नबिया दबोरा अर्थात् भविष्यद्वक्तिन

अध्याय एक


न्यायियों 4

Ron Meyers

1जब एहूद मर गया तब इस्राएलियों ने फिर यहोवा की दृष्‍टि में बुरा किया। 2इसलिये यहोवा ने उनको हासोर में विराजनेवाले कनान के राजा याबीन के अधीन कर दिया, जिसका सेनापति सीसरा था, जो अन्यजातियों के हरोशेत का निवासी था। 3तब इस्राएलियों ने यहोवा की दोहाई दी; क्योंकि सीसरा के पास लोहे के नौ सौ रथ थे, और वह इस्राएलियों पर बीस वर्ष तक बड़ा अन्धेर करता रहा। 4उस समय लप्पीदोत की स्त्री दबोरा, जो नबिया थी, इस्राएलियों का न्याय करती थी। 5वह एप्रैम के पहाड़ी देश में रामा और बेतेल के बीच में दबोरा के खजूर के तले बैठा करती थी, और इस्राएली उसके पास न्याय के लिये जाया करते थे। 6उसने अबीनोअम के पुत्र बाराक को केदेश नप्‍ताली में से बुलाकर कहा, “क्या इस्राएल के परमेश्‍वर यहोवा ने यह आज्ञा नहीं दी कि तू जाकर ताबोर पहाड़ पर चढ़, और नप्‍तालियों और जबूलूनियों में के दस हज़ार पुरुषों को संग ले जा? 7तब मैं याबीन के सेनापति सीसरा को रथों और भीड़भाड़ समेत कीशोन नदी तक तेरी ओर खींच ले आऊँगा; और उसको तेरे हाथ में कर दूँगा।” 8बाराक ने उससे कहा, “यदि तू मेरे संग चलेगी तो मैं जाऊँगा, नहीं तो नहीं जाऊँगा।” 9उस ने कहा, “नि:सन्देह मैं तेरे संग चलूँगी; तौभी इस यात्रा से तेरी कुछ बड़ाई न होगी, क्योंकि यहोवा सीसरा को एक स्त्री के अधीन कर देगा।” तब दबोरा उठकर बाराक के संग केदेश को गई। 10तब बाराक ने जबूलून और नप्‍ताली के लोगों को केदेश में बुलवा लिया; और उसके पीछे दस हज़ार पुरुष चढ़ गए; और दबोरा उसके संग चढ़ गई। 11हेबेर नामक केनी ने उन केनियों में से, जो मूसा के साले होबाब के वंश के थे, अपने को अलग करके केदेश के पास के सानन्नीम के बांजवृक्ष तक जाकर अपना डेरा वहीं डाला था।

