भाईयों में झगड़ा
अध्याय छब्बीस
उत्पत्ति 25:22-34

Ron Meyers
22लड़के उसके गर्भ में आपस में लिपटके एक दूसरे को मारने लगे। तब उसने कहा, “मेरी जो ऐसी ही दशा रहेगी तो मैं कैसे जीवित रहूँगी?” और वह यहोवा की इच्छा पूछने को गई।
23तब यहोवा ने उससे कहा, “तेरे गर्भ में दो जातियाँ हैं, और तेरी कोख से निकलते ही दो राज्य के लोग अलग अलग होंगे, और एक राज्य के लोग दूसरे से अधिक सामर्थी होंगे, और बड़ा बेटा छोटे के अधीन होगा।” 24जब उसके प्रसव का समय आया, तब क्या प्रगट हुआ कि उसके गर्भ में जुड़वे बालक हैं। 25पहला जो उत्पन्न हुआ वह लाल निकला, और उसका सारा शरीर कम्बल के समान रोममय था; इसलिये उसका नाम एसाव रखा गया। 26पीछे उसका भाई अपने हाथ से एसाव की एड़ी पकड़े हुए उत्पन्न हुआ; और उसका नाम याक़ूब रखा गया। जब रिबका ने उनको जन्म दिया तब इसहाक साठ वर्ष का था। 27फिर वे लड़के बढ़ने लगे, और एसाव तो वनवासी होकर चतुर शिकार खेलनेवाला हो गया, पर याक़ूब सीधा मनुष्य था और तम्बुओं में रहा करता था। 28इसहाक एसाव के अहेर का मांस खाया करता था, इसलिये वह उससे प्रीति रखता था; पर रिबका याक़ूब से प्रीति रखती थी। 29एक दिन याक़ूब भोजन के लिये कुछ दाल पका रहा था; और एसाव जंगल से थका हुआ आया। 30तब एसाव ने याक़ूब से कहा, “वह जो लाल वस्तु है, उसी लाल वस्तु में से मुझे कुछ खिला, क्योंकि मैं थका हूँ।” इसी कारण उसका नाम एदोम् भी पड़ा। 31याक़ूब ने कहा, “अपना पहिलौठे का अधिकार आज मेरे हाथ बेच दे।” 32एसाव ने कहा, “देख, मैं तो अभी मरने पर हूँ : इसलिये पहिलौठे के अधिकार से मेरा क्या लाभ होगा?” 33याक़ूब ने कहा, “मुझ से अभी शपथ खा,” अत: उसने उससे शपथ खाई, और अपना पहिलौठे का अधिकार याक़ूब के हाथ बेच डाला। 34इस पर याक़ूब ने एसाव को रोटी और पकाई हुई मसूर की दाल दी; और उसने खाया–पिया, और उठकर चला गया। यों एसाव ने अपना पहिलौठे का अधिकार तुच्छ जाना।
जुड़वाँ भाइयों के जन्म से पहले उनके विषय में भविष्यद्वाणी की गई थी, और उनसे पहले की गई भविष्यद्वाणियों में बड़े रहस्यों को छिपा दिया गया था। वचन 22 और 23 में कहा गया है, “लड़के उसके गर्भ में आपस में लिपटके एक दूसरे को मारने लगे। तब उसने कहा, “मेरी जो ऐसी ही दशा रहेगी तो मैं कैसे जीवित रहूँगी?” और वह यहोवा की इच्छा पूछने को गई। तब यहोवा ने उससे कहा, “तेरे गर्भ में दो जातियाँ हैं, और तेरी कोख से निकलते ही दो राज्य के लोग अलग अलग होंगे, और एक राज्य के लोग दूसरे से अधिक सामर्थी होंगे, और बड़ा बेटा छोटे के अधीन होगा।”” लंबे समय से, बीस वर्ष से कुछ ही समय पहले, इसहाक ने एक बेटे के लिए प्रार्थना की थी; और अब उसकी पत्नी के पास एक सन्तान - नहीं! वरन् वह दो सन्तान के साथ है! दो! शायद यह उसके लंबे प्रतीक्षा की भरपाई के लिए था। परमेश्वर अक्सर हमारी प्रार्थनाओं से आगे निकल जाता है, और हम जितना माँग सकते हैं या सोच सकते हैं, उससे कहीं अधिक देता है। अब रिबका के गर्भवती होने की एक अनोखी समस्या है। वे पहले से ही आपस में लड़ रहे हैं!
