शांति के दूत
अध्याय अट्ठाईस
उत्पत्ति 26:18-33

Ron Meyers
18तब जो कुएँ उसके पिता अब्राहम के दिनों में खोदे गए थे, और अब्राहम के मरने के बाद पलिश्तियों ने भर दिए थे, उनको इसहाक ने फिर से खुदवाया; और उनके वे ही नाम रखे, जो उसके पिता ने रखे थे। 19फिर इसहाक के दासों को घाटी में खोदते–खोदते बहते जल का एक सोता मिला। 20तब गरार के चरवाहों ने इसहाक के चरवाहों से झगड़ा किया और कहा, “यह जल हमारा है।” इसलिये उसने उस कुएँ का नाम एसेक रखा; क्योंकि वे उससे झगड़े थे। 21फिर उन्होंने दूसरा कुआँ खोदा, और उन्होंने उसके लिये भी झगड़ा किया; इसलिये उसने उसका नाम सित्ना रखा। 22तब उसने वहाँ से निकल कर एक और कुआँ खुदवाया; और उसके लिये उन्होंने झगड़ा न किया; इसलिये उसने उसका नाम यह कहकर रहोबोत रखा, “अब तो यहोवा ने हमारे लिये बहुत स्थान दिया है, और हम इस देश में फूले–फलेंगे।” 23वहाँ से वह बेर्शेबा को गया। 24और उसी दिन यहोवा ने रात को उसे दर्शन देकर कहा, “मैं तेरे पिता अब्राहम का परमेश्वर हूँ; मत डर, क्योंकि मैं तेरे साथ हूँ, और अपने दास अब्राहम के कारण तुझे आशीष दूँगा, और तेरा वंश बढ़ाऊँगा।” 25तब उसने वहाँ एक वेदी बनाई, और यहोवा से प्रार्थना की, और अपना तम्बू वहीं खड़ा किया; और वहाँ इसहाक के दासों ने एक कुआँ खोदा। 26तब अबीमेलेक अपने मंत्री अहुज्जत और अपने सेनापति पीकोल को संग लेकर, गरार से उसके पास गया। 27इसहाक ने उनसे कहा, “तुम ने मुझ से बैर करके अपने बीच से निकाल दिया था, अब मेरे पास क्यों आए हो?” 28उन्होंने कहा, “हम ने तो प्रत्यक्ष देखा है कि यहोवा तेरे साथ रहता है; इसलिये हम ने सोचा कि तू तो यहोवा की ओर से धन्य है, अत: हमारे तेरे बीच में शपथ खाई जाए, और हम तुझ से इस विषय की वाचा बन्धाएँ, 29कि जैसे हम ने तुझे नहीं छुआ, वरन् तेरे साथ केवल भलाई ही की है, और तुझ को कुशल क्षेम से विदा किया, उसके अनुसार तू भी हम से कोई बुराई न करेगा।” 30तब उसने उनको भोज दिया और उन्होंने खाया–पिया। 31सबेरे उन सभों ने तड़के उठकर आपस में शपथ खाई; तब इसहाक ने उनको विदा किया, और वे कुशल क्षेम से उसके पास से चले गए। 32उसी दिन इसहाक के दासों ने आकर अपने उस खोदे हुए कुएँ का वृतान्त सुना के कहा, “हम को जल का एक सोता मिला है।” 33तब उसने उसका नाम शिबा रखा; इसी कारण उस नगर का नाम आज तक बेर्शेबा पड़ा है।
"तब जो कुएँ उसके पिता अब्राहम के दिनों में खोदे गए थे, और अब्राहम के मरने के बाद पलिश्तियों ने भर दिए थे, उनको इसहाक ने फिर से खुदवाया (वचन 18)। इसहाक धनी था, वह एक किसान और एक चरवाहे के रूप में सफल था, परन्तु वह एक परिश्रमी व्यक्ति भी था, इसलिए वह अपनी स्थिति में सुधार करता रहा। इस धटना में, कुएँ शामिल थे। वह उन्हें खोदता रहा। परिश्रमी होना हमारी प्रत्येक स्थिति के अनुसार अलग-अलग तरीकों से व्यक्त किया जाता है। इसहाक की धटना में, उसे कुओं की आवश्यकता थी। आपकी सेवकाई के स्थान पर आपको और अधिक सफलता प्राप्त करने के लिए क्या करना पड़ता है? इसहाक ने खेती करनी जारी रखी, और सिंचाई और अपने लोगों और पशुओं क झुंडों के लिए पानी के कुओं को खोजने के लिए परिश्रम करना जारी रखा। हालाँकि वह पहले से ही बहुत ज्यादा धनी