बहाली और उससे भी अधिक

अध्याय उनचास


1 शमूएल 30:16-20, 26-31

Ron Meyers

16जब उसने उसे पहुँचाया, तब देखने में आया कि वे सब भू्मि पर छिटके हुए खाते पीते, और उस बड़ी लूट के कारण, जो वे पलिश्तियों के देश और यहूदा देश से लाए थे, नाच रहे हैं। 17इसलिये दाऊद उन्हें रात के पहले पहर से लेकर दूसरे दिन की साँझ तक मारता रहा; यहाँ तक कि चार सौ जवानों को छोड़, जो ऊँटों पर चढ़कर भाग गए, उनमें से एक भी मनुष्य न बचा। 18और जो कुछ अमालेकी ले गए थे वह सब दाऊद ने छुड़ाया; और दाऊद ने अपनी दोनों स्त्रियों को भी छुड़ा लिया। 19वरन् उनके क्या छोटे, क्या बड़े, क्या बेटे, क्या बेटियाँ, क्या लूट का माल, सब कुछ जो अमालेकी ले गए थे, उस में से कोई वस्तु न रही जो उनको न मिली हो; क्योंकि दाऊद सब का सब लौटा लाया। 20दाऊद ने सब भेड़–बकरियाँ, और गाय–बैल भी लूट लिए; और इन्हें लोग यह कहते हुए अपने जानवरों के आगे हाँकते गए, कि यह दाऊद की लूट है।......26सिकलग में पहुँचकर दाऊद ने यहूदी पुरनियों के पास जो उसके मित्र थे लूट के माल में से कुछ कुछ भेजा, और यह संदेश भेजा, “यहोवा के शत्रुओं से ली हुई लूट में से तुम्हारे लिये यह भेंट है।” 27अर्थात् बेतेल, दक्षिण देश के रामोत, यत्तीर, 28अरोएर, सिपमोत, एश्तमो, 29राकाल, यरहमेलियों के नगरों, केनियों के नगरों, 30होर्मा, कोराशान, अताक, 31हेब्रोन आदि जितने स्थानों में दाऊद अपने जनों समेत फिरा करता था, उन सब के पुरनियों के पास उसने कुछ कुछ भेजा।


परमेश्‍वर पुनर्स्थापित अर्थात् बहाली करने वाला है। वह लोगों को बहाल होने में सहायता करता है। वह हमारी आत्माओं को बहाल करता है। योएल पुनर्स्थापना के बारे में बात करता है। अय्यूब पुनर्स्थापना को दर्शाता है। दाऊद और उसकी छोटी सेना की यह कहानी अपने कब्जे में लिए गए परिवारों और चोरी की गई संपत्ति को वापस पाने और खोए हुए धन से भी अधिक प्राप्त करने की है, जो इस बात का अत्याधिक प्रतीक है कि परमेश्‍वर आत्मिक या भौतिक रूप से खोए हुए धन को कैसे बहाल कर सकता है।


1. योएल 1:2-12 विनाश का वर्णन करता है और 2:18-27 बहाली का वर्णन करता है।

पुनर्स्थापना बाइबल के बड़े विषयों में से एक है। परमेश्‍वर पुनर्स्थापित करता है। हम नुकसान झेल रहे होते हैं और हमें बहाली की आवश्यकता होती है। योएल की कविता, एक कृषि समाज को संबोधित, विनाश और बहाली के बारे में बताती है। इसकी सच्चाई बहुत हद तक दाऊद और उसके लोगों के साथ हुई घटना से मिलती-जुलती है। यहाँ योएल 1:2-12 है, जो विनाश का वर्णन करता हैः 2हे पुरनियो, सुनो, हे देश के सब रहनेवालो, कान लगाकर सुनो! क्या ऐसी बात तुम्हारे दिनों में या तुम्हारे पुरखाओं के दिनों में कभी हुई है? 3अपने बच्‍चों से इसका वर्णन करो और वे अपने बच्‍चों से, और फिर उनके बच्‍चे आनेवाली पीढ़ी के लोगों से।