वह इस बारे में अपने मन में उलझन में थी। "लड़के उसके गर्भ में आपस में लिपटके एक दूसरे को मारने लगे" (वचन 23)। उस जो परेशानी महसूस हुई, वह पूरी तरह से असाधारण थी। वह पहले कभी गर्भवती नहीं हुई थी, परन्तु उसे सन्देह था कि यह कुछ असामान्य सी बात थी। वह बहुत ज्यादा परेशान थी। क्या वह आशंकित थी कि जन्म देते समय उसकी मृत्यु होगी, या क्या वह तीव्र उथल-पुथल से थक गई थी, या क्या उसे सन्देह था कि यह एक बुरा संकेत है, हम नहीं जानते। ऐसा लगता है कि वह यह कामना करने के लिए तैयार थी कि या तो वह गर्भवती न हो या वह तुरन्त मर जाए, और ऐसे आपस में लड़ती हुई सन्तानों को जन्म न दे।
पहले सन्तान के लिए लंबी अवधि की तीव्र इच्छा उसकी परेशानी थी, अब उसके भीतर की सन्तान का संघर्ष भी कम नहीं हो रहा था। जिन आरामों की हम सबसे अधिक इच्छा रखते हैं, वे कभी-कभी अपने साथ नई परेशानियाँ और बेचैनी लाते हैं, जिनके बारे में हमने कभी नहीं सोचा था, सूर्य के नीचे हर एक स्थान व्यर्थ ही विद्यमान है। हम अपने विश्राम से असंतुष्ट होने के लिए तैयार हैं, क्योंकि उसमें बेचैनी होती है। हम नहीं जानते कि हम कब प्रसन्न होते हैं, हम न तो जानते हैं कि कैसे आवश्यकता में रहना है और न ही कैसे बहुतायत में रहना होता।
गर्भ में याक़ूब और एसाव के बीच यह संघर्ष परमेश्वर के राज्य और शैतान के राज्य के बीच संघर्ष का प्रतिनिधित्व करता है। उत्पत्ति 3:15 में लिखित है कि स्त्री के वंश और सर्प के वंश के बीच जब से शत्रुता की उत्पत्ति हुई है, तब से वे आपस में झगड़ते रहे हैं, "और मैं तेरे और इस स्त्री के बीच में, और तेरे वंश और इसके वंश के बीच में बैर उत्पन्न करूँगा; वह तेरे सिर को कुचल डालेगा, और तू उसकी एड़ी को डसेगा।" इस शत्रुता ने मनुष्यों के बीच कई विभाजन और युद्धों को जन्म दिया है। हमें विवाद को अपने लिए अपमानजनक नहीं होने देना चाहिए। शैतान के महल में शांति से रहने से अच्छा पवित्र युद्ध सर्वोतम है। गलातियों 5:17 में लिखा है, "क्योंकि शरीर आत्मा के विरोध में और आत्मा शरीर के विरोध में लालसा करता है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं, इसलिये कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ।" वे एक-दूसरे के साथ संघर्ष में हैं, ताकि आप जो चाहें वह न करें। बुराई की धारा या ज्वार एक शक्तिशाली संघर्ष के बिना नहीं घूमता है, जिसे अभी भी हमें हतोत्साहित नहीं करना चाहिए। पाप के अधीन होने के बजाय उसके साथ संघर्ष करना सर्वोतम है।
