक्ति के सामने स्पष्ट नहीं कीं; बल्कि उसने अगले दिन का प्रतीक्षा की, जब नाबाल का नशा उतर चुका था। समय और पैसा—दोनों ही ऐसे संसाधन हैं, जिन्हें हम अपनी इच्छा से कहीं भी लगा सकते हैं; परन्तु नाबाल ने इन संसाधनों का सही और सर्वोत्तम उपयोग नहीं किया, जो उसकी मूर्खता थी।


अगली सुबह जब नाबाल ने यह समाचार सुना, तो वह (2) सदमे और उदासी के कारण फिर से 'मर-सा' गया; इस समाचार ने सचमुच उसका मन तोड़ दिया—"तब उसके मन का हियाव जाता रहा और वह पत्थर–सा सुन्न हो गया।" हमें ठीक-ठीक नहीं पता कि ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि उसे इस बात से शर्मिंदगी महसूस हुई होगी कि अबीगैल ने उसके प्राण बचाए थे और उसे अपने अत्याधिक स्वार्थी होने पर लज्जा आ रही थी; या फिर उसे इस बात का दु:ख था कि अबीगैल ने दाऊद को मांस, दाखमधु और किशमिश जैसी चीजें क्यों दे दीं। हो सकता है कि ये दोनों ही कारण रहे हों! उसकी निराशा और हताशा का कारण चाहे जो भी रहा हो, परन्तु एक बात तो तय है कि अबीगैल अपनी समझदारी भरी बातों से नाबाल को कभी भी पश्‍चाताप की ओर नहीं ले जा पाई; मगर अब, अपनी खरी और सच्ची फटकार के द्वारा, उसने नाबाल को घोर निराशा के गर्त में धकेल दिया—ऐसा लगता है कि उसे दिल का दौरा पड़ा, जिसके कारण अंततः उसकी मृत्यु हो गई।


दस दिन बाद, आखिरकार नाबाल (3) सचमुच इस संसार से चला गया: "और दस दिन के पश्‍चात यहोवा ने नाबाल को ऐसा मारा कि वह मर गया।" जो लोग परमेश्‍वर की कृपा के बिना जीते हैं, उन्हें शायद बिना किसी सांत्वना या शांति के ही मृत्यु प्राप्त होती है; और जब तक हम अपने पापों में डूबे रहेंगे, तब तक हम भी किसी सर्वोत्तम परिणाम की आशा नहीं कर सकते। नाबाल की मृत्यु पर किसी ने भी शोक नहीं मनाया। जब दाऊद को इसके बारे में पता चला, तो उसने परमेश्‍वर का धन्यवाद किया। जब दाऊद ने सुना कि नाबाल मर चुका है, तो उसने कहा, "परमेश्‍वर की स्तुति हो!" दाऊद के ऐसा कहने के पीछे कई कारण थे। (1) यह कि परमेश्‍वर ने दाऊद को नाबाल की हत्या करने से रोक लिया था। उसे इस बात की हर्ष थी कि नाबाल की मृत्यु स्वाभाविक रूप से हुई, न कि उसके अर्थात् दाऊद के हाथों। हमें हर उस अवसर पर परमेश्‍वर की भलाई का वर्णन करना चाहिए और उसकी महिमा गानी चाहिए, जब वह हमें पाप करने से बचाता है। (2) कि परमेश्‍वर ने न्याय का विषय अपने हाथों में ले लिया था, और दाऊद के सम्मान को बहाल किया था; और नाबाल को, जिसने दाऊद के साथ दुर्व्यवहार किया था, बिना दण्ड पाए जाने नहीं दिया। अब हर कोई जान सकता था—और जान भी जाएगा—कि दाऊद वह व्यक्ति था, जिसके लिए परमेश्‍वर स्वयं लड़ता था। (3) कि इस प्रकार परमेश्‍वर ने दाऊद और अन्य सभी लोगों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया कि जब भी उन्हें कोई चोट पहुँचे, तो वे अपने विषयों को परमेश्‍वर के हाथों में सौंप दें; और उन्हें यह आश्‍वासन दिया कि यदि वे शांत रहें और विषय को परमेश्‍वर पर छोड़ दें, तो वह अपने सही समय पर उनके साथ हुए अन्याय का बदला अवश्य लेगा।


