विनाश

अध्याय अठारह


निर्गमन 10:1-20

Ron Meyers

1फिर यहोवा ने मूसा से कहा, “फ़िरौन के पास जा; क्योंकि मैं ही ने उसके और उसके कर्मचारियों के मन को इसलिये कठोर कर दिया है कि अपने चिह्न उनके बीच में दिखलाऊँ; 2और तुम लोग अपने बेटों और पोतों से इसका वर्णन करो कि यहोवा ने मिस्रियों को कैसे ठट्ठों में उड़ाया और अपने क्या क्या चिह्न उनके बीच प्रगट किए हैं; जिससे तुम यह जान लोगे कि मैं यहोवा हूँ।” 3तब मूसा और हारून ने फ़िरौन के पास जाकर कहा, “इब्रियों का परमेश्‍वर यहोवा तुझ से इस प्रकार कहता है : तू कब तक मेरे सामने दीन होने से संकोच करता रहेगा? मेरी प्रजा के लोगों को जाने दे कि वे मेरी उपासना करें। 4यदि तू मेरी प्रजा को जाने न दे तो सुन, कल मैं तेरे देश में टिड्डियाँ ले आऊँगा, 5और वे धरती को ऐसा छा लेंगी कि वह देख न पड़ेगी; और तुम्हारा जो कुछ ओलों से बच रहा है उसको वे चट कर जाएँगी, और तुम्हारे जितने वृक्ष मैदान में लगे हैं उनको भी वे चट कर जाएँगी, 6और वे तेरे और तेरे सारे कर्मचारियों, यहाँ तक कि सारे मिस्रियों के घरों में भर जाएँगी; इतनी टिड्डियाँ तेरे बापदादों ने या उनके पुरखाओं ने जब से पृथ्वी पर जन्मे तब से आज तक कभी न देखीं।” तब वह मुड़ कर फ़िरौन के पास से बाहर चला गया। 7तब फ़िरौन के कर्मचारी उससे कहने लगे, “वह जन कब तक हमारे लिये फन्दा बना रहेगा? उन मनुष्यों को जाने दे कि वे अपने परमेश्‍वर यहोवा की उपासना करें। क्या तू अब तक नहीं जानता कि सारा मिस्र नष्‍ट हो गया है?” 8तब मूसा और हारून फ़िरौन के पास फिर बुलवाए गए, और उसने उनसे कहा, “चले जाओ, अपने परमेश्‍वर यहोवा की उपासना करो; परन्तु वे जो जाने वाले हैं कौन–कौन हैं?” 9मूसा ने कहा, “हम तो बेटों–बेटियों, भेड़–बकरियों, गाय–बैलों समेत वरन् बच्‍चों से बूढ़ों तक सब के सब जाएँगे, क्योंकि हमें यहोवा के लिये पर्व करना है।” 10उस ने इस प्रकार उनसे कहा, “यहोवा तुम्हारे संग रहे यदि मैं तुम्हें बच्‍चों समेत जाने देता हूँ; देखो, तुम्हारे मन में बुराई है। 11नहीं, ऐसा नहीं होने पाएगा; तुम पुरुष ही जाकर यहोवा की उपासना करो, तुम यही तो चाहते थे।” और वे फ़िरौन के सम्मुख से निकाल दिए गए। 12तब यहोवा ने मूसा से कहा, “मिस्र देश के ऊपर अपना हाथ बढ़ा कि टिड्डियाँ मिस्र देश पर चढ़ के भूमि का जितना अन्न आदि ओलों से बचा है सब को चट कर जाएँ।” 13अत: मूसा ने अपनी लाठी को मिस्र देश के ऊपर बढ़ाया, तब यहोवा ने दिन भर और रात भर देश पर पुरवाई बहाई; और जब भोर हुआ तब उस पुरवाई में टिड्डियाँ आईं। 14और टिड्डियों ने चढ़ के मिस्र देश के सारे स्थानों में बसेरा किया, उनका दल बहुत भारी था, वरन् न तो उनसे पहले ऐसी टिड्डियाँ आई थीं, और न उनके बाद ऐसी फिर आएँगी।* 15वे तो सारी धरती पर छा गईं, यहाँ तक कि देश में अन्धकार छा गया; और उसका सारा अन्न आदि और वृक्षों के सब फल, अर्थात्, जो कुछ ओलों से बचा था, सब को उन्होंने चट कर लिया; यहाँ तक कि मिस्र देश भर में न तो किसी वृक्ष पर कुछ हरियाली रह गई और न खेत में अनाज रह गया। 16तब फ़िरौन ने तुरन्त मूसा और हारून को बुलवा के कहा, “मैं ने तो तुम्हारे परमेश्‍वर यहोवा का और तुम्हारा भी अपराध किया है। 17इसलिये केवल अब की बार मेरा अपराध क्षमा करो, और अपने परमेश्‍वर यहोवा से विनती करो कि वह मेरे ऊपर से इस मृत्यु को दूर करे।” 18तब मूसा ने फ़िरौन के पास से निकल कर यहोवा से विनती की। 19तब यहोवा ने बहुत प्रचण्ड पश्‍चिमी हवा बहाकर टिड्डियों को उड़ाकर लाल समुद्र में डाल दिया, और मिस्र के किसी स्थान में एक भी टिड्डी न रह गई। 20तौभी यहोवा ने फ़िरौन के मन को कठोर कर दिया, जिस से उसने इस्राएलियों को जाने न दिया।