4जो कुछ गाजाम नामक टिड्डी से बचा, उसे अर्बे नामक टिड्डी ने खा लिया। जो कुछ अर्बे नामक टिड्डी से बचा, उसे येलेक नामक टिड्डी ने खा लिया, और जो कुछ येलेक नामक टिड्डी से बचा, उसे हासील नामक टिड्डी ने खा लिया है। 5हे मतवालो, जाग उठो, और रोओ; और हे सब दाखमधु पीनेवालो, नये दाखमधु के लिये हाय, हाय, करो; क्योंकि वह तुम को अब न मिलेगा।

6देखो, मेरे देश पर एक जाति ने चढ़ाई की है, वह सामर्थी है, और उसके लोग अनगिनित हैं; उसके दाँत सिंह के से, और डाढ़ें सिंहनी की सी हैं। 7उसने मेरी दाखलता को उजाड़ दिया, और मेरे अंजीर के वृक्ष को तोड़ डाला है; उस ने उसकी सब छाल छीलकर उसे गिरा दिया है, और उसकी डालियाँ छिलने से सफेद हो गई हैं।

8जैसे युवती अपने पति के लिये कटि में टाट बाँधे हुए विलाप करती है, वैसे ही तुम भी विलाप करो। 9यहोवा के भवन में न तो अन्नबलि और न अर्घ आता है। उसके टहलुए जो याजक हैं, वे विलाप कर रहे हैं। 10खेती मारी गई, भूमि विलाप करती है; क्योंकि अन्न नष्‍ट हो गया, नया दाखमधु सूख गया, तेल भी सूख गया है।

11हे किसानो, लज्जित हो, हे दाख की बारी के मालियो, गेहूँ और जौ के लिये हाय–हाय करो; क्योंकि खेती मारी गई है। 12दाखलता सूख गई, और अंजीर का वृक्ष कुम्हला गया है। अनार, ताड़, सेब, वरन् मैदान के सब वृक्ष सूख गए हैं; और मनुष्यों का हर्ष जाता रहा है।


और यहाँ योएल 2:18-27 में वर्णित बहाली हैः  18तब यहोवा को अपने देश के विषय में जलन हुई, और उस ने अपनी प्रजा पर तरस खाया। 19यहोवा ने अपनी प्रजा के लोगों को उत्तर दिया, “सुनो, मैं अन्न और नया दाखमधु और ताजा तेल तुम्हें देने पर हूँ, और तुम उन्हें पाकर तृप्‍त होगे; और मैं भविष्य में अन्य जातियों द्वारा तुम्हारी नामधराई न होने दूँगा। 20”मैं उत्तर की ओर से आई हुई सेना को तुम्हारे पास से दूर करूँगा, और उसे एक निर्जल और उजाड़ देश में निकाल दूँगा; उसका अगला भाग तो पूरब के ताल की ओर और उसका पिछला भाग पश्‍चिम के समुद्र की ओर होगा; उस से दुर्गन्ध उठेगी, और उसकी सड़ी गन्ध फैलेगी, क्योंकि उसने बहुत बुरे काम किए हैं। 21”हे देश, तू मत डर; तू मगन हो और आनन्द कर, क्योंकि यहोवा ने बड़े बड़े काम किए हैं! 22हे मैदान के पशुओ, मत डरो, क्योंकि जंगल में चराई उगेगी, और वृक्ष फलने लगेंगे; अंजीर का वृक्ष और दाखलता अपना अपना बल दिखाने लगेंगी। 23”हे सिय्योन के लोगो, तुम अपने परमेश्‍वर यहोवा के कारण मगन हो, और आनन्द करो; क्योंकि तुम्हारे लिये वह वर्षा, अर्थात् बरसात की पहली वर्षा बहुतायत से देगा; और पहले के समान अगली और पिछली वर्षा को भी बरसाएगा।

