बिना नाम के दो भविष्यद्वक्ता
अध्याय दो
न्यायियों 6:6-11; 1 शमूएल 2:27-36

Ron Meyers
न्यायियों 6:6-11, “6और मिद्यानियों के कारण इस्राएली बड़ी दुर्दशा में पड़ गए; तब इस्राएलियों ने यहोवा की दोहाई दी। 7जब इस्राएलियों ने मिद्यानियों के कारण यहोवा की दोहाई दी, 8तब यहोवा ने इस्राएलियों के पास एक नबी भेजा, जिसने उनसे कहा, “इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है : मैं तुम को मिस्र में से ले आया, और दासत्व के घर से निकाल ले आया; 9और मैं ने तुम को मिस्रियों के हाथ से, वरन् जितने तुम पर अन्धेर करते थे उन सभों के हाथ से छुड़ाया, और उनको तुम्हारे सामने से बरबस निकालकर उनका देश तुम्हें दे दिया; 10और मैं ने तुम से कहा, ‘मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ; एमोरी लोग जिनके देश में तुम रहते हो उनके देवताओं का भय न मानना।’ परन्तु तुम ने मेरा कहना नहीं माना।”
11फिर यहोवा का दूत आकर उस बांजवृक्ष के तले बैठ गया, जो ओप्रा में अबीएजेरी योआश का था, और उसका पुत्र गिदोन एक दाखरस के कुण्ड में गेहूँ इसलिये झाड़ रहा था कि उसे मिद्यानियों से छिपा रखे।
1 शमूएल 2:27-36, “27तब परमेश्वर का एक जन एली के पास जाकर उससे कहने लगा, “यहोवा यों कहता है, कि जब तेरे मूलपुरुष का घराना मिस्र में फ़िरौन के घराने के वश में था, तब क्या मैं उस पर निश्चय प्रगट न हुआ था? 28और क्या मैं ने उसे इस्राएल के सब गोत्रों में से इसलिये चुन नहीं लिया था कि मेरा याजक होकर मेरी वेदी के ऊपर चढ़ावे चढ़ाए, और धूप जलाए, और मेरे सामने एपोद पहिना करे? और क्या मैं ने तेरे मूलपुरुष के घराने को इस्राएलियों के सारे हव्य न दिए थे? 29इसलिये मेरे मेलबलि और अन्नबलि को, जिन्हें मैं ने अपने धाम में चढ़ाने की आज्ञा दी है, उन्हें तुम लोग क्यों पाँव तले रौंदते हो? और तू क्यों अपने पुत्रों का मुझ से अधिक आदर करता है, कि तुम लोग मेरी इस्राएली प्रजा की अच्छी से अच्छी भेंटें खा खाके मोटे हो जाओ? 30इसलिये इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, कि मैं ने कहा तो था कि तेरा घराना और तेरे मूलपुरुष का घराना मेरे सामने सदैव चला करेगा; परन्तु अब यहोवा की वाणी यह है, कि यह बात मुझ से दूर हो; क्योंकि जो मेरा आदर करें मैं उनका आदर करूँगा, और जो मुझे तुच्छ जानें वे छोटे समझे जाएँगे। 31सुन, वे दिन आते हैं कि मैं तेरा भुजबल और तेरे मूलपुरुष के घराने का भुजबल ऐसा तोड़ डालूँगा कि तेरे घराने में कोई बूढ़ा होने न पाएगा। 32इस्राएल का कितना ही कल्याण क्यों न हो, तौभी तुझे मेरे धाम का दु:ख देख पड़ेगा, और तेरे घराने में कोई कभी बूढ़ा न होने पाएगा। 