उसने इस समस्या के बारे में क्या किया? "और वह यहोवा की इच्छा पूछने को गई" (22)। वचन और प्रार्थना, जिसके द्वारा हम सभी अभी भी परमेश्वर से पूछ सकते हैं, किसी भी व्यक्ति को बहुत अधिक राहत देता है, जो किसी भी कारण से उलझन में है। परमेश्वर के सामने अपना विषय को रख देना और उससे सलाह लेना मन के लिए एक बड़ी राहत होती है। उसने यहाँ जो किया, वह उसकी आत्मिक स्थिति का दूसरा संकेत है, पहला यह समझने की क्षमता है कि परमेश्वर चाहता था कि वह पद्दनराम को छोड़कर अब्राहम के सेवक के साथ कनान आए।
रिबका को दी गई जानकारी ने रहस्य को समझाया, "तेरे गर्भ में दो जातियाँ हैं, और तेरी कोख से निकलते ही दो राज्य के लोग अलग अलग होंगे, और एक राज्य के लोग दूसरे से अधिक सामर्थी होंगे, और बड़ा बेटा छोटे के अधीन होगा" (वचन 23)। वह गर्भवती थी, न केवल दो सन्तानों के साथ, बल्कि दो राष्ट्रों के साथ, जो न केवल अपने शिष्टाचार और स्वभाव में एक-दूसरे से भिन्न होंगे, बल्कि अपने हितों में एक-दूसरे के साथ संघर्ष और झगड़े करेंगे। प्रतिस्पर्धा के मुद्दे का एक हिस्सा यह होगा कि बड़े को छोटे की सेवा करनी होगी। यह एदोम की अधीनता में पूरा किया गया, कई युगों के लिए, दाऊद के घराने के आने तक, जब तक वे कई वर्षों के बाद विद्रोह, "उसके दिनों में एदोम ने यहूदा की अधीनता छोड़कर अपने ऊपर एक राजा बना लिया" (2 इतिहास 21:8)। परमेश्वर अपनी कृपा प्रदान करने में एक स्वतंत्र प्रतिनिधि है; यह उसका विशेषाधिकार है कि वह उन लोगों के बीच अंतर करे, जिन्होंने अभी तक स्वयं अच्छा या बुरा नहीं किया है। रोमियों 9:12 में कहा गया है, "... उसने कहा, “जेठा छोटे का दास होगा।" परमेश्वर चुनता है और हम भी ऐसा ही करते हैं, जब हम अपने अनुकूल विकल्प के साथ प्रतिक्रिया करते व्यक्त करते हैं। आत्मा में अनुग्रह और भ्रष्टाचार के बीच के संघर्ष में, अनुग्रह, निश्चित रूप से अंत में ऊपरी हाथ अर्थात् जय को प्राप्त करेगा।
उनके शरीर में बहुत बड़ा अंतर था। एसाव, जब वह पैदा हुआ था, तो वह रुखा और बालों वाला था, और "एसाव" का अर्थ "बालों वाला" ही होता है। यह एक मजबूत सुडौल शरीर का संकेत हो सकता है, और यह आशा करने का कारण बना कि वह मजबूत, साहसी और सक्रिय होगा। याक़ूब एक अन्य प्रकार की सन्तान के रूप में कोमल और मुलायम था। परन्तु आत्मिक मतभेद अधिक महत्वपूर्ण विषय थे। पुरुषों की क्षमताओं में अंतर, और परिणामस्वरूप संसार में उनकी स्थिति, उनके प्राकृतिक सुडौल शरीर के अंतर से बहुत अधिक होती है; कुछ स्पष्ट रूप से प्रकृति द्वारा गतिविधि और सम्मान के लिए ठहराए जाते हैं, अन्य स्पष्ट रूप से अस्पष्टता के लिए चिह्नित होते हैं। ईश्वरीय प्रभुता का यह उदाहरण शायद हमें ईश्वरीय प्रभुता और कृपा के सिद्धांतों को समझने में सहायता कर सकता है। परमेश्वर अक्सर कमजोर चीजों को चुनता है और शक्तिशाली लोगों से नीचा दिखा देता है: "हे भाइयो, अपने बुलाए जाने को तो सोचो कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए। 27परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है कि ज्ञानवानों को लज्जित करे" (1 कुरिन्थियों 1:26 एवं 27)।