मैं इस सच्चाई के एक स्पष्ट दृश्य के बारे में नहीं सोच सकता कि परमेश्‍वर के विरुद्ध हमारा हठ मूसा के समय में मिस्र में आई विपत्तियों की तुलना में हमारे अपने ही विनाश की ओर ले जाता है। शायद यही कारण है कि कहानी यहाँ दस विपत्ति में से प्रत्येक के बारे में इतनी विस्तार से बता रही है। फ़िरौन और मिस्र पर विनाश और नाश के बेतुके स्तर के कारण सीखा जाने वाला सबक बहुत स्पष्ट है। परन्तु हठ की कम मात्रा, कम मात्रा में विनाश का कारण बन सकती है। हम में से कोई भी कोई विनाश नहीं चाहता है, इसलिए यहाँ एक कठोर परन्तु सहायक संदेश के साथ एक स्पष्ट कहानी दी गई है। यदि आप चाहते हैं कि चीजें ठीक हों, तो जल्दी से परमेश्‍वर के सामने झुकें, मुझे सन्देह है कि मूसा फ़िरौन के हठ और परमेश्‍वर की गंभीरता पर बहुत ज्यादा आश्‍चर्यचकित था। मूसा मिस्र में पला-बढ़ा था। यह उसके बचपन की भूमि थी। वह मिस्र के विनाश के लिए सहानुभूतिपूर्वक चिन्तित कैसे नहीं हो सकता था, और यह कल्पना करने से चूक गया कि इस प्रतियोगिता का अंत में क्या होगा? इस संदर्भ में परमेश्‍वर उसे बताता है कि उसने क्या योजना बनाई थी, न केवल इस्राएल की रिहाई, बल्कि अपने नाम का महिमा भी। यहाँ वचन  1 और 2 में ऐसे कहा गया है, "फिर यहोवा ने मूसा से कहा, "फ़िरौन के पास जा; क्योंकि मैं ही ने उसके और उसके कर्मचारियों के मन को इसलिये कठोर कर दिया है कि अपने चिह्न उनके बीच में दिखलाऊँ;  और तुम लोग अपने बेटों और पोतों से इसका वर्णन करो कि यहोवा ने मिस्रियों को कैसे ठट्ठों में उड़ाया और अपने क्या क्या चिह्न उनके बीच प्रगट किए हैं; जिससे तुम यह जान लोगे कि मैं यहोवा हूँ।""