33मैं तेरे कुल के सब किसी से तो अपनी वेदी की सेवा न छीनूँगा, परन्तु तौभी तेरी आँखें देखती रह जाएँगी, और तेरा मन शोकित होगा, और तेरे घर की बढ़ती सब अपनी पूरी जवानी ही में मर मिटेंगे। 34और मेरी इस बात का चिह्न वह विपत्ति होगी जो होप्नी और पीनहास नामक तेरे दोनों पुत्रों पर पड़ेगी; अर्थात् वे दोनों के दोनों एक ही दिन मर जाएँगे। 35और मैं अपने लिये एक विश्वासयोग्य याजक ठहराऊँगा, जो मेरे हृदय और मन की इच्छा के अनुसार किया करेगा, और मैं उसका घर बसाऊँगा और स्थिर करूँगा, और वह मेरे अभिषिक्त के आगे आगे सब दिन चला फिरा करेगा। 36और ऐसा होगा कि जो कोई तेरे घराने में बचा रहेगा वह उसी के पास जाकर एक छोटे से टुकड़े चाँदी के या एक रोटी के लिये दण्डवत् करके कहेगा, याजक के किसी काम में मुझे लगा, जिससे मुझे एक टुकड़ा रोटी मिले।”
मिद्यान के द्वारा आक्रमणों में सात वर्षों की पीड़ा के बाद, इस्राएल की परमेश्वर के हाथ में वापस आने की भावना अंततः पुनर्जीवित हुई। सात वर्षों तक, प्रतिवर्ष, मिद्यानियों ने उनके विरुद्ध ये आक्रमण किए, क्योंकि वचन 1 में कहा गया है, "तब इस्राएलियों ने यहोवा की दृष्टि में बुरा किया, इसलिये यहोवा ने उन्हें मिद्यानियों के वश में सात वर्ष कर रखा।" परन्तु कहानी यहीं खत्म नहीं होती। "मिद्यानियों के कारण इस्राएली बड़ी दुर्दशा में पड़ गए; तब इस्राएलियों ने यहोवा की दोहाई दी।" यह एक अच्छा संकेत था और कहानी उत्तम रीति से अच्छे के लिए बदलने वाली है, क्योंकि परमेश्वर गिदोन को उठाएगा और इस्राएल को मुक्त किया जाएगा। परन्तु इसके लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। परमेश्वर एक दूत भेजेगा और ऐसा करने के लिए उन्हें एक नबी की आवश्यकता थी। हम उस व्यक्ति का नाम नहीं जानते, जिसे उसने भेजा था, परन्तु स्वर्गदूत के आने और गिदोन से बात करने से पहले और छुटकारे के आने से पहले, इस्राएल को बुरा समाचार सुनने की आवश्यकता थी, जो अच्छे समाचार से पहले आना चाहिए, यदि अच्छे समाचार का उचित प्रभाव होना है। इस्राएल ने पाप किया है और उसे इसे जानने की आवश्यकता थी। परमेश्वर को एक भविष्यद्वक्ता की आवश्यकता थी।
परमेश्वर उनकी स्थिति से अवगत था। उसने इस्राएल के विलाप की आवाज सुनी, जब वे अंततः उसकी ओर मुड़ गए थे। हालाँकि अपनी सुख-समृद्धि में उन्होंने उसकी उपेक्षा की थी और प्रतिद्वंद्वी देवताओं में अनुचित रुचि दिखाई थी, और हालाँकि उन्होंने कभी भी उसकी ओर नहीं देखा, जब तक कि वे चरम सीमा में पहुँच कर प्रेरित नहीं हुए, फिर भी, जब उन्होंने उसे पुकारा और प्रार्थना की, तब वह दया दिखाने के लिए जल्दी में था, और प्रकट करता है कि वह सदैव प्रार्थना सुनने के लिए कितना उत्सुक रहता है। ऐसा करने के लिए सात वर्ष प्रतीक्षा क्यों की जाए?