24”तब खलिहान अन्न से भर जाएँगे, और रसकुण्ड नये दाखमधु और ताजे तेल से उमड़ेंगे। 25जिन वर्षों की उपज अर्बे नामक टिड्डियों, और येलेक, और हासील ने, और गाजाम नामक टिड्डियों ने, अर्थात् मेरे बड़े दल ने जिसको मैं ने तुम्हारे बीच भेजा, खा ली थी, मैं उसकी हानि तुम को भर दूँगा। 26”तुम पेट भरकर खाओगे, और तृप्‍त होगे, और अपने परमेश्‍वर यहोवा के नाम की स्तुति करोगे, जिस ने तुम्हारे लिये आश्‍चर्य के काम किए हैं। मेरी प्रजा की आशा फिर कभी न टूटेगी। 27तब तुम जानोगे कि मैं इस्राएल के बीच में हूँ, और मैं, यहोवा, तुम्हारा परमेश्‍वर हूँ और कोई दूसरा नहीं है। मेरी प्रजा की आशा फिर कभी न टूटेगी।

2. अय्यूब के अनुभव की कहानी में विनाश और फिर बहाली शामिल हैः

यहाँ अय्यूब 1:13-19 है, जो विनाश का वर्णन करता हैः  13एक दिन अय्यूब के बेटे–बेटियाँ बड़े भाई के घर में खा रहे और दाखमधु पी रहे थे; 14तब एक दूत अय्यूब के पास आकर कहने लगा, “हम तो बैलों से हल जोत रहे थे, और गदहियाँ उनके पास चर रही थीं 15कि शबा के लोग धावा करके उनको ले गए, और तलवार से तेरे सेवकों को मार डाला; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।” 16वह अभी यह कह ही रहा था कि दूसरा भी आकर कहने लगा, “परमेश्‍वर की आग आकाश से गिरी और उस से भेड़–बकरियाँ और सेवक जलकर भस्म हो गए; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।” 17वह अभी यह कह ही रहा था, कि एक और भी आकर कहने लगा, “कसदी लोग तीन दल बाँधकर ऊँटों पर धावा करके उन्हें ले गए, और तलवार से तेरे सेवकों को मार डाला; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।” 18वह अभी यह कह ही रहा था, कि एक और भी आकर कहने लगा, “तेरे बेटे–बेटियाँ बड़े भाई के घर में खाते और दाखमधु पीते थे, 19कि जंगल की ओर से बड़ी प्रचण्ड वायु चली, और घर के चारों कोनों को ऐसा झोंका मारा कि वह जवानों पर गिर पड़ा और वे मर गए; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।”


और यहाँ अय्यूब 42:10-17 बहाली का वर्णन हैः 10जब अय्यूब ने अपने मित्रों के लिये प्रार्थना की, तब यहोवा ने उसका सारा दु:ख दूर किया, और जितना अय्यूब के पास पहले था, उसका दुगना यहोवा ने उसे दे दिया। 11तब उसके सब भाई, और सब बहिनें, और जितने पहले उसको जानते पहिचानते थे, उन सभों ने आकर उसके यहाँ उसके संग भोजन किया; और जितनी विपत्ति यहोवा ने उस पर डाली थी, उस सब के विषय उन्होंने विलाप किया, और उसे शान्ति दी; और उसे एक एक सिक्‍का और सोने की एक एक बाली दी। 12यहोवा ने अय्यूब के बाद के दिनों में उसके पहले के दिनों से अधिक आशीष दी; और उसके चौदह हज़ार भेड़ बकरियाँ, छ: हज़ार ऊँट, हज़ार जोड़ी बैल, और हज़ार गदहियाँ हो गईं। 13उसके सात बेटे और तीन बेटियाँ भी उत्पन्न हुईं। 14इन में से उसने जेठी बेटी का नाम यमीमा, दूसरी का कसीआ और तीसरी का केरेन्हप्पूक रखा। 15उस सारे देश में ऐसी स्त्रियाँ कहीं न थीं, जो अय्यूब की बेटियों के समान सुन्दर हों; और उनके पिता ने उनको उनके भाइयों के संग ही सम्पत्ति दी। 16इसके बाद अय्यूब एक सौ चालीस वर्ष जीवित रहा, और चार पीढ़ी तक अपना वंश देखने पाया। 17अन्त में अय्यूब वृद्धावस्था में दीर्घायु होकर मर गया।