12जब सीसरा को यह समाचार मिला कि अबीनोअम का पुत्र बाराक ताबोर पहाड़ पर चढ़ गया है, 13तब सीसरा ने अपने सब रथ, जो लोहे के नौ सौ रथ थे, और अपने संग की सारी सेना को अन्यजातियों के हरोशेत से कीशोन नदी पर बुलवाया। 14तब दबोरा ने बाराक से कहा, “उठ! क्योंकि आज वह दिन है जिसमें यहोवा सीसरा को तेरे हाथ में कर देगा। क्या यहोवा तेरे आगे नहीं निकला है?” इस पर बाराक और उसके पीछे पीछे दस हज़ार पुरुष ताबोर पहाड़ से उतर पड़े। 15तब यहोवा ने सारे रथों वरन् सारी सेना समेत सीसरा को तलवार से बाराक के सामने घबरा दिया; और सीसरा रथ पर से उतरके पाँव पाँव भाग चला। 16और बाराक ने अन्यजातियों के हरोशेत तक रथों और सेना का पीछा किया, और तलवार से सीसरा की सारी सेना नष्‍ट की गई; और एक भी मनुष्य न बचा। 17परन्तु सीसरा पाँव पाँव हेबेर केनी की स्त्री याएल के डेरे को भाग गया; क्योंकि हासोर के राजा याबीन और हेबेर केनी में मेल था। 18तब याएल सीसरा से भेंट के लिये निकलकर उस से कहने लगी, “हे मेरे प्रभु, आ, मेरे पास आ, और न डर।” तब वह उसके पास डेरे में गया, और उसने उसके ऊपर कम्बल डाल दिया। 19तब सीसरा ने उससे कहा, “मुझे प्यास लगी है, मुझे थोड़ा पानी पिला।” तब उसने दूध की कुप्पी खोलकर उसे दूध पिलाया, और उसको ओढ़ा दिया। 20तब उसने उससे कहा, “डेरे के द्वार पर खड़ी रह, और यदि कोई आकर तुझ से पूछे, ‘यहाँ कोई पुरुष है?’ तब कहना, ‘कोई भी नहीं।’ “ 21इसके बाद हेबेर की स्त्री याएल ने डेरे की एक खूँटी ली, और अपने हाथ में एक हथौड़ा भी लिया, और दबे पाँव उसके पास जाकर खूँटी को उसकी कनपटी में ऐसा ठोक दिया कि खूँटी पार होकर भूमि में धँस गई; वह तो थका था ही इसलिये गहरी नींद में सो रहा था। अत: वह मर गया। 22जब बाराक सीसरा का पीछा करता हुआ आया, तब याएल उससे भेंट करने के लिये निकली, और कहा, “इधर आ, जिसका तू खोजी है उसको मैं तुझे दिखाऊँगी।” तब उसने उसके साथ जाकर क्या देखा कि सीसरा मरा पड़ा है, और वह खूँटी उसकी कनपटी में गड़ी है। 23इस प्रकार परमेश्‍वर ने उस दिन कनान के राजा याबीन को इस्राएलियों के सामने नीचा दिखाया। 24और इस्राएली कनान के राजा याबीन पर प्रबल होते गए, यहाँ तक कि उन्होंने कनान के राजा याबीन को नष्‍ट कर डाला।


लोगों को परमेश्‍वर की आवश्यकता है। और नबी या भविष्यद्वक्ता एक ऐसा पद है, जिसके माध्यम से परमेश्‍वर उस आवश्यकता को पूरा करने के लिए काम करता है। न्यायियों के समय में इस्राएल का अपने विश्‍वास से पीछे हटना कोई अपवाद नहीं था। इसलिए परमेश्‍वर ने दबोरा नाम की एक स्त्री पर अपना हाथ रखा और इसलिए, हम यहाँ उन सिद्धांतों की पहचान करने की कोशिश करेंगे, जो हमारे दिन में उसकी और उसके लोगों की उत्तम रीति से सेवा करने में हमारी सहायता करेंगे। एक स्त्री होने के कारण मुझे दबोरा से कोई समस्या नहीं है, पहली नबिया, जिसे हम इस श्रृँखला में सीखते हैं। किसी भी लिंग संबंधित मुद्दे की तुलना में परमेश्‍वर की ओर से एक बुलाहट और वरदान दिया जाना अधिक महत्वपूर्ण है। वरदान और बुलाहट परमेश्‍वर से आते हैं। यदि एक स्त्री को वरदान दिया जाता है और नेतृत्व करने के लिए बुलाया जाता है, तो निश्चित रूप से उसे नेतृत्व करने दें। हन्ना ने एक गहरा संदेश दिया, जब उसने अपने बेटे, शमूएल को प्रभु को दिया, अबीगैल ने दाऊद को नाबाल के घर को नष्ट करने के लिए लहू बहाने से रोक दिया, आबेल के बेतमाका में एक बुद्धिमान स्त्री ने अपना नगर बचाया, हुल्दा नबिया ने यहूदा के इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर योशिय्याह को आवश्यक संदेश दिया, एस्तेर ने अपने दिनों में यहूदियों को बचाया, मरियम ने भविष्यद्वाणी की, जब उसने जिब्राएल स्वर्गदूत से सुना और फीबे पौलुस के दिनों में एक सेविका थी। परमेश्‍वर स्त्रियों का उपयोग करता है, कभी-कभी नेतृत्व करने के लिए, और इस अध्याय में हम देखेंगे कि उसने दबोरा का उपयोग कैसे किया।