1. इससे पहले कि परमेश्वर उनके पास छुटकारा देने के लिए एक स्वर्गदूत भेजता, उसने उन्हें पाप के लिए फटकार लगाने और उन्हें पश्चाताप करने के लिए एक भविष्यद्वक्ता भेजा। इस नबी का नाम नहीं लिया गया है, परन्तु वह एक मनुष्य था, एक नबी था, एक स्वर्गदूत नहीं। क्या इस भविष्यद्वक्ता ने इस्राएलियों को अपना संदेश दिया, जब वे किसी सामान्य सभा में, किसी गंभीर जेवनार में या किसी अन्य बड़े कार्यक्रम में एक साथ मिले थे, या क्या वह अपने संदेश का प्रचार करते हुए एक नगर से दूसरे नगर और एक गोत्र से दूसरे गोत्र में गया था, हम नहीं जानते हैं, परन्तु उसका काम उन्हें पाप के बारे में समझाना था, ताकि वे प्रभु यहोवा को पुकारते हुए, इसे स्वीकार कर सकें, दुःख और शर्म के साथ इसे स्वीकार कर सकें, और आगे अपनी मुसीबत की शिकायत करते हुए अपनी श्वास को नष्ट न करें। उन्होंने एक छुटकारा देने वाले के लिए परमेश्वर से प्रार्थना की, और परमेश्वर ने उन्हें निर्देश देने और उनके पास छुटकारा के लिए उन्हें तैयार करने के लिए एक भविष्यद्वक्ता भेजा। हमारे पास इस आशा करने का कारण है कि परमेश्वर हमारे लिए दया की योजना बना रहा है, यदि हम पाते हैं कि वह अपनी कृपा से हमें इसके लिए तैयार कर रहा है। इसलिए इस स्थिति से हम जो पहली बात सीखते हैं, वह यह है कि परमेश्वर के पास हमारे दर्शकों को तैयार करने का एक तरीका है। तो क्या यह महत्वपूर्ण नहीं होगा कि प्रार्थना करने के लिए जाने से पहले प्रभु यहोवा हमारे श्रोताओं को तैयार करें? और क्या हमें केवल उन दर्शकों के पास जाने के लिए सावधान नहीं होना चाहिए, जिनमें हमें लगता है कि परमेश्वर उन्हें तैयार करने के लिए हमारे आगे गया है? एक विशेष लोगों के पास भविष्यद्वक्ताओं को भेजना, और विश्वासयोग्य सेवकों के साथ एक देश तैयार करना, आने वाले समय के लिए अच्छा का संकेत है, और एक प्रमाण है कि परमेश्वर ने उनके लिए दया दिखाई है।
2. यहाँ तीन विषय मिलते हैं, जिन्हें यह नबी संबोधित करता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आज हमें स्वयं को इन तीनों तक सीमित रखने की आवश्यकता है या हमें सदैव इन तीनों को शामिल करने की आवश्यकता है, परन्तु फिर भी यहाँ वह आदर्श दिया गया है, जो परमेश्वर ने हमें इस उदाहरण में दिया है। अ. भविष्यद्वक्ता उन्हें उन बड़े कामों के बारे में बताता है, जो परमेश्वर ने उनके लिए किए थे, जैसा कि वचन 8, 9 में कहा गया है, "8तब यहोवा ने इस्राएलियों के पास एक नबी भेजा, जिसने उनसे कहा, “इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है : मैं तुम को मिस्र में से ले आया, और दासत्व के घर से निकाल ले आया; 9और मैं ने तुम को मिस्रियों के हाथ से, वरन् जितने तुम पर अन्धेर करते थे उन सभों के हाथ से छुड़ाया, और उनको तुम्हारे सामने से बरबस निकालकर उनका देश तुम्हें दे दिया।" उन्होंने दूसरी जातियों के देवताओं की पूजा की थी, जैसे कि उनके पास आराधना करने के लिए अपना कोई परमेश्वर नहीं था और इसलिए वे जिसे चाहें चुन सकते थे; परन्तु उन्हें यहाँ उस व्यक्ति का स्मरण दिलाया जाता है, जिसे वे भूल गए थे, जो