योएल और अय्यूब से हम आसानी से एक नमूना देख सकते हैं। दाऊद का अनुभव भी इस पद्धति के साथ मेल खाता है। शायद आपने विनाश का अनुभव किया है, परन्तु अभी तक बहाली नहीं हुई है। तो यह शिक्षा आपके लिए है। परमेश्‍वर पुनर्स्थापित करता है।


3. एक बड़ी बहाली। वचन 16-20

दाऊद को, उस छोड़े हुए मिस्र के गुलाम की सहायता से—जो उन्हें एक खेत में मरती हुई अवस्था में मिला था—उस जगह का पता चला, जहाँ आक्रमण करने वाले अमालेकी लोग पड़े हुए थे; उन्हें लगा था कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं, और अपनी जीत का उत्सव मना रहे थे। उसने उन पर आक्रमण किया, और वह समय-समय पर आवश्यकतानुसार प्रार्थना करता रहा, उसने अपने शत्रुओं के विरुद्ध अपनी मनोकामना पूरी होते देखा। अमालेकी, अपने द्वारा चोरी किए गए खजाने से स्वयं को धनी समझते हैं, और यह सोचकर कि वे खतरे की पहुँच से बाहर दूर चले हैं, स्वयं को इसके साथ बहुत आनन्दित कर रहे थे। वे उत्सव मना रहे थे! युद्ध के सभी विचारों को दरकिनार कर दिया गया था, और न ही वे यह सुनिश्‍चित करने के लिए किसी भी फुर्ती में थे कि उनकी लूट सुरक्षित रूप से अमालेकियों के नगरों और गांवों तक पहुँचे। वे "जब उसने उसे पहुँचाया, तब देखने में आया कि वे सब भू्मि पर छिटके हुए खाते पीते, और उस बड़ी लूट के कारण, जो वे पलिश्तियों के देश और यहूदा देश से लाए थे, नाच रहे हैं" (वचन16)। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि वे पृथ्वी पर सबसे लापरवाह तरीके से छिटके हुए पड़े थे, जैसा कोई सोच सकता है, और वहाँ वे खाते, पीते और नाचते हुए मिले, शायद अपने आदर्श और देवताओं के सम्मान में, जिन्हें उन्होंने अपनी सफलता के लिए प्रशंसा दी। इस स्थिति में दाऊद ने उन्हें चौंका दिया, और उसने उन्हें जीत लिया, और जो आक्रमण उसने उन पर किया, उसके लिए उतना ही आसान और उनके लिए उतना ही कठिन था। उनकी सुरक्षा झूठी थी और उनकी मौज-मस्ती कम थी। अपने पहरुओं से दूर, उनमें से कई शायद नशे में थे और दाऊद के सैनिकों का विरोध करने में असमर्थ थे, उसने उन सभी को तलवार से मार डाला, और केवल 400 बच निकले (वचन 17)। लूटने वालों को लूट लिया गया था; जीतने वालों पर जीत प्राप्त कर ली गई थी। यह दर्शाता है कि दुष्टों की विजय अल्पकालिक होती है, और उन पर क्रोध चला आता है, जैसा कि बाद में बेलशस्सर के बेबीलोन में उसके राज्य की विजय के अनुभव के माध्यम से बाइबल के इतिहास में भी प्रदर्शित किया गया था (दानिय्येल 5), जब वह भी अपने नशे में और लापरवाही से भरे उत्सवों के बीच में था।