1. इस्राएल ने फिर से उसकी दृष्टि में बुराई की, उसकी सेवा को छोड़ दिया और मूर्तियों की पूजा की। यही वह पाप था, जिसने अब उन्हें सबसे अधिक कमजोर कर दिया। हम भ्रष्टाचार की विचित्र शक्ति को देख सकते हैं, जो अपने घातक परिणामों के बार-बार अनुभवों के बावजूद मनुष्यों को पाप में झोंक देता है। पीछे हटने की प्रवृत्ति को रोकना मुश्किल है। देश ने अस्सी साल विश्राम किया था, जिससे उन्हें अपने विश्‍वास में मजबूत होना चाहिए था, परन्तु इसके विपरीत, इसने उन्हें झूठे देवताओं की पूजा की ओर धकेल दिया। इसलिए परमेश्‍वर ने उन्हें छोड़ दिया। जब संसार के आपके हिस्से में ऐसा होता है, तो मुझे आशा है कि आप स्वयं को परमेश्‍वर को सुनने, सेवा करने और बोलने के लिए उपलब्ध कराएँगे, जैसा कि दबोरा ने किया था।


2. इस्राएल अपने शत्रुओं द्वारा अत्याचार के अधीन आ गया। जब उन्होंने परमेश्‍वर को छोड़ दिया, तो उसे भी उन्हें छोड़ दिया; और फिर वे हर नाश करने वाले के लिए वाले के हाथों एक आसान शिकार बन गए। उन्होंने स्वयं को परमेश्‍वर से अलग कर लिया, मानो कि वह उनका नहीं था; और फिर परमेश्‍वर ने उन्हें अलग कर दिया, मानो कि वह उनका नहीं था। उसने उन्हें याबीन के हाथ में कर दिया। यह याबीन हासोर में उसी नाम के एक और व्यक्ति के रूप में शासन करता था, और शायद उसके पूर्वज ने उससे पहले किया था, जिसे यहोशू ने पराजित किया था और मार डाला था, उसके नगर को जला दिया था। स्पष्ट है कि नगर का पुनर्निर्माण किया गया था, शक्ति फिर से प्राप्त की गई थी, नुकसान को फिर से प्राप्त किया गया था, और कुछ सीमा तक, हासोर का राजा इस्राएल को सताने में सक्षम हो गया था, जिन्होंने पाप के कारण कनानी लोगों के विरुद्ध अपने सभी लाभ खो दिए थे। इन कनानी लोगों को पहले इस्राएल द्वारा जीत लिया गया था और उन्हें वश में कर लिया गया था, पहले उन्हें उनके सेवक होने का दण्ड दिया गया गया था, और वे शायद अब भी उनके पैरों तले ही दबे रहते—और पूरी तरह से उन्हें कोई भी परेशानी पहुँचाने में असमर्थ होते—यदि इस्राएलियों की अपनी कमजोरियों, कायरता और अविश्‍वास ने इन कनानी शत्रुओं को उनके सताने वाला बनने का अवसर न दिया होता। उन लोगों द्वारा उत्पीड़ित होना, जिन्हें उनके पूर्वजों ने जीत लिया था, और जिन्हें उन्होंने स्वयं मूर्खतापूर्ण तरीके से छोड़ था, निश्चित रूप से बहुत दु:खद रहा होगा। जब आप उस तरह की स्थिति में होते हैं, तो आप लोगों को उन कठिनाइयों को पैदा करने में उनकी अपनी भूमिका की स्मरण दिलाकर परमेश्‍वर की ओर मुड़ने में सहायता कर सकते हैं, जिनमें वे स्वयं को पाते हैं।


3. इस्राएल अपने परमेश्‍वर के पास लौट आएः जब संकट ने उन्हें उसकी ओर भेजा, तो उन्होंने यहोवा को पुकारा, और उन्होंने राहत का कोई और मार्ग नहीं देखा। जो लोग अपनी समृद्धि में परमेश्‍वर की उपेक्षा करते हैं, वे स्वयं को मुसीबत में होने पर उसे खोजने की आवश्यकता महसूस करेंगे। फिर भी यह अच्छा है कि वह वहाँ मिल जाता है।