इस्राएल के परमेश्वर की उपाधि से जाना जाता था, और उसी की ओर उन्हें लौटना होगा। वे दूसरे देवताओं की ओर फिर गए थे, मानो कि उनका अपना ईश्वर या तो असमर्थ था या उनकी रक्षा करने के लिए तैयार नहीं था, और इसलिए उन्हें बताया जाता है कि उसने उनके पूर्वजों के लिए क्या किया, जिसके लाभ अभी भी उनके लिए, उनकी धन्यवाद से रहित सन्तानों के लिए उपलब्ध थे। वह उन्हें मिस्र से बाहर ले आया, जहाँ उन्होंने ऐसा नहीं किया होता, तो वे निरंतर निर्धनता और गुलामी में बने रहते। उसने उन्हें उन सभी के हाथों से छुड़ा लिया, जो उन पर अत्याचार कर रहे थे। इससे पता चलता है कि अब उन्हें सताने वालों के हाथों से न छुड़ाए जाने का कारण मिद्यानियों के कारण परमेश्वर में सामर्थ्य या आशीष की कमी नहीं थी, बल्कि इसलिए कि वे उनके अपने अधर्म के कारण अपनी समस्याओं को अपने ऊपर ले आए थे। जब तक वे पश्चाताप के द्वारा अपनी गलती को नहीं मान लेते, तब तक परमेश्वर उन्हें नहीं छुड़ाएगा। परमेश्वर ने उन्हें यह अच्छी भूमि दी। यह न केवल उनके पाप को बढ़ाता है, और इसके लिए उनकी कृतघ्नता को भी दर्शाता है, बल्कि इसने परमेश्वर को धर्मी ठहराया, और अब वे जिस भी परेशानी में थे, उसके लिए उसे दोष से मुक्त कर दिया। वे यह नहीं कह सकते थे कि वह निर्दयी था, क्योंकि उसने उनके लिए भला करने की उसकी इच्छा के सभी संभावित प्रमाण दिए थे। यदि उनके साथ बुरी बातें घटित होती हैं, तो उन्हें स्वयं को धन्यवाद देना चाहिए।
ब. नबी परमेश्वर की माँगों और उनसे अपेक्षाओं की भलाई और निष्पक्षता को दर्शाता है, क्योंकि वचन 10 में कहा गया है, "और मैं ने तुम से कहा, ‘मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ; एमोरी लोग जिनके देश में तुम रहते हो उनके देवताओं का भय न मानना।’ परन्तु तुम ने मेरा कहना नहीं माना।" मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ और मेरे प्रति तुम्हारा कर्तव्य है। एमोरियों के देवताओं का सम्मान मत करो। हाय तुम पर! मैं तुम्हारा परमेश्वर हूँ। मेरी बात सुनो। मेरा ओर देखो। उनकी उपासना न करो, और न उनका आदर करो; उनकी उपासना न करो, इस भय से कि वे तुम्हें कोई हानि पहुँचाएँगे, क्योंकि वे तुम्हें क्या हानि पहुँचा सकते हैं, जबकि मैं तुम्हारा परमेश्वर हूँ? परमेश्वर से डरो, और तुम्हें उनसे डरने की आवश्यकता नहीं है।
स. नबी उन पर परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह का आरोप लगाता है, जिसने उन्हें केवल उसकी आराधना करने का आदेश दिया था। वचन 10 इस वाक्यांश के साथ समाप्त होता हैः "परन्तु तुम ने मेरा कहना नहीं माना।" नबी संक्षिप्त में कहता है, परन्तु व्यापक रीति से बोल रहा है। यह आरोप उनके सभी पापों के केंद्र में था, उन्होंने परमेश्वर की बात नहीं सुनी। पाप की परिभाषाओं में से एक "न सुनना" है। परमेश्वर की न सुनना परमेश्वर की अवज्ञा थी और इसलिए यह वही था, जो उन आपदाओं को उनके सामने ले आया, जिनके कारण वे अब कराह रहे थे। भविष्यद्वक्ता इस संदेश के माध्यम से इस्राएलियों को पश्चाताप में लाने का इरादा रखता है। पश्चाताप सही और सच्चा होता है, जब पाप की पाप-पूर्णता में, परमेश्वर की अवज्ञा के रूप में, हम मुख्य रूप से विलाप करते हैं। हम नहीं जानते कि नबी के उपदेश का लोगों पर क्या प्रभाव पड़ा, परन्तु हम अपेक्षा कर सकते हैं कि इसका अच्छा प्रभाव पड़ा, और उनमें से कुछ ने कम से कम पश्चाताप किया और स्वयं का सुधार किया।