लूट को पूरी तरह से वापस प्राप्त कर लिया गया और दाऊद और उसके लोगों के साथ वापस सिकलग ले जाया गया था। कुछ भी नहीं खोया था, परन्तु वास्तव में बहुत कुछ प्राप्त किया गया था। उन्होंने अपने सभी (18-19) वस्तुओं को पुनः प्राप्त किया और दाऊद ने अपनी दो पत्नियों को बचाया। बचाव के इस हिस्से का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, शायद इसलिए कि यह दाऊद को उसकी शेष सभी उपलब्धियों से अधिक प्रसन्न करता है। परमेश्‍वर ने इसे इस तरह से व्यवस्थित किया था कि अमालेकियों ने जो कुछ भी लिया था, उसे सावधानीपूर्वक सुरक्षित रखा, यह सोचकर कि वे इसे अपने लिए रख सकते हैं, हालाँकि वास्तव में उन्होंने इसे सही स्वामियों के लिए सुरक्षित रखा था। अंत में, इस्राएलियों के लिए कुछ भी कम नहीं था। दाऊद और उसके लोगों ने निष्कर्ष निकाला कि सब कुछ समाप्त हो गया था, परन्तु परमेश्‍वर से हम जो कुछ भी पूछ सकते हैं या सोच सकते हैं, वह उससे कहीं अधिक करने में सक्षम है, हमारे लिए हमारे अपने डर से बहुत ज्यादा होते हैं। यह लूट के एक बहुत बड़े छापे का एक छोटा सा उदाहरण है, कि इफिसियों के अनुसार, हमारा प्रभु यीशु, दाऊद और अब्राहम दोनों का पुत्र और उन दोनों के समान है - उत्पत्ति 14:16 में अब्राहम और यहाँ दाऊद - नरक में उतरा था, लूटा गया था और पर बचा लिया गया था, शैतान ने जो कुछ लूटा था और उसे विजयी रूप से बचा लिया गया। इसी लिए इफिसियों 4:8 ऐसे कहता है, "इसलिये वह कहता है : "वह ऊँचे पर चढ़ा और बन्दियों को बाँध ले गया, और मनुष्यों को दान दिए।""


परन्तु इतना ही सब कुछ नहीं था। उन्होंने सभी भेड़–बकरियों, और गाय–बैलों के अतिरिक्त अमालेकियों के सभी सामानों को भी ले लिया, और इन्हें लोग यह कहते हुए अपने जानवरों के आगे हाँकते गए, कि यह दाऊद की लूट है।। हो सकता है कि उनमें से कुछ मूल रूप से अमालाकियों के थे, परन्तु इसका अधिकांश हिस्सा शायद वही था, जो अमालाकियों ने पलिश्तियों और अन्य लोगों से लिया था, जो अब दाऊद के पास था। जानवरों के इस झुंड को इस घोषणा के साथ विपरीत दिशा में आगे बढ़ते हुए विजय की एक अभियान में रखा गया था, "कि यह दाऊद की लूट है।" जिन लोगों ने हाल ही में उस पर पथराव करने की बात कही थी, वे अब उसकी विजयी गतिविधियों के बारे में घमण्ड कर रहे थे, क्योंकि अब उन्हें उनके खोने से ज्यादा मिला था। यह बड़ी पुनर्प्राप्ति अर्थात् बहाली उन बड़ीं पुनर्प्राप्तियों का एक सटीक दृश्य है, जिसे परमेश्‍वर उन लोगों को देने में सक्षम है, जो ईमानदारी से उसके पीछे चलते हैं और स्वेच्छा से उसका पालन करते हैं। शैतान कहेगा, "क्या ही बड़ी लूट यह है” परन्तु हम कह सकते हैं, "क्या ही बड़ी पुनर्प्राप्ति अर्थात् बहाली यह है!"


