परमेश्‍वर का प्रभुता सम्पन्न उद्देश्य

अध्याय बासठ


2 शमूएल 3:12-21

Ron Meyers

परमेश्‍वर जानता है कि अपने उद्देश्यों को कैसे पूरा करना है। प्रभु यहोवा प्रभुता सम्पन्न अर्थात् सर्वोपरि है और वह वही करता है, जिसे वह चाहता है। पवित्रशास्त्र में कई बार इसका उदाहरण मिलता है, और 2 राजा 3:12-21 में हम इस विषय को किसी भी अन्य उदाहरण की तरह ही स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। न तो अब्नेर, न ईशबोशेत और न ही दाऊद—इनमें से कोई भी वास्तव में अपनी गतिविधियों के प्रति नियंत्रणकर्ता नहीं था। यह परमेश्‍वर ही था। परमेश्‍वर पर्दे के पीछे रहकर भी परिस्थितियों में कार्य कर सकता है और आपके लिए भी अपनी इच्छा पूरी कर सकता है।


12तब अब्नेर ने दाऊद के पास दूतों से कहला भेजा, “देश किसका है?” और यह भी कहला भेजा, “तू मेरे साथ वाचा बाँध, और मैं तेरी सहायता करूँगा कि समस्त इस्राएल का मन तेरी ओर फेर दूँ।” 13दाऊद ने कहा, “ठीक है, मैं तेरे साथ वाचा तो बाँधूँगा; परन्तु एक बात मैं तुझ से चाहता हूँ; कि जब तू मुझ से भेंट करने आए, तब यदि तू पहले शाऊल की बेटी मीकल को न ले आए, तो मुझ से भेंट न होगी।” 14फिर दाऊद ने शाऊल के पुत्र ईशबोशेत के पास दूतों से यह कहला भेजा, “मेरी पत्नी मीकल, जिसे मैं ने एक सौ पलिश्तियों की खलड़ियाँ देकर अपनी कर लिया था, उसको मुझे दे दे।” 15तब ईशबोशेत ने लोगों को भेजकर उसे लैश के पुत्र पलतीएल के पास से छीन लिया। 16और उसका पति उसके साथ चला, और बहूरीम तक उसके पीछे रोता हुआ चला गया। तब अब्नेर ने उससे कहा, “लौट जा;” और वह लौट गया। 17फिर अब्नेर ने इस्राएल के पुरनियों के संग इस प्रकार की बातचीत की, “पहले तो तुम लोग चाहते थे कि दाऊद हमारे ऊपर राजा हो। 18अब वैसा ही करो; क्योंकि यहोवा ने दाऊद के विषय में यह कहा है, ‘अपने दास दाऊद के द्वारा मैं अपनी प्रजा इस्राएल को पलिश्तियों वरन् उनके सब शत्रुओं के हाथ से छुड़ाऊँगा।’ “ 19अब्नेर ने बिन्यामीन से भी बातें कीं; तब अब्नेर हेब्रोन को चला गया, कि इस्राएल और बिन्यामीन के समस्त घराने को जो कुछ अच्छा लगा, वह दाऊद को सुनाए। 20तब अब्नेर बीस पुरुष संग लेकर हेब्रोन में आया, और दाऊद ने उसके और उसके संगी पुरुषों के लिये भोज किया। 21तब अब्नेर ने दाऊद से कहा, “मैं उठकर जाऊँगा, और अपने प्रभु राजा के पास सब इस्राएल को इकट्ठा करूँगा, कि वे तेरे साथ वाचा बाँधें, और तू अपनी इच्छा के अनुसार राज्य कर सके।” तब दाऊद ने अब्नेर को विदा किया, और वह कुशल से चला गया।