हो चुका था, फिर भी वह अपने पशुओं के झुंडों की स्थिति के बारे में सदैव की तरह सावधान था, और फिर भी अपने झुंडों की देखभाल अच्छी तरह से करता था। जब पुरुष परिश्रमी होते हैं, तो उन्हें सावधान रहना चाहिए कि वे अपने व्यवसाय के लिए स्वयं को बहुत बड़ा और बहुत ऊँचा न समझें। हालाँकि वह अपनी सुविधाओं से प्रेरित था, और पहले की तरह आसानी से भूमि पर खेती नहीं कर सकते था, फिर भी वह जिस नए स्थान पर आए था, उसका सबसे अच्छा उपयोग करने के लिए स्वयं को तैयार किया और इसलिए यह हम सभी के लिए एक अच्छा उदाहरण है।
इसहाक ने उन कुओं को खोदा, जो उसके पिता ने खोदे थे। और अपने पिता के सम्मान में उन्हें उन्हीं नामों से बुलाता था, जो उसने उन्हें दिए थे। मसीही अगुवों और शिक्षकों की जिम्मेदारी का एक हिस्सा बाइबल सिखाना होता है। बाइबल को सर्वोतम ढंग से सिखाने के लिए हमें एक कुआँ खोदने की आवश्यकता हो सकती है। ऐसा करने के लिए आइए हम उसमें सत्य की खोज करें, उस जीवित जल के सोते की और पूर्व युगों की गई खोजों का अच्छा उपयोग करें। यदि आपको उपयोगी पठ्न सामग्री मिल सकती है, तो इसे अवश्य पढ़ें। पुराने तरीके, अर्थात् उन कुओं से पीनी पीएँ, जो हमारे पूर्वजों ने खोदे थे। हो सकता है कि सत्य के विरोधियों ने उन कुओं को बंद कर दिया हो। यदि आपके पास पुस्तकें नहीं हैं, तो पुराने मसीही अगुवों से संपर्क करें। उनसे मिलें और प्रश्न पूछें। उनसे सीख लें। और साथ ही हम दूसरे पहलू पर इसहाक के उदाहरण का अनुसरण कर सकते हैंः उसके सेवकों ने भी नए कुएँ खोदे। वचन 19 में कहा गया है, "फिर इसहाक के दासों को घाटी में खोदते–खोदते बहते जल का एक सोता मिला।" हालाँकि हमें पूर्व युगों के प्रकाश का उपयोग करना चाहिए, परन्तु इसका मतलब यह नहीं है कि हमें बस उन्हीं पर रुक जाना चाहिए और कोई प्रगति नहीं करनी चाहिए। हमें अभी भी उनकी नींव पर निर्माण करना होगा। इंटरनेट के इस युग में, बाइबल अध्ययन के लिए एक वेबसाइट खोजें। इसका उपयोग करना सीखें। मैं अक्सर biblegateway.com पर अध्ययन संसाधनों का उपयोग करता हूँ। biblegateway.com पर जाएँ और बाएँ कॉलम में "STUDY Tools" पर क्लिक करें। वहाँ कई संसाधन दिए गए हैं। जाएँ कुछ कुएँ खोदें और सर्वोतम उपदेशों का प्रचार करें और सर्वोतम सबक सिखाएँ।
अपने कुएँ खोदते समय इसहाक को बहुत ज्यादा विरोध का सामना करना पड़ा। "तब गरार के चरवाहों ने इसहाक के चरवाहों से झगड़ा किया और कहा, "यह जल हमारा है। इसलिये उसने उस कुएँ का नाम एसेक रखा; क्योंकि वे उससे झगड़े थे। फिर उन्होंने दूसरा कुआँ खोदा, और उन्होंने उसके लिये भी झगड़ा किया; इसलिये उसने उसका नाम सित्ना रखा।" जो लोग सत्य के सोते खोलते हैं, वे विरोध का अनुभव कर सकते हैं। उन्होंने जो पहले दो कुएँ खोदे थे, उन्हें "एसेक" और "सित्ना” अर्थात् "विवाद" और "घृणा" कहा जाता था। बाइबल अध्ययन एक अनुशासन है और यदि आप एक अच्छे अगुवा बनना चाहते हैं, तो आपको अध्ययन करना सीखना चाहिए। यदि आप एक कुआँ नहीं खोदेंगे, तो आपके पास पानी नहीं होगा। यदि आप बाइबल का अध्ययन नहीं करते हैं, तो आपके पास एक अच्छा उपदेश या बाइबल सबक नहीं होगा। इसके लिए संघर्ष करें। इसके लिए लड़ें। इसे खोदें!