2. दाऊद की प्रतिक्रिया—विवाह का प्रस्ताव

वचन 39-41 कहते हैं, “नाबाल के मरने का हाल सुनकर दाऊद ने कहा, “धन्य है यहोवा जिसने नाबाल के साथ मेरी नामधराई का मुक़द्दमा लड़कर अपने दास को बुराई से रोक रखा; और यहोवा ने नाबाल की बुराई को उसी के सिर पर लाद दिया है।” तब दाऊद ने लोगों को अबीगैल के पास इसलिये भेजा कि वे उससे उसकी पत्नी होने की बातचीत करें। जब दाऊद के सेवक कर्मेल को अबीगैल के पास पहुँचे, तब उससे कहने लगे, “दाऊद ने हमें तेरे पास इसलिये भेजा है, कि तू उसकी पत्नी बने।” तब वह उठी, और मुँह के बल भू्मि पर गिर दण्डवत् करके कहा, “तेरी दासी अपने प्रभु के सेवकों के चरण धोने के लिये दासी बने।” यह कहानी बहुत तेजी से आशा, अपमान, निराशा, सोचे-समझे हुए बदले, परमेश्‍वर के हस्तक्षेप और विवाह के उत्सव जैसे अलग-अलग पड़ावों से गुजरती है। अब, दाऊद ने अपना बदला लेने की कोशिश से बच जाने का उत्सव मनाया, और एक बुद्धिमान तथा सुंदर स्त्री को विवाह का प्रस्ताव दिया। दाऊद स्पष्ट तौर पर अबीगैल की सुंदरता और उसके आचरण की समझदारी से इतना प्रभावित था कि, जैसे ही उसे पता चला कि वह विधवा हो गई है और उसे अवसर मिला, उसने अबीगैल को अपनी पत्नी बनाने की अपनी इच्छा से अवगत कराया; उसे इस बात पर थोड़ा सा भी सन्देह नहीं था कि जो स्त्री इतने बुरे पति के लिए इतनी अच्छी पत्नी प्रमाणित हुई थी, वह उसके लिए भी एक अच्छी पत्नी बनेगी। इसके अतिरिक्त, निश्‍चित रूप से उसने दाऊद के प्रति अबीगैल के सम्मान और इस विश्‍वास पर भी ध्यान दिया होगा कि दाऊद भविष्य में राजा बनेगा। और अबीगैल ने दाऊद से यह भी कहा था कि वह उसे स्मरण रखे। उसने अत्यंत शालीनता और विनम्रता के साथ इस प्रस्ताव को स्वीकार किया; संभवतः वह स्वयं को इस सम्मान के योग्य नहीं मान रही थी, फिर भी उसके मन में दाऊद के प्रति इतना अधिक सम्मान था कि वह आनन्द के साथ उसके परिवार की सबसे साधारण सेविका बनकर रहने और यहाँ तक कि अन्य सेवकों के पैर धोने के लिए भी तैयार थी। जो लोग स्वयं को विनम्र बना लेते हैं, उनसे अधिक किसी अन्य व्यक्ति को प्राथमिकता देने के लिए कोई भी अधिक उपयुक्त नहीं होता। उसने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, दाऊद के दूतों के साथ चली गई और उसकी पत्नी बन गई।


उसने दाऊद की वर्तमान कठिनाइयों को लेकर उसकी आलोचना नहीं की, न ही उससे यह पूछा कि वह उसका भरण-पोषण कैसे करेगा; बल्कि उसने दाऊद के महत्व को समझा। वह जानती थी कि दाऊद एक अच्छा व्यक्ति है और उसे पूरा विश्‍वास था कि उचित समय आने पर वह एक बहुत बड़ा व्यक्ति बनेगा। उसने विश्‍वास के साथ दाऊद से विवाह किया; भले ही उस समय दाऊद के पास रहने के लिए अपना कोई घर नहीं था, फिर भी उसे पूरा भरोसा था कि परमेश्‍वर ने दाऊद से जो प्रतिज्ञा की है, वह निश्‍चित रूप से पूरी होगी। आज भी जो लोग स्वयं को मसीह से जोड़ते हैं, उन्हें अभी उसके साथ दु:ख उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए, यह विश्‍वास करते हुए कि बाद में वे उसके साथ राज करेंगे।