परमेश्‍वर की महिमा के लिए, मिस्र की दस विपत्तियों को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति के राज्य में परमेश्‍वर की प्रबल शक्ति के निर्विवाद प्रमाण के रूप में वर्णित की जानी चाहिए। वह सभी प्राणियों पर उसके प्रभुत्व और उसके ज्ञान के अनुसार उस या तो उसके न्याय के लिए सेवकों के रूप में या इसके द्वारा पीड़ितों के रूप में उपयोग करने के उसके अधिकार को दर्शाता है। विपत्तियों का यह अभिलेख शैतान के राज्य पर परमेश्‍वर की विजयी सामर्थ्य को, घृणा को नियंत्रित करने और उसकी कलीसिया के शत्रुओं के अहंकार को दण्डित करने को भी दिखाएगा। ये विपत्तियाँ परमेश्‍वर की महानता, कलीसिया के हर्ष, पाप की पापपूर्णता, और सभी आयु के लोगों और स्त्रियों के लिए हमारे सृष्टिकर्ता, मित्र और पिता, परमेश्‍वर के विरुद्ध न सोचने, बोलने या काम करने के लिए लंबे समय तक चलने वाले सबक हैं। हमें और पूरे संसार को इन निर्देशों का लाभ पर्याप्त रूप से मूसा के निर्गमन के विवरण में शामिल होने की पुष्टि करता है।


वचन 3 में फ़िरौन को फटकार लगाई गई है, "तब मूसा और हारून ने फ़िरौन के पास जाकर कहा, “इब्रियों का परमेश्‍वर यहोवा तुझ से इस प्रकार कहता है : तू कब तक मेरे सामने दीन होने से संकोच करता रहेगा? मेरी प्रजा के लोगों को जाने दे कि वे मेरी उपासना करें।" बड़े लोगों से यह सही अपेक्षा की जाती है कि वे महान परमेश्‍वर के सामने स्वयं को विनम्र करें, और यदि वे ऐसा करने से इनकार करते हैं, तो यह उनके अपने विनाश के लिए होता है। एक से अधिक बार राजाओं का परमेश्‍वर के साथ झगड़ा रहा है। दानिय्येल 5:22 कहता है, "तौभी, हे बेलशस्सर, तू जो उसका पुत्र है, और यह सब कुछ जानता था, तौभी तेरा मन नम्र न हुआ।" सिदकिय्याह ने यिर्मयाह के सामने स्वयं को विनम्र नहीं किया था, जैसा कि 2 इतिहास 36:12 में वर्णित है, "उसने वही किया जो उसके परमेश्‍वर यहोवा की दृष्‍टि में बुरा है। यद्यपि यिर्मयाह नबी यहोवा की ओर से बातें कहता था, तौभी वह उसके सामने दीन न हुआ।" जो स्वयं को विनम्र नहीं करेंगे, परमेश्‍वर उन्हें विनम्र करेगा। फ़िरौन ने कभी-कभी स्वयं को विनम्र करने का नाटक किया था, परन्तु इससे कुछ भी नहीं निकला, क्योंकि वह न तो ईमानदार था और न ही सुसंगत था।


टिड्डियों की विपत्ति का खतरे मंडरा रहा है, क्योंकि वचन 4-6 में कहा गया है, "यदि तू मेरी प्रजा को जाने न दे तो सुन, कल मैं तेरे देश में टिड्डियाँ ले आऊँगा, और वे धरती को ऐसा छा लेंगी कि वह देख न पड़ेगी; और तुम्हारा जो कुछ ओलों से बच रहा है उसको वे चट कर जाएँगी, और तुम्हारे जितने वृक्ष मैदान में लगे हैं उनको भी वे चट कर जाएँगी,  और वे तेरे और तेरे सारे कर्मचारियों, यहाँ तक कि सारे मिस्रियों के घरों में भर जाएँगी; इतनी टिड्डियाँ तेरे बापदादों ने या उनके पुरखाओं ने जब से पृथ्वी पर जन्मे तब से आज तक कभी न देखीं।" तब वह मुड़ कर फ़िरौन के पास से बाहर चला गया।" ओलों ने वनस्पति को नष्ट कर दिया था, परन्तु इन टिड्डियों को आकर उसे खा कर खत्म कर दिया और इतना ही नहीं, वे उनके घरों से भर जाती हैं। यह व्यक्तिगत होता जा रहा था। कोई पलायन नहीं होगा। बीते समय में मेंढक उनके घरों में और अपने बिछौने पर छा गए थे। मिस्रवासी जानते थे कि यह कैसा होगा। मूसा, जब उसने अपना संदेश दिया, तो पहले की तुलना में किसी सर्वोत्तम उत्तर की आशा नहीं करते हुए, बस वहाँ से चला जाता है।