1. यह क्यों संभव नहीं लग रहा था कि अब्नेर इस्राएल को दाऊद के पक्ष में ले आएगा।

हम इस्राएल के मुख्य सेनापति, अब्नेर की कूटनीति के द्वारा इस्राएल और यहूदा को एक साथ लाने में परमेश्‍वर के काम के महत्व को पूरी तरह से तब तक नहीं समझ सकते, जब तक हम पहले यह न समझ लें कि ऐसा होना कितना मुश्किल था। यहाँ छह आवश्यक कारण दिए गए हैं कि अब्नेर ऐसा क्यों नहीं करता। 1. उसने कई वर्षों तक शाऊल के साथ मिलकर इस्राएल की सेना की कमान संभाली थी और दाऊद को पकड़ने और मारने की कोशिश की थी। 2. अब्नेर ने इस्राएल में ईशबोशेत को राजा बनाया था, इसलिए वह दाऊद का खुला विरोधी था। 3. दाऊद ने अब्नेर का अपमान किया था, क्योंकि जब दाऊद और अबीशै चुपके से शाऊल के डेरे में घुसे थे और शाऊल के सोते समय उसके सिर के पास रखी पानी की सुराही और भाला उठा ले गए थे, तब अब्नेर शाऊल की रक्षा नहीं कर पाया था। 4. लगभग सात वर्षों से अब्नेर दाऊद के घराने के विरुद्ध सेना का नेतृत्व कर रहा था और अभी भी ऐसा ही कर रहा था। 5. अब्नेर और योआब एक-दूसरे के विरोधी सेनापति थे और योआब दाऊद के साथ था। 6. अब्नेर ने योआब के भाई, असाहेल को मार डाला था, इसलिए अब्नेर को योआब के बदले की कार्यवाही का डर होना स्वाभाविक था। ये सभी ठोस कारण हैं कि अब्नेर शायद ही इस्राएल को दाऊद के पक्ष में लाना चाहता। आपको और मुझे ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है, जिनमें हमारी समस्या का हल मिलना बहुत मुश्किल लगता हो। फिर भी, जैसा कि अब्नेर की रणनीति में बदलाव और इस्राएल को दाऊद के पक्ष में लाने के लिए उसकी कूटनीति की कोशिश की कहानी से पता चलता है, परमेश्‍वर अपनी योजना को पूरा करने के लिए आवश्यक कोई भी आश्‍चर्यकर्म करने के लिए अपनी इच्छा से काम कर सकता है। वह आपके लिए काम करेगा, ताकि आपको उस सेवा की स्थिति में पहुँचा सके, जो उसने आपके लिए तय की है; ठीक वैसे ही, जैसे उसने अब्नेर और कई घटनाओं के द्वारा काम करके दाऊद को उस पद पर पहुँचाया, जिसकी योजना उसने दाऊद के लिए बनाई थी।


2. अब्नेर की कूटनीति । वचन 12-18

असाहेल, जो दाऊद का भतीजा और योआब का भाई था, दाऊद के तीस शूरवीरों में से एक था। जब असाहेल युद्ध में अब्नेर का पीछा कर रहा था, तब अब्नेर द्वारा असाहेल को मारने से ठीक पहले, अब्नेर ने पूछा कि यदि वह असाहेल को मार देता है, तो वह असाहेल के भाई, योआब का सामना कैसे करेगा। हालाँकि, असाहेल अब्नेर का तब भी पीछा करता रहा, और तब अब्नेर ने अपने भाले के पिछले हिस्से अर्थात् हत्थी से असाहेल को मार डाला। इस तरह, अब्नेर, योआब के भाई और दाऊद के भतीजे का हत्यारा था। क्या अब्नेर के लिए अब ईशबोशेत के प्रति अपनी किसी भी जिम्मेदारी से स्वयं को अलग करना, और दाऊद तथा योआब के साथ मिल जाना, बहुत अधिक हियाव का काम नहीं होता? दाऊद और योआब अब्नेर को कैसे अपना सकते थे, जबकि उसने उनके प्रिय असाहेल को मार डाला था? फिर भी, इस जोखिम के बावजूद, अब्नेर ने दाऊद से सम्पर्क करने की पहल की, जबकि योआब उस समय एक आक्रमण करने वाले टुकड़ी के साथ बाहर गया हुआ था। हम यह मान सकते हैं कि अब्नेर पहले से ही ईशबोशेत के उद्देश्य से ऊबने लगा था, और शायद दाऊद तक पहुँचने का अवसर खोजने लगा था। हालाँकि उसने शायद सात वर्ष पहले दाऊद के भतीजे असाहेल को मार डाला था, फिर भी ईशबोशेत से अब्नेर के अपने व्यक्तिगत् क्रोध और शाऊल के घराने की कमजोरी की जानकारी ने, अब्नेर को दाऊद को संदेश भेजने का साहस दिया। शायद उसने सोचा हो, "यदि मैं उन्हें हरा नहीं सकता, तो मैं उनके साथ ही मिल जाता हूँ।" यदि अब्नेर ने पहले से इस बारे में न सोचा होता, तो ईशबोशेत को धमकी देने के बाद इतनी जल्दी वह दाऊद से सम्पर्क कैसे कर पाता? वचन 12 कहता है, "तब अब्नेर ने दाऊद के पास दूतों से कहला भेजा, "देश किसका है?" और यह भी कहला भेजा, "तू मेरे साथ वाचा बाँध, और मैं तेरी सहायता करूँगा कि समस्त इस्राएल का मन तेरी ओर फेर दूँ।"" इससे पता चलता है कि अब्नेर ने ईशबोशेत वाली घटना के तुरन्त बाद ही यह कदम उठाया था।