इसहाक झगड़ालू व्यक्ति नहीं था। उसके पास एक शांत आत्मा थी। और फिर भी उसके चारों ओर विवाद था। यहाँ तक कि इस संसार के सबसे शांत और शांतिपूर्ण पुरुष जो दूसरों के साथ संघर्ष करने से बचते हैं, वे भी संघर्ष में रहने से बच नहीं सकते। भजन संहिता 120:7 कहता है, "मैं तो मेल चाहता हूँ; परन्तु मेरे बोलते ही, वे लड़ना चाहते हैं!" स्पष्ट रूप से यिर्मयाह के चारों ओर भी विवाद था जब वह उस सत्य के लिए खड़ा हुआ, जो परमेश्वर ने उसे उसकी पीढ़ी के लिए दिया था। यिर्मयाह 15:10 कहता है, "हे मेरी माता, मुझ पर हाय, कि तू ने मुझ जैसे मनुष्य को उत्पन्न किया जो संसार भर से झगड़ा और वादविवाद करनेवाला ठहरा है! न तो मैं ने ब्याज के लिये रुपये दिए, और न किसी से उधार लिए हैं, तौभी लोग मुझे कोसते हैं।" यीशु शांति का राजकुमार है, परन्तु उसने अपने विरोधियों के साथ संघर्ष किया, जो स्वयं को उसका विरोधी बनाते थे। परन्तु इससे पहले कि हम इस कुएँ से बाहर निकलें, आइए हम आनन्दित हों कि यीशु ने प्रतिज्ञा की है कि हमारे शरीर से जीवित जल की नदियाँ बहेंगी। वह हमारे भीतर एक कुआँ रखता है। यूहन्ना 7:38 को स्मरण रखें, "जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्रशास्त्र में आया है, "उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियाँ बह निकलेंगी।""
इसहाक अंततः एक शांत बस्ती में अपने शांतिपूर्ण सिद्धान्त को थामे हुए चला गया, वह लड़ने के बजाय उड़ान भरने के लिए, और शांति से घृणा करने वालों के साथ रहने के लिए तैयार नहीं थे, शायद उसने भजनकार की तरह सोचा, जिसने लिखा है, "बहुत समय से मुझ को मेल के बैरियों के साथ बसना पड़ा है" (भजन 120:6)। उसने जीत के बजाय शांति को प्राथमिकता दी। और परमेश्वर ने अनुमति दी कि उसे वह मिल जाए, जिसे वह चाहता था, "तब उसने वहाँ से निकल कर एक और कुआँ खुदवाया; और उसके लिये उन्होंने झगड़ा न किया; इसलिये उसने उसका नाम यह कहकर रहोबोत रखा, "अब तो यहोवा ने हमारे लिये बहुत स्थान दिया है, और हम इस देश में फूले–फलेंगे।"" जो लोग शांति का पालन करते हैं, उन्हें जल्द या बाद में शांति मिलेगी; जो लोग शांत रहने का विचार करते हैं, वे शायद ही कभी शांति पाने में विफल रहते हो। उसके भाई इश्माएल के विपरीत इसहाक कैसा था, वैसा जैसे शांतिपूर्ण मसीही आनन्द के बिना, अप्रिय और असंतुष्ट अविश्वासियों से अलग होता हैं। "और वह मनुष्य बनैले गदहे के समान होगा, उसका हाथ सब के विरुद्ध उठेगा और सब के हाथ उसके विरुद्ध उठेंगे; और वह अपने सब भाई–बन्धुओं के मध्य में बसा रहेगा" (उत्पत्ति 16:12)। और इनमें से हम किसका अनुसरण करना पसन्द करेंगे?