3. तीन विवाह: दाऊद और अबीगैल, दाऊद और अहीनोअम, मीकल (दाऊद की पत्नी जिसे पलतीएल को दे दिया गया था)। वचन 41-44

इन विवाहों पर विचार करने पर हम कई महत्वपूर्ण सबक सीख सकते हैं।

दाऊद और अबीगैल की विवाह के अवसर पर, हमें दाऊद की पत्नियों के बारे में आरम्भ जानकारी मिलती है। अभी और भी पत्नियाँ आने वाली थीं; इस कहानी में दाऊद अभी भी जवान था। सही क्रम में, दाऊद की पहली पत्नी शाऊल की पुत्री थी, जिसे दाऊद के गोलियत को मारने के तुरन्त बाद उससे प्रेम हो गया था। मीकल की कहानी में हमें परमेश्‍वर के प्रति किसी भी भक्ति का कोई संकेत नहीं मिलता। हो सकता है कि वह आत्मिक रूप से खोखली और महत्वाकांक्षी स्त्री रही हो, हालाँकि उसने कुछ समय तक दाऊद का बचाव किया था। उसके बारे में शेष संदर्भ उसे अच्छे रूप में नहीं दिखाते। दाऊद और अबीगैल के विवाह की इस कहानी से बहुत पहले ही दाऊद मीकल को खो चुका था। मीकल, शाऊल की पुत्री, उसकी पहली और उसकी जवानी की पत्नी थी—जिसके प्रति वह विश्‍वासयोग्य रहता, यदि वह भी उसके प्रति विश्‍वासयोग्य रहती या रह पाती—परन्तु उसके पिता शाऊल ने उसे किसी और को दे दिया था, जैसा कि वचन 44 में कहा गया है: “परन्तु शाऊल ने अपनी बेटी, दाऊद की पत्नी, मीकल को लैश के पुत्र गल्‍लीमवासी पलती को दे दिया था।” शायद शाऊल दाऊद को दामाद के रूप में अस्वीकार करना चाहता था, और यह सार्वजनिक रूप से उसका जान-बूझकर अपमान करने का एक तरीका था। शायद शाऊल द्वारा दाऊद की एकमात्र वैध पत्नी को छीन लेने से विवाह की पवित्रता कम हो गई, ताकि जब दाऊद अपनी पहली पत्नी को अपने पास नहीं रख सका, तो उसे लगे कि यदि वह अपनी दूसरी पत्नी को भी अपने पास नहीं रखता है, तो उसे इसका बहाना मिल जाएगा। हालाँकि, विवाह की प्रतिबद्धता को हल्के में लेने की शाऊल की गलती, दाऊद के लिए अहीनोअम के साथ अपने विवाह के विषय में वैसा ही करने का निश्‍चित रूप से एक बहुत ही कमजोर आधार था।


दाऊद ने अहीनोअम (वचन 43) से भी विवाह किया था, बहुत संभव है कि अबीगैल से पहले, क्योंकि इस वर्णन के दो अध्याय बाद, 1 शमूएल 27:3 में उसका नाम सबसे पहले आता है। “और दाऊद और उसके जन अपने अपने परिवार समेत गत में आकीश के पास रहने लगे। दाऊद अपनी दो स्त्रियों के साथ, अर्थात् यिज्रेली अहीनोअम, और नाबाल की स्त्री कर्मेली अबीगैल के साथ रहा।” हो सकता है कि दाऊद उस समय की बहुविवाह संबंधी भ्रष्ट प्रथा से प्रभावित हुआ हो; परन्तु आरम्भ से ऐसा नहीं था। “उसने उत्तर दिया, “क्या तुम ने नहीं पढ़ा कि जिसने उन्हें बनाया, उसने आरम्भ से नर और नारी बनाकर कहा, ‘इस कारण मनुष्य अपने माता–पिता से अलग होकर अपनी पत्नी के साथ रहेगा और वे दोनों एक तन होंगे?’ अत: वे अब दो नहीं, परन्तु एक तन हैं। इसलिये जिसे परमेश्‍वर ने जोड़ा है, उसे मनुष्य अलग न करे’” (मत्ती 19:4-6)। वैवाहिक एकता का विचार मूसा की व्यवस्था में शामिल था, जिस पर दाऊद ने भजन संहिता में कई बार प्रेम करने का दावा किया था।