एसाव, जो जितना मजबूत था, पहले बाहर आया; परन्तु याक़ूब के हाथ ने एसाव की एड़ी को पकड़ लिया, जो याक़ूब के जन्मसिद्ध अधिकार और आशीर्वाद की खोज का संकेत देता है; पहले से ही, वह इसे पकड़ते हुए बाहर आया, और यदि संभव हो, तो अपने भाई को जेठा होने से रोकने के लिए। दोनों भाई अपने मन के स्वभाव और अपने द्वारा चुनी गई जीवन शैली में बहुत समान नहीं थे। उत्पत्ति 25:27 कहता है, "फिर वे लड़के बढ़ने लगे, और एसाव तो वनवासी होकर चतुर शिकार खेलनेवाला हो गया, पर याक़ूब सीधा मनुष्य था और तम्बुओं में रहा करता था।" वे जल्द ही बहुत अलग स्वभाव के दिखाई दिए। एसाव इस संसार के अनुसार जीवन जीने वाला एक व्यक्ति था। वह अपने खेल में रुचि रखने वाला व्यक्ति था, अर्थात् एक शिकारी के रूप में, एक ऐसा व्यक्ति था, जो अपनी बुद्धि से यह मानते हुए जीना जानता था कि वह एक चालाक शिकारी था। वह निम्रोद और इश्माएल की तरह सभी खेल के लिए मैदान के रहने वाला एक व्यक्ति था, और बड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए आनन्दित नहीं था। याक़ूब दूसरे संसार के लिए बना हुआ एक व्यक्ति था, वह एक कुलीन व्यक्ति के लिए तैयार नहीं था, न ही वह बड़ा दिखना चाहता था, परन्तु वह तंबू में रहने से आनन्दित था। एक चरवाहे के रूप में वह भेड़ रखने के उस सुरक्षित और मौन कार्य से जुड़े हुआ था, जिसके लिए उसने अपनी सन्तान को भी प्रशिक्षित किया था। यह इसहाक का पुत्र था, जिस पर वाचा टिकी हुई थी।
इसहाक, हालाँकि स्वयं एक सुडौल शरीर वाला मजबूत व्यक्ति नहीं था (जब वह खेतों में जाता था, तो वह ध्यान लगाने और प्रार्थना करने जाता था, शिकार करने के लिए नहीं) फिर भी वह अपने बेटे को विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेने की इच्छा रखने के लिए सक्रिय रखना पसन्द करता था। एसाव जानता था कि उसे कैसे आनन्दित किया जा सकता था, और इस लिए उनके उसके प्रति बहुत ज्यादा सम्मान उसके लिए अक्सर हिरण का शिकार करके भोजन बनाने में दिखाया, जिससे उसने स्वयं के लिए एक भले बुजुर्ग व्यक्ति से स्नेह प्राप्त किया, और स्वयं को उसके विचारों से अधिक जीता। हालाँकि, रिबका को इस बात का ध्यान था कि परमेश्वर ने दो बेटों के बारे में जो कहा था, उसमें याक़ूब को प्राथमिकता दी जानी थी, इसलिए उसने अपने प्रेम में उसे प्राथमिकता दी। किसी भी माता-पिता को यह सलाह नहीं दी जाती है कि वे एक सन्तान को दूसरे(रों) के विरुद्ध प्राथमिकता दें, फिर भी हम इस संभावना की सराहना कर सकते हैं कि रिबका आंशिक रूप से सही थी, क्योंकि वह उस व्यक्ति से प्रेम करती थी, जिसे परमेश्वर प्रेम करता था।