मसीही होने के कई लाभ हैं और अगुवों को उन्हें जानना चाहिए। शांति प्राप्त करने और आनन्द लेने की क्षमता उनमें से एक है। इस कुएँ को उसने रहोबोत कह कर पुकारा, अर्थात् विस्तार, पर्याप्त स्थान: पहले वाले दो कुओं में हम देखते हैं कि भूमि कैसी थी, यह विवाद और घृणा वाली थी। पुरुष तब तक सफल नहीं हो सकते, जब तक उनके पास बहुत अधिक पड़ोसी न हों। हालाँकि, यह कुआँ हमें दिखाता है कि स्वर्ग क्या है; यह विस्तार और शांति है। वहाँ पर्याप्त स्थान होगा, क्योंकि वहाँ रहने के लिए कई घर हैं।
रहोबोत कुएँ की सफलता के बाद इसहाक वापस बेर्शेबा चला गया। "वहाँ से वह बेर्शेबा को गया" (वचन 23)। इसहाक प्रभु यहोवा के साथ अपने चलने में दृढ़ रहा, और परमेश्वर के साथ अपनी सहभागिता को बनाए रखा। तब परमेश्वर ने उस पर फिर से कृपा दिखाई। "और उसी दिन यहोवा ने रात को उसे दर्शन देकर कहा, "मैं तेरे पिता अब्राहम का परमेश्वर हूँ; मत डर, क्योंकि मैं तेरे साथ हूँ, और अपने दास अब्राहम के कारण तुझे आशीष दूँगा, और तेरा वंश बढ़ाऊँगा"" (वचन 24)। जब पलिश्तियों ने उसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए मजबूर किया, और उसे लगातार समस्याएँ दीं, तब परमेश्वर ने उससे मुलाकात की, और उसे अपने अनुग्रह का नया आश्वासन दिया। जब पड़ोसी और हमारे आस-पास के अन्य लोग झूठे और निर्दयी होते हैं, तो हम स्वयं को सांत्वना दे सकते हैं कि परमेश्वर विश्वासयोग्य और दयालु है। सदैव नहीं, परन्तु अक्सर अपने समय में, वह स्वयं को दिखाएगा, जब हम लोगों से अपनी अपेक्षाओं में सबसे अधिक निराश होंगे। इसहाक के अनुभव के आधार पर हम आशा कर सकते हैं कि परमेश्वर हमारे लिए भी ऐसा ही करेगा।
जब इसहाक बेर्शेबा आया था, तो संभव है कि उसे यह सोचने में परेशानी हुई होगी कि उसे एक ही स्थान पर अधिक समय तक रहने की अनुमति नहीं मिलती है; और, उसके भीतर इन विचारों की उथल-पुथल में, उसी रात जब वह बेर्शेबा में थका हुआ और असहज सा था, परमेश्वर ने उसे उसकी आत्मा को प्रसन्न करने के लिए अपनी सांत्वना दी। शायद वह आशंकित था कि पलिश्ती उसे वहाँ विश्राम नहीं करने देंगे। और परमेश्वर क्या कहता है? "डर मत, क्योंकि मैं तेरे साथ हूँ।" जब हम जानते हैं कि परमेश्वर हमारे साथ है, तो हम एक स्थान से दूसरे स्थान पर आत्म-विश्वास के साथ जा सकते हैं। वहाँ उसने परमेश्वर के प्रति अपने कर्तव्य की उपेक्षा नहीं की। "तब अबीमेलेक अपने मंत्री अहुज्जत और अपने सेनापति पीकोल को संग लेकर, गरार से उसके पास गया" (वचन 26)।