4. बड़ी कूटनीति। वचन 26-31 (सिकलग में उनकी वापसी पर क्या हुआ)

दाऊद अपने सभी मित्रों के प्रति उदार और दयालु था। जब उसने हर एक को ब्याज के साथ अपनी ओर से दिया था, तब भी बहुत ज्यादा लूट बची रह गई। एक सेनापति के रूप में, दाऊद चोरी किए गए इस धन को वितरित कर सकता था और अब जैसा चाहता था, वैसा ही धन बाँट सकता था। अमालेकियों के तम्बूओं में बहुत सारे अभूषण हो सकते हैं, जैसे कि गिदोन की सेना ने मिद्यानियों से लूट लिए थे। इसलिए, अपने सैनिकों को अभूषणों से घमण्डी और कमजोर बनाने के बजाय, दाऊद ने अपने मित्रों—यहूदा के पुरनियों—को उपहार देने का निर्णय लिया। कई स्थानों के नाम दिए गए हैं, जहाँ पर उसने उपहार भेजे, वे सभी यहूदा के गोत्र में या उसके आसपास के थे। पहला बेतेल है, जिसका अर्थ परमेश्‍वर का घर है; उस स्थान को सबसे पहले, उसके नाम के कारण भेंट की सेवा का अवसर मिलना चाहिए था; या शायद वह वही स्थान था, जहाँ 'सन्दूक' रखा हुआ था—और इसलिए, वह 'परमेश्‍वर का घर' था। दाऊद ने पहले और सबसे अच्छे को वहाँ भेजा, उन लोगों के लिए, जो वहाँ उपस्थित थे, परमेश्‍वर की कारण जो प्रथम और सबसे भला है।


अन्तिम स्थान संभवतः हेब्रोन है, क्योंकि वह आगे की ओर देखते हुए सोच रहा था और यह सोच रहा था कि वह जल्द ही उसके लिए एक अच्छा मुख्यालय बन सकता है और इसलिए शेष बची हुई सारी लूट को वहाँ भेज दिया। इन उपहारों को भेजते समय उसकी उदारता की जाँच करें। उसका उद्देश्य स्वयं को धनी बनाना नहीं था, बल्कि अपने देश की सेवा करना था; और इसलिए परमेश्‍वर ने बाद में उसे समृद्ध किया, और उसे ऊपर उठाया और उस देश पर शासन करने के लिए स्थापित किया, जिसकी उसने सेवा की थी। उदार होना दयालु आत्मा बन जाता है। यह वह है, जो बिखेरता है, और फिर भी उसकी बढ़ती ही होती है। उसकी कृतज्ञता पर ध्यान दें। "जितने स्थानों में दाऊद अपने जनों समेत फिरा करता था, उन सब के पुरनियों के पास उसने कुछ कुछ भेजा," अर्थात् उन सभी को उपहार भेजे, जिनसे उसे दया प्राप्त हुई थी, जिन्होंने उसे शरण दी थी और उसे गुप्त जानकारी या भोजन-वस्तु भेजे थे। आइए हम यह सीखें कि ईमानदारी और सम्मान, दोनों ही हमें इस बात के लिए बाध्य करते हैं कि हम पर किए गए उपकारों का बदला चुकाया जाए—या कम-से-कम, जहाँ तक हमारे बस में हो, उन उपकारों को सच्चे मन से स्वीकार किया जाए।


दाऊद एक विश्‍वासयोग्य मित्र था और उन लोगों के प्रति विश्‍वासयोग्य था, जिन्होंने उसकी सहायता की थी। "यहोवा के शत्रुओं से ली हुई लूट में से तुम्हारे लिये यह भेंट है” ताकि वे अपने आस-पास की मूर्तिपूजक जातियों को दाऊद का व्यक्तिगत शत्रु न समझें, जितना कि वे परमेश्‍वर के शत्रु थे, जिससे कि वे प्रभु यहोवा के कारण विजय में आनन्दित हों, और इसके लिए धन्यवाद में उसके साथ शामिल हों।