यह भूमि किसकी है? क्या यह तेरी नहीं है? अब्नेर, हालाँकि वह शत्रु सेना का सेनापति था, फिर भी उसे उस भूमि के हालात की पूरी जानकारी का पता था। उसे जनमत का एकदम सही अनुमान था। परमेश्‍वर ऐसे लोगों का भी उपयोग करने का कोई न कोई तरीका ढूँढ़ ही लेता है, जो मसीह के राज्य का हिस्सा नहीं होते, ताकि वे राज्य के कामों में सहायता कर सकें। शत्रु कभी-कभी 'पाँव रखने की चौकी' बन जाते हैं—न केवल इसलिए कि उन पर पाँव रखा जाए, बल्कि इसलिए भी कि उनके सहारे ऊपर चढ़ा जा सके। परमेश्‍वर किसी भी व्यक्ति या किसी भी चीज का उपयोग कर सकता है। चित्रों वाली भाषा में कहें, तो प्रकाशितवाक्य 12:16 उस स्त्री की सहायता करने वाली पृथ्वी के बारे में बताता है, जो इस्राएल का प्रतिनिधित्व करती है। उस अजगर ने पानी की बाढ़ से उस स्त्री को हराने की कोशिश की, परन्तु पवित्रशास्त्र कहता है, "परन्तु पृथ्वी ने उस स्त्री की सहायता की, और अपना मुँह खोलकर उस नदी को जो अजगर ने अपने मुँह से बहाई थी पी लिया।" आइए हम परमेश्‍वर से प्रार्थना करना सीखें, और परमेश्‍वर जिसे भी, जो कुछ भी, जब भी और जिस भी तरीके से चुनता है, उसे उपयोग करने दें। हमारी कहानी में, परमेश्‍वर ने अब्नेर का उपयोग किया—जिसके बारे में हमने इस श्रृँखला के अन्य पाठों में बताया है कि वह कोई धर्मी पुरुष नहीं था। वह महत्त्वाकांक्षी और बदला लेने वाला व्यक्ति था। वह दाऊद के पास किसी शुद्ध या निस्वार्थ मंशा से नहीं आ रहा था। अन्य बातों के अतिरिक्त, वह ईशबोशेत से बदला लेना चाहता था, क्योंकि ईशबोशेत ने शाऊल की उपपत्नी अर्थात् रखैल के साथ सोने के लिए उसकी आलोचना की थी। और दाऊद ने इसका क्या उत्तर दिया? अंततः दाऊद ने अब्नेर और उसके बीस साथियों का स्वागत किया, और उन्हें एक भव्य भोज दिया।