हम जहाँ भी जाएँ, हमें परमेश्वर के साथ अपनी मित्रता को अपने साथ ले जाना चाहिए। संभवतः इसहाक की वेदियों और उसकी एकेश्वरवादी उपासना ने पलिश्तियों को नाराज किया, और उन्हें उसे लिए परेशान करने के लिए उकसाया। परन्तु यह इसहाक को अपने कर्तव्य से नहीं रोक पाया, चाहे वह किसी भी दुर्भावना के सामने क्यों न आ गया हो। दूसरों के बीच परमेश्वर की सेवा करना आसान है, जो भी सेवा आप करते हैं। ऐसा करने के लिए एक मजबूत विश्वास और अधिक दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है, तब जब अन्य ऐसा नहीं करते हैं। हम स्वर्ग के साथ अपनी बातचीत जारी रखें और इसके लिए मजबूत हों।
आखिरकार इसहाक और अबीमेलेक के सेवकों-पलिश्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा और टकराव शांति और सुलह के साथ समाप्त हो गए, परन्तु इसे संभव बनाने के लिए इसहाक को एक क्षमाशील दयालु व्यक्ति बनना पड़ा।
जैसा कि वचन 26 में लिखित मिलता है, अबीमेलेक इसहाक से एक मित्रता भरी मुलकात करता है। "तब अबीमेलेक अपने मंत्री अहुज्जत और अपने सेनापति पीकोल को संग लेकर, गरार से उसके पास गया।" नीतिवचन 16:7 कहता है, "जब किसी का चालचलन यहोवा को भावता है, तब वह उसके शत्रुओं का भी उस से मेल कराता है।" राजाओं के मन उसके हाथों में होता है, और जब वह चाहें, तब वह उन्हें अपने लोगों के पक्ष में कर सकता है।
हालाँकि, भले ही अबीमेलेक अपने बोलने में एक सच्चा व्यक्ति था, फिर भी इसहाक विवेकपूर्ण और सावधानीपूर्वक इस यात्रा में उसकी ईमानदारी पर प्रश्न उठाता है। पहले कुओं के साथ अपने अनुभव के कारण वह उसकी जाँच करना चाहता था। मित्रता और पड़ोसी संबंधों को व्यवस्थित करने में, हमें अभी भी सांप वाली चतुराई के साथ-साथ कबूतर वाले भोलेपन की आवश्यकता हो सकती है। अतीत में हुई चोटों को ठीक करने के प्रयास में स्पष्ट रूप से बोलना और अनुचित तरीके से काम करने वालों से निपटने में सतर्क रहना, नम्रता और प्रेम के नियम का उल्लंघन नहीं है। हमें दयालु होना चाहिए, परन्तु अवश्य नहीं कि हम लोगों के चलने के लिए दरवाजे वाला पायदान बन जाएँ। वचन 27 कहता है, "इसहाक ने उनसे कहा, "तुम ने मुझ से बैर करके अपने बीच से निकाल दिया था, अब मेरे पास क्यों आए हो?"" क्या हम दयालुता भरी भावना के साथ इस तरह का कोमलता भरा एक प्रश्न पूछ सकते हैं? यदि हम वही शब्द कर्कश आवाज में कहें, तो पूरा माहौल नकारात्मक रूप से बदल जाएगा। यह सदैव इतना नहीं होता कि हम क्या कहते हैं या पूछते हैं, बल्कि वह भावना होती है, जिसके साथ हम इसे कहते हैं या पूछते हैं।
अबीमेलेक इसहाक को इस संबोधन में अपनी ईमानदारी को प्रगट करता है और सुलह और समझौते की अपनी इच्छा में गंभीर प्रतीत होता है। "उन्होंने कहा, "हम ने तो प्रत्यक्ष देखा है कि यहोवा तेरे साथ रहता है; इसलिये हम ने सोचा कि तू तो यहोवा की ओर से धन्य है, अत: हमारे तेरे बीच में शपथ खाई जाए, और हम तुझ से इस विषय की वाचा बन्धाएँ, कि जैसे हम ने तुझे नहीं छुआ, वरन् तेरे साथ केवल भलाई ही की है, और तुझ को कुशल क्षेम से विदा किया, उसके अनुसार तू भी हम से कोई बुराई न करेगा"" (वचन 28 और 29)। कोई सोच सकता है कि अबीमेलेक ने इसहाक