यीशु ने अपने चेलों को उन लोगों से अलग होने का भी निर्देश दिया, जो उन्हें स्वीकार नहीं करेंगे, और उनके विरुद्ध गवाही देने के लिए अपने पैरों की धूल झाड़ दें। 1 शमूएल 15:27 यह भी बताता है कि शमूएल ने शाऊल को छोड़ दिया था, "तब शमूएल जाने के लिये घूमा, और शाऊल ने उसके बागे की छोर को पकड़ा, और वह फट गया।" मसीही अगुवों के लिए फ़िरौन और मूसा के बीच प्रतिस्पर्धा के इस हिस्से से एक संभावित सबक यह मिलता है कि हमें यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि क्या यह मूसा की तरह मुड़ने और जाने का समय है। हमारे विषय में कहें, तो हमें कहीं और प्रतिक्रियाशील लोग मिल सकते हैं, इसलिए हमें उन लोगों पर अपना समय नष्ट नहीं करना चाहिए, जो प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए दृढ़ नहीं हैं।


फ़िरौन के बुद्धिमान परिचारक, उसके राज्य मंत्री, या निजी सलाहकार, हस्तक्षेप करते हैं, ताकि उसे मूसा के साथ कुछ शर्तों पर समझौता करने लिए मना लिया जाए। उनका कर्तव्य था कि वे फ़िरौन को राज्य की दयनीय स्थिति के विषय में प्रतिनिधित्व करें कि मिस्र नष्ट हो गया है, और उसे हर तरह से अपने कैदियों को छोड़ने की सलाह दें। उन्हें जाने दे, क्योंकि मूसा, उन्होंने पाया है कि वह उनके लिए एक फंदा रहेगा, जब तक कि उन्हें छोड़ा नहीं जाता, और अंत में मजबूर होने की तुलना में पहले सहमति देना बहुत ज्यादा सर्वोत्तम रहती है। इस्राएली मिस्रवासियों के लिए एक बोझिल पत्थर बन गए थे, और अब, अंत में, मिस्र का राजा अंततः उनसे छुटकारा पाने के लिए तैयार थे। यह खेदजनक है कि एक पूरा राष्ट्र अपने अगुवा के घमण्ड और हठ के कारण नाश हो जाएगा। किसी भी राष्ट्रीय अगुवे को प्राथमिक व्यवस्था के रूप में लोगों के कल्याण के लिए परामर्श करना चाहिए। फ़िरौन ने ऐसा नहीं किया।