इसके बाद हम पहिलौठे का अधिकार के बारे में याक़ूब और एसाव के बीच किए गए सौदे पर विचार करेंगे, जो जन्म क्रम के अनुसार एसाव की था, परन्तु प्रतिज्ञा से याक़ूब का था। इसमें परमेश्वर का आशीर्वाद और एक विशेष प्रतिज्ञा शामिल थी, जिसे याक़ूब ने महत्व दिया, उससे माँगा और इसे खरीद लिया। यह घमण्ड या महत्वाकांक्षा के कारण नहीं था कि वह पहिलौठे अधिकार का इतना अधिक लोभ करता था, जितना कि आत्मिक आशीर्वादों की दृष्टि से देखा जाए, जिनसे वह अपने तंबू में अच्छी तरह से परिचित हो गया था, जबकि एसाव ने खेतों में शिकार करते रहने के द्वारा उनकी सुगंध खो दी थी। इसके लिए याक़ूब की प्रशंसा की जानी चाहिए, कि वह सर्वोत्तम उपहारों की इच्छा रखता था। यह इस तथ्य के बावजूद है कि उसने इसे प्राप्त करने के लिए एक कठिन सौदेबाजी करने के लिए एसाव की आवश्यकता का लाभ उठाया। "अपना पहिलौठे का अधिकार आज मेरे हाथ बेच दे" (वचन 31)। स्पष्ट है कि इस बारे में उनके बीच पहले कुछ बातचीत हुई थी और एसाव के लिए यह इतना बड़ा आश्चर्य नहीं था, जितना कि यहाँ यह पीछे रहने वालों को लगता है। संभवतः एसाव ने पहिलौठे के अधिकार और उसके जुड़े अधिकारों के बारे में थोड़ी बहुत बात की थी, जिसने याक़ूब को यह प्रस्ताव देने के लिए प्रोत्साहित किया। यदि ऐसा है, तो याक़ूब ने उस अधिकार को हासिल करने के लिए जो किया, वह कुछ हद तक क्षमा करने योग्य है। लोग वास्तव में बुद्धिमान होते हैं, जो दूसरी संसार के लिए बुद्धिमान होते हैं। याक़ूब का ज्ञान दो चीजों में प्रकट हुआः उसने सबसे उपयुक्त समय चुना, जब उसने स्वयं को अधिकार के लिए प्रस्तुत किया, तो उसने अवसर का लाभ उठाया और इसे अपने हाथ से जाने नहीं दिया। और, सौदा करने के बाद, उसने इसे सुनिश्चित किया, और एसाव की शपथ से इसकी पुष्टि हुई, "पहले मुझ से अभी शपथ खा, अत: उसने उससे शपथ खाई, और अपना पहिलौठे का अधिकार याक़ूब के हाथ बेच डाला" (वचन 33)। इसलिए उसने शपथ खाकर अपने पहिलौठे का अधिकार याक़ूब को बेच डाला। उसने एसाव के मन में चल रहे विचारों का लाभ उठाया, और उसे अपना मन बदलने का कोई मौका नहीं दिया। प्रमुख महत्व रखने वाली घटनाओं में यह सुनिश्चित करना अच्छा है।
एसाव के पहिलौठे के अधिकार की अपवित्र अवमानना और मूर्खतापूर्ण रीति से बेच दिया जाना, जो उसने किया था, इब्रानियों 12:16 में संदर्भित है, "ऐसा न हो कि कोई जन व्यभिचारी, या एसाव के समान अधर्मी हो जिसने एक बार के भोजन के बदले अपने पहिलौठे होने का पद बेच डाला।" मसूर की दाल का कटोरा उतना ही प्रिय था, जितना कि निषिद्ध फल से खाया जाना; और जब इसे खो देने बहुत देर हो गई, तो एसाव को इसका पछतावा हुआ। ऐसा