उसने इन उपहारों को अपने देशवासियों के बीच मित्रता पैदा करने और उसे सिंहासन पर बैठने पर उसका समर्थन करने के लिए तैयार करने के लिए भेजी, जिसे उसने अब जल्द ही आते हुए देखा लिया था। "एक व्यक्ति की भेंट उसके लिए मार्ग बना देती है।" वह एक ऐसा राजा बनने के योग्य था, जिसने अब एक राजा की उदारता और कृपा दिखाई थी। भव्यता की अपेक्षा उदारता मनुष्य को अधिक प्रशंसनीय बनाती है।


ध्यान दें कि जीपीयों को न तो कोई उपहार मिला और न ही कीला के लोगों को। यहाँ तक कि दाऊद की पसन्द में यही थी कि किसे उपहार देना है और किसे उपहार नहीं देना है, उसने इसमें बुद्धि दिखाई, हालाँकि वह इतना धर्मी व्यक्ति था कि विश्‍वासघात और निर्दयता से बदला नहीं ले सकता था, फिर भी वह इतना मूर्ख नहीं था कि उन पर ध्यान ही न दे। जीपीयों ने दो बार शाऊल को बताया था कि दाऊद कहाँ है, ताकि शाऊल दाऊद को पकड़ सके। कीला नगर को दाऊद और उसकी सेना ने पलिश्तियों से छुड़ा लिया था, फिर भी उन्होंने दाऊद को शाऊल के हाथ सौंप कर उसके साथ विश्‍वासघात किया था। क्या दाऊद ने इस लूट का उपयोग जीपीयों या कीला के नागरिकों की विश्‍वासयोग्यता खरीदने की कोशिश करने के लिए किया था? नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। जीपीयों और किला के लोगों ने दाऊद के विरुद्ध अपना चुनाव किया था और दाऊद ने इसे स्वीकार कर लिया था। वह ऐसी विश्‍वासयोग्यता खरीदने की कोशिश नहीं करेगा, जो जीपीयों और कीला के नागरिकों के चरित्र के साथ असंगत हो। जब लोग गलत निर्णय लेते हैं, तो हमें कभी-कभी उन्हें उनके बुरा विकल्पों के परिणाम के साथ छोड़ना पड़ता है।


इस पूरी घटना में प्रमुख न्याय का विषय है। दाऊद ने अपने समूह के सदस्यों और अपने मित्रों के साथ धार्मिकता से भरा व्यवहार किया। यदि हम निष्पक्षता के लिए प्रतिष्ठित हैं, तो कुछ ही लोग हमारे नेतृत्व का पालन करने से इनकार करेंगे। यदि हम अपने कर्मचारियों और अन्य मसीही अगुवों के साथ उदारता, कृपा और न्याय के साथ व्यवहार करते हैं, तो हम एक मजबूत और विश्‍वासयोग्य नेतृत्व दल का निर्माण कर सकते हैं। पक्षपात दिखाना आपके लिए लाभप्रद नहीं है। चाहे आपके पसन्दीदा आपके परिवार के सदस्य हों या अन्य जिन्हें आप दूसरों की तुलना में अधिक पसन्द करते हैं, निष्पक्ष रहें। अपने सभी लोगों को समान अवसर दें। यदि वे गलतियाँ करते हैं, तो उन्हें धीरे से और निष्पक्ष रूप से सही करें। वे आपके नेतृत्व की शुद्धता को पहचानेंगे। दाऊद ने जिन सफलताओं और पुनर्स्थापनाओं अर्थात् बहाली का अनुभव किया, वे इस बीच अपने अन्तिम युद्ध के मैदान में स्वार्थी शाऊल के साथ जो हो रहा है, उसके बिल्कुल विपरीत हैं। परमेश्‍वर का जन, परमेश्‍वर की स्त्री, परमेश्‍वर पुनर्स्थापित अर्थात् बहाल करता है।