फ़िरौन मूसा के साथ एक समझौता करने की कोशिश करता है। फ़िरौन ने इस्राएलियों को बलिदान करने के लिए जंगल में जाने के लिए सहमति दी; परन्तु विवाद में विषय यह था कि किसे जाने दिया जाए। मूसा जोर देकर कहता है कि उन्हें उनके पूरे परिवार और उनसे सभी संबंधित लोगों और पशुओं को अपने साथ ले जाना होगा। यहाँ एक शीघ्रता के साथ दिया गया सबक है कि जो लोग परमेश्‍वर की सेवा करते हैं, उन्हें अपने पास जो कुछ भी है, उनके साथ उसकी सेवा करनी चाहिए। मूसा विनती करता है, "हम तो बेटों–बेटियों, भेड़–बकरियों, गाय–बैलों समेत वरन् बच्‍चों से बूढ़ों तक सब के सब जाएँगे, क्योंकि हमें यहोवा के लिये पर्व करना है" (वचन 9)। फ़िरौन किसी भी तरह से यह अनुमति नहीं देगाः वह केवल लोगों को यह मानते हुए जाने देगा कि वह बस इतना ही चाहता था। इस विषय का उल्लेख अभी तक किसी भी पहले किए गए वार्तालाप में नहीं मिलता है। जहाँ तक छोटे बच्चों की बात है, फ़िरौन ने उन्हें बंधक बनाने का संकल्प लिया, ताकि उन सभी को वापस लौटने के लिए मजबूर किया जा सके। एक जुनून में भरकर वह धमकी देता है कि यदि वे अपनी सन्तान को भी लेने पर जोर देते हैं, तो वे अपने जोखिम पर ऐसा करेंगे। यहाँ एक और शीघ्रता के साथ दिया गया सबक मिलता है। शैतान उन लोगों को जो स्वयं परमेश्‍वर की सेवा करते हैं, उनकी सन्तान को भी उसकी सेवा में लाने से रोकने के लिए वह सब कुछ करता है, जिसे वह कर सकता है। वह बच्चों के प्रति ईश्‍वर-भक्ति के प्रशिक्षण का कट्टर शत्रु यह जानते हुए है कि यह उसके राज्य के हितों के लिए कितना विनाशकारी है। जो कुछ भी हमें अपने सन्तान को परमेश्‍वर की सेवा में अधिकतम शामिल करने से रोकता है, हमारे पास सन्देह करने का हर वह कारण है कि इसमें शैतान का हाथ है।


मूसा और फ़िरौन के बीच एक समझौते का प्रयास अचानक बंद हो जाता है; जो पहले वचन 6 में फ़िरौन की उपस्थिति से बाहर चले गए थे, उन्हें अब जबरदस्ती बाहर निकाल दिया जाता है। फ़िरौन उन लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, जो जल्दी से उनके न्याय को सुनेंगे, क्योंकि वे अपने कर्तव्य का पालन नहीं कर सकते हैं। परमेश्‍वर शायद उन लोगों को उनके स्वयं-के-घमण्ड के हवाले कर दे, जिन्हें वह नष्ट करना चाहता है। कुछ ही लोग उतने घमण्डी और हठी होते हैं, जितना कि यह व्यक्ति अपने ही विनाश के लिए था।


तो जो होना ही था, वही होता है, अर्थात् टिड्डियों द्वारा भूमि पर आक्रमण - परमेश्‍वर की बड़ी सेना टिड्डियों की सेना के समान है, जिसके बारे में योएल भी बोलता है। परमेश्‍वर ने मूसा को टिड्डियों को लाने के लिए अपना हाथ बढ़ाने के लिए कहा और उसने अपनी लाठी बढ़ाई। एक पूर्वी हवा की सहायता से टिड्डियाँ बुलाहट का पालन करती हैं, पूर्वी हवा के पंखों पर उड़ती हैं, "टिड्डियाँ आईं, टिड्डियाँ बिना गिनती के थीं" (भजन संहिता 105:15)। घोड़ों और पैदल सैनिकों की एक दुर्जेय सेना का कीड़ों के इस मेजबान की तुलना में अधिक आसानी से विरोध किया जा सकता था। तो फिर महान परमेश्‍वर के सामने कौन खड़ा हो सकता है?


वचन 15वें में विनाश का वर्णन किया गया है, "वे तो सारी धरती पर छा गईं, यहाँ तक कि देश में अन्धकार छा गया; और उसका सारा अन्न आदि और वृक्षों के सब फल, अर्थात्, जो कुछ ओलों से बचा था, सब को उन्होंने चट कर लिया; यहाँ तक कि मिस्र देश भर में न तो किसी वृक्ष पर कुछ हरियाली रह गई और न खेत में अनाज रह गया।" परमेश्‍वर ने पृथ्वी को मनुष्यों की सन्तान को दिया है; फिर भी, जब परमेश्‍वर चाहें, तब वह उनके अधिकार को बाधित कर सकता है और उन्हें बाहर निकालने के लिए टिड्डियों और कीड़ों को भेज सकते हैं। जड़ी-बूटियाँ मनुष्य की सेवा के लिए उगती हैं; फिर भी, जब परमेश्‍वर चाहे, तो घृणित कीड़े न केवल मनुष्य के साथ वनस्पति को खाएँगे, बल्कि उसे लूट लेंगे, और उसके मुँह से रोटी छीन लेंगे। यदि हम परमेश्‍वर का पालन नहीं करते हैं, तो परमेश्‍वर नष्ट कर सकता हैं और हम विनाश के लिए छोड़ दिए जाते हैं।