4. दबोरा के नाम का अर्थ "मधुमक्खी" है। परमेश्‍वर और इस्राएल के लोगों के लिए उसकी परिश्रम से भरी सेवा से हम देख सकते हैं कि वह प्रभु यहोवा के लिए एक व्यस्त मधुमक्खी होने तक जीवित रही। वह जनता के लिए उपयोगी थी, अपने मित्रों के लिए प्रिय और अपने शत्रुओं के लिए तीखी थी। उसे लप्पीदोत की स्त्री कहा जाता है और इस नाम का अर्थ दीवट होता है। रब्बियों का कहना है कि उसने तम्बू के दीवटों के लिए छड़ी बनाने का काम किया; और, परमेश्‍वर के लिए वह सेवा करने में स्वयं को विनम्र करने के बाद, उसे बाद में एक उच्च बुलाहट के द्वारा सम्मानित किया गया। यह भी संभव है कि वह ज्योति, या भव्यता की स्त्री थी, जो असाधारण रूप से जानकार और बुद्धिमान थी, और इसलिए बहुत ज्यादा प्रमुख और प्रसिद्ध बन गई। वह परमेश्‍वर से घनिष्ठ रूप से परिचित थी; वह एक भविष्यद्वक्तिन अर्थात् नबिया थी, जिसे परमेश्‍वर के आत्मा की प्रत्यक्ष प्रेरणा से ईश्‍वरवीय ज्ञान में निर्देश दिया गया था, और उसके पास बुद्धि का वरदान थे, जो उसे किसी भी मानवीय तरीके से प्राप्त नहीं हुआ था। उसने परमेश्‍वर के वचनों को सुना, और शायद सर्वशक्तिमान के दर्शन देखे। 


वह पूरी तरह से इस्राएल की सेवा के प्रति समर्पित थी। उसने उस समय इस्राएल का न्याय किया, जब याबीन ने उन पर अत्याचार किया था; और शायद, एक स्त्री होने के नाते, उसे सताने वाले द्वारा ऐसा करने की अधिक आसानी से अनुमति दी गई थी। उसने एक राजकुमारी के रूप में नहीं, एक नागरिक अधिकार द्वारा उसे सम्मानित किया, बल्कि एक भविष्यद्वक्तिन के रूप में, और उनके लिए परमेश्‍वर के मुखपत्र के रूप में, दुर्व्यवहार और शिकायतों में सुधार किया, विशेष रूप से जो परमेश्‍वर की आराधना से संबंधित थे। 


इस्राएल के सन्तान लोगों के बीच विवादों का न्याय करने और आत्मिक सलाह प्राप्त करने के लिए न्याय के लिए सभी स्थानों से लोग उसके पास आते थे। उनमें से वे लोग भी होंगे, जिन्होंने पहले गुप्त रूप से अपने पड़ोसियों की भक्ति-हीनता और मूर्तिपूजा पर विलाप किया था, परन्तु उन्हें यह नहीं पता था कि उन्हें कैसे रोका जाए। अब वे अपनी शिकायतों को दबोरा के पास ला सके, जिसने आत्मा की तलवार से उन्हें परमेश्‍वर का न्याय दिखाया, कुछ को सुधारा और दूसरों को प्रोत्साहित किया। इस कहानी से पता चलता है कि वह राष्ट्र के लिए परमेश्‍वर की योजना को भी जानती थी। वह उनमें ही वास करती थी, या खजूर के वृक्ष के नीचे बैठती थी। वह स्पष्ट रूप से एक छोटे से घर में रहती थी या खुली हवा में, उस वृक्ष की छाया में अपने न्याय-आसन को लगाया करती थी। जब हवाएँ चलती थी, तो खजूर के वृक्ष विरोध के विरुद्ध फलते और फूलते थे। मानो कि उसने स्वयं हवाओं से ऊँचे उठकर इस स्थान को अर्जित किया था। हम आसानी से कल्पना कर सकते हैं कि इस्राएल की सन्तान दबोरा के पास आ रही थी और चाहती थी कि वह उनके लिए परमेश्‍वर से प्रार्थना करे, ताकि वे याबीन के हाथ से मुक्त हो सकें।