मूर्खता भरा सौदा कभी एसाव ने किसी के साथ नहीं किया था; और फिर भी उसने सोचा कि उसकी नीतियाँ सही थीं, संभवतः इसने स्वयं को एक चालाक व्यक्ति के रूप में प्रतिष्ठा देखा था, और शायद अपने भाई याक़ूब को एक कमजोर और सरल व्यक्ति के रूप में बदनाम किया था। ऐसे लोग होते हैं, जो पैसे-बुद्धिमानी और महा कंजूस, चालाक शिकारी होते हैं, जो दूसरों को पछाड़ सकते हैं और उन्हें अपने जाल में फंसा सकते हैं, और फिर भी स्वयं को शैतान की चालों द्वारा जकड़ा हुआ पाते हैं और उसकी इच्छा पर उसके द्वारा बंदी बना लिए जाते हैं। वे छोटी-छोटी लड़ाइयाँ जीतते हैं, परन्तु पूरा का पूरा बड़ा युद्ध हार जाते हैं। एक बार फिर से कहना, परमेश्वर अक्सर संसार की मूर्खतापूर्ण चीजों को चुनता है और उनके द्वारा बुद्धिमानों को भ्रमित करता है। सरल सा याक़ूब चालाक एसाव को मूर्ख बना देता है।
भोजन के लिए एसाव की भूख बहुत अधिक थी। तम्बूवासी याक़ूब ने अपने रात के खाने के लिए कुछ रोटी और पकाई हुई मसूर की दाल तैयार की थी, और जब एसाव शिकार से आया, तो वह बिना हिरण के संतुष्ट था, वह भूखा और थका हुआ था, और उसने कुछ भी नहीं पकड़ा था। और अब याक़ूब के मसूर की दाल ने उसकी आँख को पहले से कहीं ज्यादा आनन्दित कर दिया। वह कहता है, "वह जो लाल वस्तु है, उसी लाल वस्तु में से मुझे कुछ खिला, क्योंकि मैं थका हूँ" (वचन 30)। और उसके बाद वह और उसके वंशज एदोमी-लाल रंग वाले कहे जाने लगे। मूर्ख एसाव इतना कमजोर था कि उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं था, और न ही उसके पास उसकी सहायता करने के लिए एक सेवक था, परन्तु वह अपने भाई से उसे खिलाने के लिए विनती करता है। शोर-शराबे से शिकार करने वालों की तुलना में जो शांति से काम करते हैं, उन्हें अधिक, निरंतर और विश्राम के साथ प्रदान किया जाता हैः रोटी सदैव बुद्धिमानों के लिए नहीं होती है, परन्तु जो प्रभु परमेश्वर पर भरोसा करते हैं और भले काम करते हैं, उन्हें प्रतिदिन की रोटी से खिलाई जाएगी; एसाव के रूप में नहीं, जो कभी-कभी जेवनार और कभी-कभी भुखमरी में रहता था। कामुक भूख की संतुष्टि वह होती है, जो हजारों बहुमूल्य आत्माओं को नष्ट कर देती है। निश्चित रूप से, यदि एसाव भूखा और थका हुआ था, तो उसे अपने जन्म के अधिकार की कीमत चुकाने के बजाय सस्ता खाना मिल सकता था, जिसकी उसने सही कीमत नहीं लगाई थी।