दाऊद ने अब्नेर से मिलने के लिए केवल एक शर्त पर सहमति दी: कि उसे उसकी पत्नी, मीकल, वापस मिल जाए। हम इस अनुरोध की व्याख्या कैसे करें? दो संभावनाएँ मिलती हैं: 1. दाऊद ने अपनी पहली और सही रीति से सबसे पत्नी के प्रति अपने वैवाहिक स्नेह की ईमानदारी दिखाई। इसका अर्थ यह होगा कि स्पष्ट तौर पर, न तो उसके किसी दूसरे व्यक्ति से विवाह करने से, और न ही दाऊद की दूसरी पत्नियों से विवाह करने से, वह उससे भावनात्मक रूप से अलग हुआ था। बहुत सी नदियाँ भी उस प्रेम को बुझा नहीं सकीं। उसने शाऊल के घराने के प्रति अपना सम्मान दिखाया। वह उस गिरे हुए घराने को रौंदना नहीं चाहता था। अपनी वर्तमान उन्नति के बावजूद भी, उसे शाऊल के परिवार का हिस्सा होने से संतुष्टि मिलती थी। अपनी पत्नी—जो शाऊल की पुत्री थी—के बिना, वह सिंहासन के सम्मान से प्रसन्न नहीं होता। अपने शत्रु के परिवार के प्रति उसके मन में कोई कड़वाहट नहीं थी। या फिर, यह भी संभव है, 2. कि दाऊद केवल राजनीतिक दिखावे पर ध्यान दे रहा था और हर किसी को यह स्मरण दिलाना चाहता था कि वह शाऊल का दामाद है। दाऊद पूरे इस्राएल में एक जानी-मानी हस्ती था। इसलिए, मीकल को वापस पाने की दाऊद की माँग के पीछे केवल यही उद्देश्य हो सकता था। यह भी सोचा जा सकता है कि दाऊद के मन में ये दोनों ही उद्देश्य थे। आखिरकार, वह एक राजनेता था और मीकल का पहला और सही पति था। यदि यह प्रेम के लिए था, तो हम में से ज्यादातर लोग कहेंगे, "बहुत बढ़िया!" यदि यह केवल एक अच्छी सार्वजनिक छवि के लिए था, तो व्यक्ति की कृपा के बजाय परमेश्‍वर की कृपा पाना सर्वोत्तम है।


अब्नेर ने स्पष्ट रूप से उसे संदेश भेजा कि दाऊद को ईशबोशेत से सम्पर्क करना होगा; दाऊद ने वैसा ही किया, और उसने शाऊल को मीकल के बदले जो मूल्य चुकाया था, उसका भी वर्णन किया। ईशबोशेत अब्नेर के समर्थन के बिना उसकी माँग को ठुकराने की हियाव नहीं कर सकता था, इसलिए उसने मीकल को पलतीएल से वापस ले लिया, जिससे शाऊल ने उसकी विवाह करवा दिया था। उसके दूसरे पति के प्रति कोई सहानुभूति नहीं दिखाई जाती, क्योंकि जब पलतीएल ने उसे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था, तब वह जानता था कि वह पहले से ही किसी और की पत्नी है। किसी भी व्यक्ति को ऐसी चीज पर अपना मन नहीं लगाना चाहिए, जिस पर उसका कोई हक न हो। और यदि किसी असहमति के कारण पति-पत्नी अलग हो गए हैं, और यदि वे परमेश्‍वर का आशीर्वाद चाहते हैं, तो उन्हें आपस में मेल-मिलाप करके फिर से एक हो जाना चाहिए। परमेश्‍वर ऐसे विषयों में ऐसी कृपा प्रदान करे कि वह पिछले सभी झगड़ों को भुला दे, और वे विवाह के लिए परमेश्‍वर की पवित्र योजना के अनुसार, प्रेमपूर्वक एक साथ जीवन बिताएँ। यह परमेश्‍वर के आशीर्वाद का मार्ग है। बाइबल विवाह को एक स्थायी बंधन के रूप में प्रस्तुत करती है। तब अब्नेर मीकल को दाऊद के पास ले आया; उसे लगा कि जब वह एक हाथ में दाऊद की पत्नी और दूसरे हाथ में राजमुकुट लेकर उसके पास जाएगा, तो दाऊद उसका अवश्य स्वागत करेगा।