5. उसने छुटकारे दिलाने के लिए कदम उठाया। वनचन 6, 7 कहता है, “6उसने अबीनोअम के पुत्र बाराक को केदेश नप्‍ताली में से बुलाकर कहा, “क्या इस्राएल के परमेश्‍वर यहोवा ने यह आज्ञा नहीं दी कि तू जाकर ताबोर पहाड़ पर चढ़, और नप्‍तालियों और जबूलूनियों में के दस हज़ार पुरुषों को संग ले जा? 7तब मैं (परमेश्‍वर) याबीन के सेनापति सीसरा को रथों और भीड़भाड़ समेत कीशोन नदी तक तेरी ओर खींच ले आऊँगा; और उसको तेरे हाथ में कर दूँगा।”” वह स्वयं एक स्त्री होने के नाते व्यक्तिगत रूप से एक सेना की कमान संभालने के लिए योग्य नहीं थी, परन्तु उसने एक ऐसे व्यक्ति को नामित किया, जो इसके लिए सही था, नप्ताली का बाराक, जो, यह संभव है, कि पहले से ही अत्याचारी शक्तियों के साथ कुछ मुठभेड़ों में स्वयं को प्रतिष्ठित कर चुका था, जो उसके चारों ओर रहती थीं। हासोर और हरोशेत नप्ताली के क्षेत्र के भीतर थे। 


हो सकता है कि बाराक ने अपने लोगों के बीच प्रतिष्ठा प्राप्त की हो। हम मान सकते हैं कि कुछ संघर्ष उस वीर व्यक्ति ने उनके जूए को तोड़ने की दिशा में किए थे, परन्तु जब तक उसे दबोरा के माध्यम से परमेश्‍वर से अपना आदेश और निर्देश नहीं मिले, तब तक वह इसे लागू नहीं कर सका। वह उसके नेतृत्व के बिना कुछ भी प्रभावी ढंग से नहीं कर सकता था, और न ही वह उसके हाथों के बिना; परन्तु दोनों ने मिलकर शत्रु की शक्तियों से मुक्ति के लिए एक पूरा समूह बन गया। सबसे बड़े और सर्वश्रेष्ठ लोग आत्म-निर्भर नहीं होते हैं, बल्कि उन्हें एक दूसरे की आवश्यकता होती है। उन्हें एक-दूसरे की आवश्यकता थी और हमें इसी तरह के गठबंधन बनाने चाहिए।


परमेश्‍वर के निर्देश से, उसने बाराक को एक सेना जुटाने और सीसरा की कमान में याबीन की सेना को शामिल करने का आदेश दिया। बाराक, अपने सीने में चमकती हुई उदार आग की चिंगारी के साथ सामान्य शत्रु के विरुद्ध कुछ बड़े प्रयास पर विचार कर रहा होगा, और वह अपने लोगों के लिए और अपने परमेश्‍वर के नगरों के लिए स्वतंत्रता की दिशा में कुछ करना चाहेगा। अब उसके पास नबिया के माध्यम से प्रभु यहोवा का प्रोत्साहक वचन था। यही तो उसे चाहिए था। परन्तु इसके साथ ही उसे एक और प्रोत्साहन की आवश्यकता है। उसे एक आदेश की आवश्यकता थी और दबोरा ने उसे वह भी दे दिया। उसने शायद इसे बाराक के अपने मन के लिए एक आग्रह के रूप में काम किया था। 'क्या परमेश्‍वर ने, तेरे मन में कोई गुप्त संकेत भेजकर, तुझे इस बात का कोई इशारा नहीं दिया है कि वह तुझे अपने हाथों में एक साधन के रूप में उपयोग करके इस्राएल को बचाना चाहता है? क्या तूने अपने मन में इस तरह की कोई प्रेरणा महसूस नहीं की है? यदि ऐसा है, तो दबोरा में उपस्थित भविष्यद्ववाणी की आत्मा ने बाराक में उपस्थित एक सैनिक की भावना को और भी अधिक निश्चित कर दिया। अपने सैनिकों को ताबोर पर्वत पर ले जा। उसने उसे यह भी निर्देश दिया कि उसे कितने सैनिक जुटाने हैं—10,000; और उसे इस बात का थोड़ा भी डर नहीं होना चाहिए कि ये सैनिक बहुत कम होंगे, क्योंकि परमेश्‍वर ने स्वयं कहा है कि वह इन्हीं के द्वारा इस्राएल को बचाएगा।