फ़िरौन एक छूट देता है। उसने मूसा और हारून को अपने यहाँ से खदेड़ दिया था, शायद उन्हें यह कहते हुए कि उसे अब उनसे कोई लेना-देना नहीं है। परन्तु अब वह उन्हें फिर से बुलाता है कि, वे उतना ही सम्मान दिखाते हुए जल्दी से आएँ, जितना पहले उसने उन्हें तिरस्कार के साथ खारिज कर दिया था। फ़िरौन फिर अपनी गलती स्वीकार करता है। फिरोन ने मूसा और हारून को बुलाकर कहा, "मैं ने तो तुम्हारे परमेश्‍वर यहोवा का और तुम्हारा भी अपराध किया है" (वचन 16)। अब वह परमेश्‍वर और उसके राजदूतों को दिए गए अपमान और तिरस्कार में अपनी मूर्खता देखता है, और अंत में, इसके लिए पश्‍चाताप करता है। जब परमेश्‍वर मनुष्यों को पाप के बारे में विश्‍वास के लिए कायल करता है, और इसके लिए उन्हें विनम्र करता है, तो परमेश्‍वर के सेवकों के प्रति उनका तिरस्कार, और उनके मुँह में प्रभु का वचन, निश्‍चित रूप से उन्हें खत्म करने के लिए वापस आ जाएगा, और उनके विवेक पर भारी पड़ेगा। जब फ़िरौन ने कहा, "तुम्हारा परमेश्‍वर यहोवा” तो शायद उसका मतलब था, "यहोवा मेरा परमेश्‍वर नहीं होगा।" सच्चे पश्चात्तापी अपने पापों पर पश्चाताप करते हैं, क्योंकि वे परमेश्‍वर के विरुद्ध किए गए होते हैं, यहाँ तक कि अपने स्वयं के परमेश्‍वर के विरुद्ध भी, जिनके प्रति वे कर्तव्यबद्ध हैं। फ़िरौन क्षमा माँगता है, परमेश्‍वर से नहीं, जैसा कि ईमानदार पश्‍चाताप करने वाले करते हैं, बल्कि मूसा से, जो केवल उसके जैसा व्यक्ति है। नकली पश्‍चाताप सामान्य रूप से पर लोगों को सामान्य प्रतिज्ञाओं के साथ धोखा देता है और विशेष पापों के विरुद्ध सहमत होने के लिए तैयार नहीं होने देता है। फ़िरौन मूसा और हारून से उसके लिए प्रार्थना करने की विनती करता है। ऐसे लोग हैं, जो संकट में, अन्य लोगों की प्रार्थनाओं की सहायता का अनुरोध करते हैं, परन्तु स्वयं प्रार्थना करने का मन नहीं रखते हैं। वे दिखाते हैं कि उन्हें परमेश्‍वर के प्रति कोई सच्चा प्रेम नहीं है, और न ही उसके साथ जुड़ने में उन्हें कोई हर्ष है। फ़िरौन उनकी प्रार्थना चाहता है, इसलिए कि केवल उसे इस मृत्यु से दूर किया जाए, न कि पाप के लिए। वह टिड्डियों की महामारी को नापसन्द करता है, परन्तु उसके अपने कठोर हृदय ने इब्रियों पर वर्षों से कड़ी परिश्रम की महामारी का क्या?