अब्नेर जानता था कि यदि इस्राएल के पुरनिए दाऊद का पक्ष लेंगे, तो सामान्य लोग भी उसका ही साथ देंगे। इसलिए, "अब्नेर ने इस्राएल के पुरनियों के संग इस प्रकार की बातचीत की" (वचन 17)। अब जब यह उसके अपने हित में था, तो वह दाऊद की ओर से यह तर्क दे सकता था कि दाऊद ही इस्राएल की अपनी पसन्द है। वचन 17 और 18अ कहते हैं, "पहले तो तुम लोग चाहते थे कि दाऊद हमारे ऊपर राजा हो। अब वैसा ही करो!" इसका आशय यह था, 'दाऊद ने पलिश्तियों के विरुद्ध सफलतापूर्वक युद्ध किया है और इस्राएल की बहुत अच्छी सेवा की है। उससे ज्यादा योग्य कोई नहीं है। तुमने ईशबोशेत को जाँच लिया है, अब दाऊद को भी जाँचों; अब, राजमुकुट उसे दो, जो इसका सबसे ज्यादा हकदार है।' दाऊद को अपना राजा बनने दो।


नि:सन्देह, दाऊद सबसे पहले परमेश्‍वर की पसन्द था, जैसा कि वचन 18 स्पष्ट करता है, "क्योंकि यहोवा ने दाऊद के विषय में यह कहा है, 'अपने दास दाऊद के द्वारा मैं अपनी प्रजा इस्राएल को पलिश्तियों वरन् उनके सब शत्रुओं के हाथ से छुड़ाऊँगा।'" भला किसने यह आशा की होगी कि अब्नेर के मुँह से इतनी तर्कसंगत बातें निकलेंगी? परन्तु परमेश्‍वर अपने लोगों के शत्रुओं से भी यह स्वीकार करवा सकता है कि उसने अपने लोगों से प्रेम किया है। प्रकाशितवाक्य 3:9 कहता है, "मैं ऐसा करूँगा कि वे आकर तेरे पैरों पर गिरेंगे, और यह जान लेंगे कि मैं ने तुझ से प्रेम रखा है।" उसने विशेष रूप से बिन्यामीन गोत्र के लोगों पर व्यक्तिगत ध्यान दिया—वे लोग जो उसके अपने गोत्र के थे, जिन पर उसका सबसे ज्यादा प्रभाव था, और जिन्हें उसने शाऊल के घराने के प्रति विश्‍वासयोग्य बने रहने के लिए प्रेरित किया था। वह वही व्यक्ति था, जिसने ईशबोशेत को इस्राएल का राजा बनाने के लिए उन्हें धोखे में रखा था, और इसलिए अब वह उन्हें सच्चाई से अवगत कराने के लिए चिन्तित था। यदि भीड़ भेड़ों के समान है, तो चरवाहा उन्हें किस ओर ले जाएगा? नेतृत्व की जिम्मेदारियाँ इस तरह की कहानियों में स्पष्ट हो जाती हैं, जिनमें हम देखते हैं कि बहुत से लोग कुछ लोगों की राय का अनुसरण करते हैं। अब्नेर ने लोगों को दाऊद से दूर किया था, और अब वह उन्हें दाऊद के पास ले आया। इन दोनों में से किस समय वह सही था? हे अगुवे, ध्यान दें—लोग आपका अनुसरण कर रहे हैं; इसलिए सावधान रहें।