क्या यहाँ परमेश्‍वर द्वारा हमारे लिए लाए गए अवसरों का लाभ उठाने के बारे में कोई सबक मिलता है? मुझे ऐसा लगता है। यीशु ने यरूशलेम से आरम्भ करने के लिए कहा। कुछ लोग विदेश जाने और अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिए बहुत अधिक प्रयास करते हैं, जबकि वे परमेश्‍वर द्वारा अपने आस-पड़ोस में लाए गए अवसरों का लाभ उठाने के लिए उत्तम रीति से होते हैं।


6. उसने उसे आश्‍वासन दिया कि विषय एक युद्ध से निर्धारित किया जाना चाहिए, और लंबे समय तक नहीं चलना चाहिए। शत्रु की शक्ति का उल्लेख करते हुए, सीसरा, एक प्रसिद्ध सेनापति, साहसी और अनुभवी, उसके रथों, उसके लोहे के रथों और उसके सैनिकों की भीड़ का उल्लेख करते हुए, उसने बाराक से बड़े संकल्प के साथ स्वयं को मजबूत करने का आग्रह किया, क्योंकि वह जिस शत्रु पर चढ़ाई करना चाहता था, वह बहुत ही अधिक दुर्जेय था। सबसे बुरे को जानना अच्छा है, जिस से हम उसी के अनुसार काम कर सकते हैं। जिस स्थान पर सीसरा उस पर चढ़ाई करने के लिए अपनी सेना लाएगा, उसने उसे एक संकेत दिया, जो उसके विश्‍वास की पुष्टि करने में सहायता कर सकता है, जबकि यह वास्तव में वैसा ही हुआ, जैसा उसने कहा था। उस विवरण से वह जान सकता है कि निश्चित रूप से शेष में जो उसने कहा, वह ईश्‍वरवीय निर्देशन में बोली और यह सब उसके लिए एक बड़ा प्रोत्साहन होगा।


उसने उसे सफलता की एक स्पष्ट प्रतिज्ञा दी (अर्थात्, परमेश्‍वर, जिनके नाम पर मैं बोलूँगी) उन्हें तेरे हाथ में सौंप देगा; ताकि जब उसने उन्हें दबोरा के वचन के अनुसार, उसके विरुद्ध चढ़ाई करते हुआ देखा, तो उसे विश्‍वास हो सके कि, उसके वचन के अनुसार, वह जल्द ही उन्हें अपने सामने गिरते हुए देखेगा। जब सीसरा ने अपनी सेनाओं को इकट्ठा किया, तो उसने इस्राएल के विनाश की योजना बनाई; परन्तु परमेश्‍वर ने उन्हें उनके विनाश के लिए इकट्ठा किया। बाराक की एक और बाधा दूर हो जाती है, जब वह उसके साथ युद्ध के मैदान में जाने का प्रतिज्ञा करती है। बाराक ने उसकी उपस्थिति की आवश्यकता पर बहुत ज्यादा जोर दिया, जो उसके लिए युद्ध की परिषद में बैठने से ज्यादा उत्तम होगा और वह सहमत हो गई। बाराक के लिए उसे अपने साथ रखना एक कमजोर विश्‍वास की भाषा हो सकती है, जिसका अर्थ है कि जब तक वह उसे युद्ध में अपने साथ नहीं रखता, तब तक वह उसकी बात नहीं मान सकता था। हालाँकि, यह भी उतना ही संभव है कि बाराक का अनुरोध परमेश्‍वर की उपस्थिति की आवश्यकता के दृढ़ विश्‍वास से उत्पन्न हुआ हो। मूसा ने यह जानते हुए भी ऐसा ही अनुरोध किया था कि उसे अपने साथ रहने के लिए उसे परमेश्‍वर की आवश्यकता है।