के साथ इस समझौते के लिए दबाव डाला, क्योंकि उसे डर था कि ऐसा न हो कि इसहाक, जो धनी होता जा रहा था, अंततः उन चोटों का बदला ले लेगा, जो उसे पहले लगी थीं। हालाँकि, अबीमेलेक इसे सम्मान के सिद्धान्त से करने का दावा करता है। इसहाक ने कहा, "तुम मेरे पास क्यों आए हो, क्योंकि तुम मेरे विरोधी थे और मुझे दूर भेज दिया था?" इसहाक ने शिकायत की कि वे उससे घृणा करते थे, और उसे दूर भेज दिया था। नहीं, अबीमेलेक ने कहा, "हमने तुझे शांति से विदा किया था।" भूमि अबीमेलेक की थी और उसने उसे केवल इसे छोड़ने के लिए कहा। उसने उसे अपने पशुओं और उसके सभी दास-दासियों को अपने साथ ले जाने की अनुमति दी। इसहाक को भी समझदार होना सीखना था और हमें भी होना चाहिए। अबीमेलेक का दावा है कि उसने इसहाक के साथ वास्तविक व्यवहार से सर्वोतम व्यवहार किया था। इसहाक ने इसे अनदेखा कर दिया।
आइए हम अपनी चोटों को वास्तव में जितना है, उससे अधिक न करें। उन्हें उत्तेजित करना और उल्लंघनों को चौड़ा करता है। शायद हम सब कह सकते थे कि हमारे साथ की गई निर्दयता इससे भी बदतर हो सकती थी। इसके अतिरिक्त, अबिलमेलेक अपने प्रति परमेश्वर की कृपा को स्वीकार करता है, और इसे इसहाक के साथ औपचारिक रूप से शांति में रहने की अपनी इच्छा का आधार बनाता है। "तू तो यहोवा की ओर से धन्य है।" यह ऐसा अनुरोध था, "कि तुझे दी गई चोटों को अनेदखा कर और उन्हें छोड़ दे, क्योंकि परमेश्वर ने तुझे हुए नुकसान की भरपूरी के साथ भरपाई कर दी है।" जिन लोगों को परमेश्वर आशीर्वाद देता है और जो अनुग्रह पाते हैं, उनके पास उन लोगों को क्षमा करने के लिए पर्याप्त कारण होते है, जो उनसे घृणा करते हैं, क्योंकि उनका सबसे बुरा शत्रु उन्हें कोई वास्तविक चोट नहीं पहुँचा सकता है। यह संभव है कि अबीमेलेक का मतलब था, "इस कारण से हम तुझसे मित्रता चाहते हैं, क्योंकि परमेश्वर तेरे साथ है।" हम सभी उन लोगों के साथ रहना चाहते हैं, जिन पर परमेश्वर का आशीर्वाद होता है। उन लोगों के साथ सहमति और सहभागिता में रहना अच्छा है, जो परमेश्वर के साथ सहमति और सहभागिता में रहते हैं। उसके कुछ छोटे लोगों ने अपनी बुरे मंशा में—कुओं को भरने का—जो भी इरादा किया हो, उसने और उसके सेनापति ने, जिन्हें वह अब अपने साथ ले आया था, एक अच्छी मित्रता के अतिरिक्त और कुछ नहीं चाहा। शायद इस अबीमेलेक को उसी तरह की चेतावनी मिली थी, जैसी परमेश्वर ने उसके पूर्ववर्ती को अब्राहम को चोट न पहुँचाने के लिए दी थी। क्या आपको वह स्मरण है? "इसलिये अब उस पुरुष की पत्नी को उसे लौटा दे; क्योंकि वह नबी है, और तेरे लिये प्रार्थना करेगा, और तू जीता रहेगा; पर यदि तू उसको न लौटाए तो जान रख कि तू और तेरे जितने लोग हैं, सब निश्चय मर जाएँगे।” या शायद इस अबीमेलेक को उस स्वप्न के बारे में सुनना स्मरण था, जो उसके पिता या दादा को परमेश्वर से प्राप्त हुआ था। किसी भी तरह से, इसने उसे इसहाक के प्रति आश्चर्य में खड़ा कर दिया, जो स्वर्ग के लिए उतना ही प्रिय प्रतीत होता था, जितना कि अब्राहम था।