3. अब्नेर और दाऊद अपने समझौते को अन्तिम रूप देते हैं। वचन 19-21

दाऊद ने समझदारी से अब्नेर के साथ संधि स्वीकार कर ली, और ऐसा करके उसने बहुत अच्छा किया; क्योंकि अब्नेर ने चाहे जिस भी उद्देश्य से ऐसा किया हो, यह युद्ध को समाप्त करने और प्रभु यहोवा के अभिषिक्त जन को सिंहासन पर बिठाने का एक अच्छा साधन था। तार्किक रूप से कहें तो, दाऊद के लिए अब्नेर का उपयोग करना उतना ही उचित था, जितना किसी निर्धन व्यक्ति के लिए किसी फरीसी से भीख लेना—जो अपने स्वार्थी उद्देश्यों के लिए, घमण्ड और पाखंड के साथ भीख देता है। परमेश्‍वर ही सब कुछ प्रदान करता है, कभी-कभी तो दूसरों के दोषपूर्ण उद्देश्यों के माध्यम से भी। एक प्रभुता सम्पन्न प्रभु यहोवा के लिए हमारे कार्य में, दूसरों के उद्देश्यों की परवाह किए बिना, परमेश्‍वर ही कार्य कर रहा होता है और उसका उद्देश्य पूरा होता है। इसे समझना ही, मनुष्यों, राष्ट्रों, राज्यों और सेनाओं के विषयों में परमेश्‍वर की प्रभुता सम्पन्न भागीदारी की सराहना करना है। अब्नेर ने लोगों की राय और उसके साथ अपनी बातचीत की सफलता के बारे में दाऊद को बताया। इससे पहले उसने केवल एक संदेश भेजा था, परन्तु इस बार वह न केवल व्यक्तिगत् तौर पर नहीं आया, बल्कि बीस लोगों के एक समूह के साथ आया, और दाऊद ने उनका आतिथ्य-सत्कार किया। "तब अब्नेर बीस पुरुष संग लेकर हेब्रोन में आया, और दाऊद ने उसके और उसके संगी पुरुषों के लिये भोज किया" (वचन 20)। उस बातचीत, आनन्द, हंसी-ठट्ठों, कहानियों और चुटकुलों की कल्पना करने की कोशिश करें, जिनसे इस भोज का सामाजिक ताना-बाना बुना गया था। ये लोग कभी शत्रु थे, हालाँकि वे सभी इस्राएली थे। अब वे एक साथ भोज कर रहे थे। उत्पत्ति 26:30 में एक और भोज का वर्णन है, जो अबीमेलेक और इसहाक—एक पलशती और एक इब्री—के बीच कुओं को लेकर हुए एक समझौते पर आधारित था: "तब उसने उनको भोज दिया और उन्होंने खाया–पिया” परन्तु वे सभी इस्राएली नहीं थे।


अब्नेर अपने आतिथ्य से और शाऊल के घराने के साथ अपने पतन से बच जाने के कारण प्रसन्न था—एक ऐसा पतन, जो अवश्य ही निकट में होने वाला था, यदि उसने यह मार्ग न अपनाया होता। इसके अतिरिक्त, वह शायद दाऊद के अधीन किसी पद पर अपनी व्यक्तिगत उन्नति या नियुक्ति की संभावना को लेकर और भी अधिक प्रसन्न था। इसलिए अब्नेर ने उस क्रांति को लाने के लिए तुरन्त कार्य करने का निर्णय लिया; ताकि पूरे इस्राएल को दाऊद के साथ सहयोग करने के लिए तैयार किया जा सके (वचन 21)।


उसने दाऊद से कहा, "तू अपनी इच्छा के अनुसार राज्य कर सके।" वह जानता था कि दाऊद का राजा बनना परमेश्‍वर की ओर से नियुक्ति किए जाने के कारण हुआ था, फिर भी वह यह संकेत देता है कि यह दाऊद की अपनी व्यक्तिगत् महत्वाकांक्षा और शासन करने की इच्छा से उपजा था। ऐसा लगता है कि यह किसी ऐसे व्यक्ति का उदाहरण है, जो मनोवैज्ञानिक रूप से अपनी सोच को दूसरे पर थोपता है; उसने उस भले व्यक्ति को अपने ही पैमाने पर गलत मापा। परन्तु, नीतिवचन 19:11 कहता है, “जो मनुष्य बुद्धि से चलता है वह विलम्ब से क्रोध करता है, और अपराध को भुलाना उसको शोभा देता है।” ऐसा प्रतीत होता है कि दाऊद को इस बात से कोई अपमान महसूस नहीं हुआ कि अब्नेर ने सोचा था कि दाऊद राज्य केवल अपने लिए चाहता है। दाऊद ने स्पष्ट रूप से इस अपराध को वैसे ही अनदेखा कर दिया, जैसा कि उसका पुत्र सुलैमान बाद में दूसरों को करने की सलाह देगा; इसलिए वह और अब्नेर अच्छे मित्रों की तरह अलग हुए, और उनके बीच एक स्वस्थ संबंध अच्छी तरह से स्थापित होता हुआ प्रतीत हुआ, भले ही वे दोनों इतने लंबे समय तक एक-दूसरे के विरोधी रहे थे। हम सभी जो परमेश्‍वर का भय मानते हैं और उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं, इस उदाहरण का अनुसरण कर सकते हैं; हम सदैव स्वयं को सही ठहराने के प्रलोभन का विरोध कर सकते हैं, दुष्टों के साथ भी झगड़े से बच सकते हैं, सभी लोगों के साथ शांति से रह सकते हैं, और संसार को दिखा सकते हैं कि ज्योति की सन्तानों के रवैये और व्यवहार—नम्रता, समर्पण और रक्षात्मक न होने—के माध्यम से परमेश्‍वर का सम्मान कैसे किया जा सकता है।