7. दबोरा ने उसके साथ जाने का प्रतिज्ञा की। कोई भी मेहनत या कठिनाई उसे अपने देश की सेवा के लिए जितना हो सके उतना करने से हतोत्साहित नहीं करेगी। वह उसे वहाँ नहीं भेजेगी, जहाँ वह स्वयं नहीं जाएगी। जो परमेश्‍वर के नाम पर दूसरों को अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए बुलाते हैं, उन्हें इसमें उनकी सहायता करने के लिए बहुत अधिक तैयार रहना चाहिए। दबोरा कमजोर पात्र था, फिर भी उसका विश्‍वास अधिक मजबूत था। परन्तु हालाँकि वह बाराक के साथ जाने के लिए सहमत हो जाती है, यदि वह इस पर जोर देता है, तो वह उसे बताती है कि जीत का श्रेय एक स्त्री को दिया जाएगा। संसार जीत का श्रेय दबोरा को ही देगा। वह आसानी से स्वयं इसका अनुमान लगा सकता था, परन्तु इसके अतिरिक्त, परमेश्‍वर, उसकी कमजोरी को सुधारने के लिए, याएल के हाथ से जीत को पूरी करेगा, जिससे विजेता के रूप में उसकी अपनी महिमा भी कम हो जाएगी।


परन्तु बाराक अपने मन की संतुष्टि और अपने कार्य की अच्छी सफलता को अपने सम्मान से अधिक महत्व देता है और अपने अनुरोध को बनाए रखता है। वह तब तक लड़ने की हियाव नहीं करता, जब तक कि उसके साथ दबोरा न हो, ताकि वह उसे निर्देशित कर सके और उसके लिए प्रार्थना कर सके। इसलिए वह दृढ़ साहस के साथ अपनी बात पर स्थिर रहीं। वह कुलीन नायिका उठी और बाराक के साथ चली गई। और बाराक के लिए यह अच्छा था कि उसने परमेश्‍वर और परमेश्‍वर की स्त्री पर अपनी निर्भरता को पहचान लिया, जो उसकी सफलता के लिए प्रोत्साहित और प्रार्थना कर सकती थी। स्वयं पर विश्‍वास रखना उत्तम रीति से होता है, परन्तु यदि उसमें विश्‍वास की कमी है, तो उसे जीत की महिमा के लिए पूरी तरह से अहंकार से भरी इच्छा के कारण हारने का जोखिम उठाने के बजाय ईमानदारी से इसे स्वीकार करने और जीतने दें। जब हम कमजोर होते हैं, तो आइए ईमानदारी से इसे स्वीकार करें और इसकी भरपाई करें।


8. बाराक स्वयंसेवकों को इकट्ठा करता है और जल्द ही अपने योद्धाओं की टुकड़ी तैयार कर लेता है। दबोरा ने उसे 10,000 सैनिकों की सेना जुटाने के लिए नियुक्त किया था और जल्द ही उसके पास यह सँख्या उसकी टुकड़ी में आ गई। हो सकता है कि ये पैदल सैनिक थे, जो सीसरा के घोड़ों और रथों के विरुद्ध चढ़ाई करते। यह परमेश्‍वर की भागीदारी के कारण जीत को और अधिक स्पष्ट रूप से बना देगा, क्योंकि हम देखेंगे कि परमेश्‍वर और उसकी भविष्यद्वक्तिन की उपस्थिति उस अनुपात को संतुलित करने के लिए पर्याप्त थी। इनमें से अधिकांश सैनिक जबूलून और नप्ताली के गोत्रों से आए, हालाँकि हमें बाद में दबोरा के गीत में पता चलता है कि मनश्शे और इस्साकार के अन्य लोग भी इसमें शामिल हुए थे।