एक बार फिर जब मूसा प्रार्थना करता है, तो विपत्ति दूर हो जाती है। वचन  18, 19 कहते हैं, "तब मूसा ने फ़िरौन के पास से निकल कर यहोवा से विनती की। तब यहोवा ने बहुत प्रचण्ड पश्‍चिमी हवा बहाकर टिड्डियों को उड़ाकर लाल समुद्र में डाल दिया, और मिस्र के किसी स्थान में एक भी टिड्डी न रह गई।" यदि हम आश्चर्यकर्म करने के लिए परमेश्‍वर की सामर्थ्य की सराहना करना चाहते हैं, तो यह न्याय के रूप में परमेश्‍वर की सामर्थ्य का एक सबसे अच्छा उदाहरण था। एक पूर्वी हवा टिड्डियों को ले आई, और अब एक पश्‍चिमी हवा उन्हें वापस ले गई। दिशा के जिस भी बिंदु पर हवा है, वह परमेश्‍वर के वचन को पूरा कर रहा है, और यह उसकी मनसा के अनुसार मुड़ती है। यूहन्ना 3:8 यीशु ने निकोदेमुस से कहा, "हवा जिधर चाहती है उधर चलती है और तू उसका शब्द सुनता है, परन्तु नहीं जानता कि वह कहाँ से आती और किधर को जाती है? जो कोई आत्मा से जन्मा है वह ऐसा ही है।" परमेश्‍वर पूरे आकाश के नीचे की हवा को निर्देशित करता है। यह दण्ड उसके बुलावे की आज्ञा का पालने करने पर आया था, और इसका हटा जाना उससे की गई प्रार्थनाओं का उत्तर था। लोगों ने मूसा को गलत समझा था। मूसा ने कभी भी उस दु:खद दिन की कामना नहीं की, हालाँकि उसने उसकी धमकी दी थी। उसकी आज्ञा वास्तव में मिस्र के विरुद्ध थी, परन्तु उसकी मध्यस्थता इसके लिए भी थी, जो एक अच्छा कारण था कि उन्हें उससे प्रेम करना चाहिए, हालाँकि वे उससे डरते थे। यह उनके पश्‍चाताप के लिए भी उतना ही मजबूत तर्क था, जितना कि स्वयं न्याय; क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि परमेश्‍वर क्षमा करने के लिए तैयार हैं, और दया दिखाने के लिए शीघ्रता के साथ आता है। ओह, परमेश्‍वर की यह भलाई हमें पश्‍चाताप की ओर ले जाए!


इसलिए इस विपत्ति में स्पष्ट विनाश के साथ भी हम फिर से फ़िरौन के अपने अधर्मी संकल्प की ओर लौटते हुए देखते हैं कि लोगों को जाने नहीं दिया जाएगा। जैसा कि वचन 20 में लिखा है, "तौभी यहोवा ने फ़िरौन के मन को कठोर कर दिया, जिस से उसने इस्राएलियों को जाने न दिया।" यह उस पर परमेश्‍वर के धर्मी हाथ के माध्यम से हुआ, जिससे उसका मन कठोर हो गया, और उसकी हठ में पुष्टि हुई। हम में कौन-सा तत्व निर्णय, भावनाएँ या तर्क-वितर्क करता है? अपने अधिकार के लिए फ़िरौन का प्रेम, दासों के काम से आर्थिक लाभ, उसकी पदवी की प्रतिष्ठा पूरी तरह से तर्क के विरुद्ध गई। विपत्ति सब कुछ नष्ट कर रही थी, जो उसके अधिकार, दास और पदवी के द्वारा उसे मिलना चाहिए था। इसका कोई मतलब नहीं है। फ़िरौन का कोई मतलब नहीं था। पाप का कोई अर्थ नहीं है। यदि हम वही करना चाहते हैं, जो हमारे लिए अच्छा है, तो हम परमेश्‍वर को परमेश्‍वर बनने देते हैं। आज्ञाकारिता हमारे लिए अच्छी है! यह आत्म-सुधार के लिए अच्छी है! हमारे लिए अन्य मार्ग बुरा हैं! वे आत्म-विनाश की ओर ले जाते हैं!