इसहाक अबीमेलेक और उसके साथी का सत्कार करता है, और उसके साथ मित्रता की एक संधि में प्रवेश करता है, "तब उसने उनको भोज दिया और उन्होंने खाया–पिया। 31सबेरे उन सभों ने तड़के उठकर आपस में शपथ खाई; तब इसहाक ने उनको विदा किया, और वे कुशल क्षेम से उसके पास से चले गए" (वचन 30 और 31)। हम यहाँ देखते हैं कि वह भला व्यक्ति कितना उदार था। उसने उनके लिए एक जेवनार सजाई और पहले उनके साथ की गई निर्दयता के बारे में विस्तार से बताने के बजाय उनका स्वागत किया। क्षमा करने में वह स्वतंत्र रूप से उनके साथ मित्रता की वाचा में प्रवेश करता था, और स्वयं को उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचाने के लिए बाध्य करता था, हालाँकि यदि वह द्वेष रखने का विकल्प चुनता, तो उसे ऐसा करना पड़ सकता था। हमारी मान्यताएं हमें पड़ोसी के साथ अच्छा व्यवहार करना सिखाती हैं, और जहाँ तक हमारी बात है, सभी लोगों के साथ शांति से रहना सिखाती हैं।
इसहाक ने जो किया, उस पर परमेश्वर स्पष्ट रूप से मुस्कुरा दिया; क्योंकि उसी दिन उसने (इसहाक) अबीमेलेक के साथ यह वाचा बाँधी, उसी दिन इसहाक के सेवकों ने उसे पानी के एक कुएँ के मिलने का समाचार दिया, जो उन्हें मिला था। वचन 32 और 33 कहता है, "उसी दिन इसहाक के दासों ने आकर अपने उस खोदे हुए कुएँ का वृतान्त सुना के कहा, "हम को जल का एक सोता मिला है।" तब उसने उसका नाम शिबा रखा; इसी कारण उस नगर का नाम आज तक बेर्शेबा पड़ा है!" इतिहासकार ने इन दोनों अवधारणाओं को एक ही अनुच्छेद में एक साथ रखा हैः इसहाक ने अबीमेलेक के सामने अपना बचाव नहीं किया और उसे एक नया, ताजा कुआँ मिला। इसहाक ने उन कुओं की बहाली पर जोर नहीं दिया, जो पलिश्तियों ने अन्यायपूर्ण तरीके से उससे ले लिए थे, ऐसा न हो कि यह संधि को तोड़ दे, परन्तु चोट के अधीन चुपचाप बैठ गया। इसके लिए उसे तुरन्त प्रतिफल मिलने के द्वारा एक नए कुएँ से समृद्ध किया जाता है, क्योंकि यह उसी दिन की घटना के लिए इतना उपयुक्त था, वह इसे एक पुराने नाम, बेर-शेबा, अर्थात् शपथ के कुएँ से बुलाता था।
इसहाक अपने पिता अब्राहम और पुत्र याक़ूब की महानता से बहुत अलग तरीकों से एक शांत, परन्तु बड़ा व्यक्ति था। प्रत्येक आत्मिक अगुवे के पास अपने अनूठे वरदान-का-मिश्रण होता है, जो उन्हें उन विशेष बाहरी परिस्थितियों के बीच उदाहरण द्वारा नेतृत्व करने में सक्षम बनाता है, जिसमें वे रहते हैं। हमारे वरदान अलग-अलग होते हैं और हमारी परिस्थितियाँ अलग-अलग होती हैं, परन्तु यदि हम उनके अनुसार चलने और उनका पालन करने के लिए तैयार हैं, तो परमेश्वर हम में से प्रत्येक को उसकी योजना के अनुसार उपयोग कर सकता है और करेगा।