9. जब सीसरा को पता चला कि ताबोर पर्वत पर बाराक के सैनिक इकट्ठे हो रहे हैं, जो दबोरा के वचन के अनुसार था, तो वह अपनी सेना को ताबोर की ओर ले गया। सीसरा का विश्‍वास मुख्य रूप से उसके रथों में था, क्योंकि हम देखते हैं कि उनके बारे में विशेष जानकारी से भरी टिप्पणी की गई है। वहाँ लोहे के 900 रथ थे, जिनकी धुरी पर तीखी तलवारें बंधी हुईं थीं, जब उन्हें पैदल सैनिकों की सेना की ओर कर दिया जाता था, तो वे भयानक नुकसान पहुँचाती थी। पुरुष सत्ता की अपनी वासनाओं को संतुष्ट करने के लिए एक-दूसरे को नष्ट करने के तरीकों का आविष्कार करने में कुशल होते हैं। इस विषय में वे तरीके परमेश्‍वर के सैनिकों के विरुद्ध प्रभावी नहीं थे।


10. दबोरा शत्रु पर चढ़ाई करने का आदेश देती है। यहूदी इतिहास बताता है कि जब बाराक ने सीसरा की सेना को उस पहाड़ को घेरने का प्रयास करते देखा, जहाँ वह और उसकी सेना डेरा डाले हुए थी, तो उसका मन टूट गया और उसने वहाँ से भाग जाने की योजना बनाई। परन्तु दबोरा ने उसे सीसरा पर चढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित किया। वचन 14 कहता है, "तब दबोरा ने बाराक से कहा, "उठ! क्योंकि आज वह दिन है जिसमें यहोवा सीसरा को तेरे हाथ में कर देगा। क्या यहोवा तेरे आगे नहीं निकला है?""


हमारे उद्देश्य के लिए, इस कहानी में नेतृत्व के सिद्धांतों को देखने के लिए, आइए हम ध्यान दें कि इस बड़े कार्य के काम और सम्मान को दबोरा और बाराक के बीच कैसे विभाजित किया गया है। वह, सिर अर्थात् मुखिया के रूप में, वाणी देती है, और वह, हाथ के रूप में, काम करता है। इस तरह परमेश्‍वर ने अपने वरदानों को विभिन्न प्रकार से वितरित किया था। सामान्य रूप से, स्त्री का सिर पुरुष होता है। फिर भी यहाँ पवित्र आत्मा उस स्थिति को पार करने और स्त्री के कंधों पर सिर रखने के लिए प्रसन्न था, वह संसार की कमजोर चीजों को चुनकर पराक्रमी को शर्मिंदा करने के लिए, ताकि कोई भी प्राणी उसके सामने महिमा न कर सके। इस बारे में वह पहले ही बता चुका था। यह बाराक के लिए अच्छा था कि उसके साथ दबोरा थी; क्योंकि वह उसके भीतर की कमी को पूरा करती थी। उसे उसके प्रोत्साहन की आवश्यकता थी और यह एक ऐसा सेवकाई है, जिसे एक नबिया कर सकती है।


11. परमेश्‍वर ने स्वयं शत्रु की सेना को परास्त कर दिया, सीसरा पैदल ही याएल के तम्बू में भाग गया, जिसने उसे पीने के लिए दूध दिया और उसके सिर को फाड़ते हुए एक खूंटी चला दी। सीसरा के पास 900 लोहे के रथ थे और याएल ने उसे एक तम्बू खूंटी से मार डाला! परमेश्‍वर और उसके भविष्यद्वक्ताओं पर भरोसा रखना शरीर की भुजाओं पर भरोसा रखने से उत्तम है। दबोरा एक नायिका है, जिसका उदाहरण परमेश्‍वर के सभी पुरुषों और स्त्रियों को प्रेरित कर सकता है। आइए हम परमेश्‍वर के निकट रहें, उसकी वाणी सुनें, उसके कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करें और परमेश्‍वर को अपने लोगों के लिए इस भविष्यद्वक्तिन की तरह जीत लाते हुए देखें। नि:सन्देह, यह उत्तम रीति से होता, यदि वे इन कनानी लोगों को जल्द से जल्द नष्ट कर देते, जैसा कि परमेश्‍वर ने आज्ञा दी थी और उन्हें सक्षम बनाया था; परन्तु कभी नहीं से देर से ही सही।