4. वैवाहिक सुख का मूल्याँकन करते समय दो बातें। 

दाऊद और अबीगैल का विवाह दाऊद के जीवन के एक मुश्किल दौर का सुखद अंत लग सकता है, परन्तु नाबाल की मृत्यु के इस परिणाम में कई और बातें भी हैं, जिन पर विचार करना आवश्यक है। अबीगैल के बारे में, दाऊद के प्रस्ताव और अबीगैल की स्वीकृति में, इस बात का कोई वर्णन नहीं मिलता है कि दाऊद को अबीगैल से या अबीगैल को दाऊद से कोई प्रेम था। इसके विपरीत, इसहाक को रिबका के साथ जीवन का आनन्द लेने से सांत्वना मिली थी और बाइबल में इसका वर्णन है। याकूब और राहेल के आपसी प्रेम का भी पवित्रशास्त्र में वर्णन है। मीकल के दाऊद के प्रति प्रेम का भी वर्णन है। यदि दाऊद और अबीगैल के बीच प्रेम संबंध था, तो उसका वर्णन क्यों नहीं है? उनका एक पुत्र था, जिसका वर्णन मिलता है। 1 इतिहास 3:1 “[दाऊद के पुत्र] जो हेब्रोन में उससे उत्पन्न हुए वे ये हैं : जेठा अम्नोन जो यिज्रेली अहीनोअम से, दूसरा दानिय्येल जो कर्मेली अबीगैल से उत्पन्न हुआ।” और दाऊद ने और भी विवाह किए। क्या यह संभव है कि उनके बीच केवल आपसी सम्मान का रिश्ता था, परन्तु कोई लगाव या गहरा प्रेम नहीं था? बाइबल इस बारे में कुछ नहीं कहती, परन्तु आज हम बाइबल की कई शिक्षाओं से यह अवश्य सीख सकते हैं कि विवाह केवल साथ रहने का एक समझौता नहीं, बल्कि उससे कहीं ज्यादा है। यह इस बात पर विचार करने का एक अच्छा अवसर है कि बाइबल विवाह के आनन्द और उसकी गरिमा के बारे में क्या कहती है। मैं यहाँ केवल दो बातों पर बात करूँगा: अंतरंगता संबंधी शारीरिक आनन्द, और एक समझदार पत्नी के बुद्धिमान और जिम्मेदार व्यवहार से जुड़ी व्यावहारिक बातें, जिसे एक समझदार पति पूरी तरह से आदर करता है।


विवाह में अंतरंगता का शारीरिक सुख उन आशीषों में से एक है, जिनका आनन्द विवाहित जोड़ों को लेना चाहिए—यही परमेश्‍वर की इच्छा है। आप इसे और कैसे समझा सकते हैं कि बाइबल में ऐसी बातों का वर्णन मिलता है? नीतिवचन 5:19: “प्रिय हरिणी या सुन्दर सांभरनी के समान उसके स्तन सर्वदा तुझे सन्तुष्‍ट रखें, और उसी का प्रेम नित्य तुझे आकर्षित करता रहे।” सुलेमान का श्रेष्ठगीत 1:13 “मेरा प्रेमी मेरे लिये लोबान की थैली के समान है, जो मेरी छातियों के बीच में पड़ी रहती है।” सुलेमान का श्रेष्ठगीत 4:5 “तेरी दोनों छातियाँ मृग के दो जुड़वे बच्‍चों के तुल्य हैं, जो सोसन फूलों के बीच में चरते हों।” सुलैमान का श्रेष्ठगीत 7:7, 8 “तेरा डील–डौल खजूर के समान शानदार है और तेरी छातियाँ अंगूर के गुच्छों के समान हैं। मैं ने कहा, “मैं इस खजूर पर चढ़कर उसकी डालियों को पकड़ूँगा।” तेरी छातियाँ अँगूर के गुच्छे हों, और तेरी श्‍वास का सुगन्ध सेबों के समान हो।” सुलैमान का श्रेष्ठगीत 4:11 “हे मेरी दुल्हिन, तेरे होठों से मधु टपकता है; तेरी जीभ के नीचे मधु और दूध रहता है; तेरे वस्त्रों का सुगन्ध लबानोन का सा है।” यदि परमेश्‍वर की यह मंशा न होती कि विवाहशुदा जोड़े विवाह में शारीरिक अंतरंगता का आनन्द लें, तो ये वचन बाइबल में कभी न होते।