उसका तर्क बहुत ज्यादा कमजोर था। एसाव ने कहा, "देख, मैं तो अभी मरने पर हूँ : इसलिये पहिलौठे के अधिकार से मेरा क्या लाभ होगा?" (वचन 32)। भले ही अगले अध्याय में से एक वचन में उल्लिखित देश में अकाल पहले से ही विद्यमान था, फिर भी यह विश्वास करना मुश्किल है कि इसहाक इतना ज्यादा निर्धन था, या रिबका की इतनी ज्यादा खराब गृहस्थी थी, परन्तु हो सकता है कि उसे पर्याप्त भोजन के साथ अन्य तरीकों से आपूर्ति की गई हो और हो सकता है कि उसने अपने पहिलौठे के अधिकार को बचाया होः परन्तु उसकी भूख पर उसका प्रभुत्व था; वह एक लालसा की स्थिति में था, उसे कुछ भी उसे आनन्दित नहीं करेगा, परन्तु लाल रंग की इस लाल वस्तु को, और, अपनी कथित भूख को संतुष्ट करने के लिए, वह लालसा करता है कि वह मरने की स्थिति में है। भले ही वह वास्तव में भुखमरी से मरने के निकट था, तथापि क्या उसके लिए अपमान में जीने की तुलना में सम्मान में मरना सर्वोतम नहीं होता; एक अभिशाप के अधीन जीने की तुलना में एक आशीर्वाद के अधीन मरना? पहिलौठे का अधिकार आज हमारे आत्मिक विशेषाधिकारों, पहिलौठों की कलीसिया के विशेषाधिकारों का प्रतीक था। एसाव को अब आजमाया जा चुका था कि वह इसे कितना महत्व देगा और उसने स्वयं को केवल वर्तमान असुविधा के बारे में समझदार दिखाया; वह अपने पहिलौठे के अधिकार की परवाह नहीं करता है। सर्वोतम सिद्धान्तवादी नाबोत की तुलना में पिछड़ गया, जो अपने दाख की बारी को बेचने के बजाय अपना जीवन खो देगा, क्योंकि पार्थिव कनान में उसके हिस्से ने स्वर्ग में अपनी भूमिका को दिखा दिया था, "यहोवा न करे कि मैं अपने पुरखाओं का निज भाग तुझे दूँ" (1 राजा 21:3)। आत्मिक स्वभाव में पहिलौठे का जन्मसिद्ध अधिकार होने के कारण, एसाव द्वारा इसका कम मूल्यांकन करना सबसे बड़ी मूर्खता वाली कल्पना की जा सकती थी। परमेश्वर, मसीह और स्वर्ग में हमारी रुचि से अलग होना मूर्खता है, क्योंकि इस संसार के धन, सम्मान और सुख उतने ही खराब सौदे हैं, जितना कि उसने दाल के स्वाद के लिए पहिलौठे का अधिकार बेचा था।
एसाव ने अपनी जीभ को स्वाद चखाया था, अपनी इच्छाओं को संतुष्ट किया था, अपने पास विद्यमान अच्छे भोजन के लिए स्वयं को बधाई दी, और फिर लापरवाही से उठ खड़ा हुआ और बिना किसी गंभीर प्रतिबिंब या उसके द्वारा किए गए बुरे सौदे के बारे में पछतावा किए बिना वह वहाँ से चला गया। एसाव अपने पहिलौठे के अधिकार का तिरस्कार करता है; उसने सौदे को निरस्त कराने के लिए किसी भी साधन का उपयोग नहीं किया, इसके बारे में अपने पिता से कोई आग्रह नहीं किया, और अपनी बाद में उपेक्षा और अवमानना से उसने अपनी विकृत संतुष्टि को स्वीकार किया। उसने जो किया था, उसमें स्वयं को सही ठहराते हुए, उसने सौदेबाजी को अतीत की एक याद में डाल दिया। इसे बदला नहीं जा सका। लोग नाश हो जाते हैं, जो गलत होते है, उसे करने से नहीं, बल्कि उसे करने और पश्चाताप न करने, उसे करने और उसके साथ खड़े रहने से। पश्चाताप एक वरदान है। हम बदल सकते हैं। एक मसीही अगुवा भी गलतियाँ करेगा, परन्तु एसाव के विपरीत, इसे पहचानने पर, वह बदल सकता है।