एक और बात पर ध्यान देना आवश्यक है, जो हमें इस स्थिति में परमेश्‍वर की प्रभुता सम्पन्न भागीदारी को और भी अधिक सर्वोत्तम ढंग से समझने में सहायता करेगी। योआब, जिसके पास अब्नेर पर भरोसा न करने का दाऊद से भी अधिक प्रबल कारण था, जो इस घटनाक्रम के दौरान एक छापेमारी अभियान पर बाहर गया हुआ था। क्या योआब तब बाहर था, जब अब्नेर का संदेश पहली बार आया था? हम नहीं जानते, परन्तु हम यह अवश्य जानते हैं कि जब अब्नेर हेब्रोन आया, तब योआब वहाँ उपस्थित नहीं था। यह महत्वपूर्ण क्यों है? योआब निश्‍चित रूप से अब्नेर और दाऊद के बीच किसी भी शांतिपूर्ण संबंध को रोकने की कोशिश करता। योआब की अपनी स्थिति भी कुछ हद तक डांवाडोल थी। वह एक धूर्त व्यक्ति था, जैसा कि दाऊद की कहानी हमें भविष्य के पाठों में दिखाएगी। अब्नेर के हेब्रोन से शांतिपूर्वक निकलते ही, योआब और दाऊद के सैनिक वापस आ गए। यह सुनकर कि दाऊद ने अब्नेर को शांतिपूर्वक विदा कर दिया था, योआब क्रोधित हो गया; उसने अब्नेर को वापस बुलाया और उसकी हत्या कर दी। यह नाटकीय घटना हमारे अगले पाठ का मुख्य विषय बनेगी, परन्तु जो लोग अब्नेर के साथ थे, उन्होंने अब्नेर और दाऊद के बीच हुई बातचीत को देखा था, और अब्नेर की मृत्यु हो जाने के बावजूद भी वे उस कार्य को आगे बढ़ाने में सक्षम रहे। मुझे लगता है कि जब अब्नेर हेब्रोन में था, तब योआब की वहाँ गैर-उपस्थित इस कहानी में परमेश्‍वर के प्रभुता सम्पन्न अर्थात् सर्वोपरि हस्तक्षेप का ही एक हिस्सा थी। योआब, अब्नेर के कूटनीतिक प्रयासों को रोक नहीं पाया।

इस तरह, यहाँ तीन सबक मिलते हैं, जिन्हें हम दाऊद की कहानी के इस हिस्से से सीख सकते हैं: 1. एक प्रभुता सम्पन्न परमेश्‍वर ने दाऊद और इस्राएल के लिए अपनी इच्छा को उन लोगों के किरदारों के द्वारा भी पूरा किया, जिन्हें पूरी तरह यह एहसास नहीं था कि वे क्या कर रहे हैं। 2. हम अब्नेर से यह सीखते हैं कि हमें अपनी भावनाओं को दूसरों पर नहीं थोपना चाहिए, जैसा कि अब्नेर ने किया था; और जब दूसरे ऐसा करें, तो हमें उसे समझना चाहिए, जैसा कि दाऊद ने किया था। 3. हम दाऊद से यह सीखते हैं कि किसी भी अपमान को अनदेखा कर देना चाहिए, चाहे वह जान-बूझकर किया गया हो या अनजाने में।