दूसरी ओर, नीतिवचन 31:10-31 हमें एक नेक चरित्र वाली पत्नी का सर्वोत्तम वर्णन देता है। “भली पत्नी कौन पा सकता है? क्योंकि उसका मूल्य मूँगों से भी बहुत अधिक है। उसके पति के मन में उसके प्रति विश्‍वास है, और उसे लाभ की घटी नहीं होती। वह अपने जीवन के सारे दिनों में

उस से बुरा नहीं, वरन् भला ही व्यवहार करती है। वह ऊन और सन ढूँढ़ ढूँढ़कर, अपने हाथों से प्रसन्नता के साथ काम करती है। वह व्यापार के जहाजों के समान, अपनी भोजन-वस्तुएँ दूर से मँगवाती है। वह रात ही को उठ बैठती है, और अपने घराने को भोजन खिलाती है, और अपनी दासियों को अलग अलग काम देती है। वह किसी खेत के विषय में सोच विचार करती है और उसे मोल ले लेती है; और अपने परिश्रम के फल से दाख की बारी लगाती है। वह अपनी कटि को बल के फेंटे से कसती है, और अपनी बाँहों को दृढ़ बनाती है। वह परख लेती है कि मेरा व्यापार लाभदायक है।

रात को उसका दिया नहीं बुझता। वह अटेरन में हाथ लगाती है, और चरखा पकड़ती है। वह दीन के लिये मुट्ठी खोलती है, और दरिद्र को संभालने के लिए हाथ बढ़ाती है। वह अपने घराने के लिये हिम से नहीं डरती, क्योंकि उसके घर के सब लोग लाल कपड़े पहिनते हैं। वह तकिये बना लेती है;

उसके वस्त्र सूक्ष्म सन और बैंजनी रंग के होते हैं। जब उसका पति सभा में देश के पुरनियों के संग बैठता है, तब उसका सम्मान होता है। वह सन के वस्त्र बनाकर बेचती है; और व्यापारी को कमरबन्द देती है। वह बल और प्रताप का पहिरावा पहिने रहती है, और आनेवाले काल पर हँसती है। वह बुद्धि की बात बोलती है, और उसके वचन कृपा की शिक्षा के अनुसार होते हैं। वह अपने घराने के चालचलन को ध्यान से देखती है, और अपनी रोटी बिना परिश्रम नहीं खाती। उसके पुत्र उठ उठकर उसको धन्य कहते हैं; उसका पति भी उठकर उसकी ऐसी प्रशंसा करता है : “बहुत सी स्त्रियों ने अच्छे अच्छे काम तो किए हैं परन्तु तू उन सभों में श्रेष्‍ठ है।” शोभा तो झूठी और सुन्दरता व्यर्थ है, परन्तु जो स्त्री यहोवा का भय मानती है, उसकी प्रशंसा की जाएगी। उसके हाथों के परिश्रम का फल उसे दो, और उसके कार्यों से सभा में उसकी प्रशंसा होगी।”

विवाहित जोड़ों को विवाह में मिलने वाला शारीरिक आनन्द—जिसका वर्णन नीतिवचन और सुलेमान के गीत में मिलता है—और दूसरी ओर, नीतिवचन 31 में बताए गए प्रतिदिन के कामों के बीच किसी एक को चुनने की आवश्यकता नहीं है। हम पास दोनों तरह की हो सकती हैं, और हमें दोनों की आवश्यकता भी है। यदि हम विवाह में दोनों तरह की आनन्द का अनुभव करते हैं, तो हमें विवाह के बाहर उन आनन्द को खोजने का लालच कम होगा। जो मसीही अगुवा अपनी विवाहित जीवन में प्रसन्न रहता है, वह दूसरों के लिए एक अच्छा उदाहरण पेश करता है। उसका मजबूत विवाह, एक सफल और प्रभाव डालने वाली मसीही अगुवाई के लिए बहुत बड़ा सहारा होता है। यदि हम अपनी विवाह संबंधी व्यक्तिगत् जीवन में सफल होते हैं, तो यह हमारी सार्वजनिक सेवा में लंबे समय तक हर्ष और सफलता पाने में बहुत बड़ा योगदान देता है।