पवित्रशास्त्र की कथा में अगली बात यह है कि स्वर्गदूत गिदोन से बात कर रहा है। यह संकेत दे सकता है कि कम से कम कुछ लोगों ने पश्चाताप किया और मिद्यानियों से छुटकारे के लिए प्रभु यहोवा से अधिक गंभीरता से प्रार्थना करने लगे। बेनाम भविष्यद्वक्ता ने अपना संदेश दिया और हमें यह मान लेना चाहिए कि परमेश्वर का वचन व्यर्थ नहीं लौटा। "10जिस प्रकार से वर्षा और हिम आकाश से गिरते हैं और वहाँ यों ही लौट नहीं जाते, वरन् भूमि पर पड़कर उपज उपजाते हैं जिस से बोनेवाले को बीज और खानेवाले को रोटी मिलती है, 11उसी प्रकार से मेरा वचन भी होगा जो मेरे मुख से निकलता है; वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, परन्तु जो मेरी इच्छा है उसे वह पूरा करेगा, और जिस काम के लिये मैं ने उसको भेजा है उसे वह सफल करेगा"" (यशायाह 55:10, 11)। परमेश्वर के लोगों की आवश्यकता है और परमेश्वर के पास संदेश हैं। क्या आप उसके नबियों में से एक होंगे?
1 शमूएल 2:27-36. “27तब परमेश्वर का एक जन एली के पास जाकर उससे कहने लगा, “यहोवा यों कहता है, कि जब तेरे मूलपुरुष का घराना मिस्र में फ़िरौन के घराने के वश में था, तब क्या मैं उस पर निश्चय प्रगट न हुआ था? 28और क्या मैं ने उसे इस्राएल के सब गोत्रों में से इसलिये चुन नहीं लिया था कि मेरा याजक होकर मेरी वेदी के ऊपर चढ़ावे चढ़ाए, और धूप जलाए, और मेरे सामने एपोद पहिना करे? और क्या मैं ने तेरे मूलपुरुष के घराने को इस्राएलियों के सारे हव्य न दिए थे? 29इसलिये मेरे मेलबलि और अन्नबलि को, जिन्हें मैं ने अपने धाम में चढ़ाने की आज्ञा दी है, उन्हें तुम लोग क्यों पाँव तले रौंदते हो? और तू क्यों अपने पुत्रों का मुझ से अधिक आदर करता है, कि तुम लोग मेरी इस्राएली प्रजा की अच्छी से अच्छी भेंटें खा खाके मोटे हो जाओ? 30इसलिये इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, कि मैं ने कहा तो था कि तेरा घराना और तेरे मूलपुरुष का घराना मेरे सामने सदैव चला करेगा; परन्तु अब यहोवा की वाणी यह है, कि यह बात मुझ से दूर हो; क्योंकि जो मेरा आदर करें मैं उनका आदर करूँगा, और जो मुझे तुच्छ जानें वे छोटे समझे जाएँगे। 31सुन, वे दिन आते हैं कि मैं तेरा भुजबल और तेरे मूलपुरुष के घराने का भुजबल ऐसा तोड़ डालूँगा कि तेरे घराने में कोई बूढ़ा होने न पाएगा। 32इस्राएल का कितना ही कल्याण क्यों न हो, तौभी तुझे मेरे धाम का दु:ख देख पड़ेगा, और तेरे घराने में कोई कभी बूढ़ा न होने पाएगा। 33मैं तेरे कुल के सब किसी से तो अपनी वेदी की सेवा न छीनूँगा, परन्तु तौभी तेरी आँखें देखती रह जाएँगी, और तेरा मन शोकित होगा, और तेरे घर की बढ़ती सब अपनी पूरी जवानी ही में मर मिटेंगे। 34और मेरी इस बात का चिह्न वह विपत्ति होगी जो होप्नी और पीनहास नामक तेरे दोनों पुत्रों पर पड़ेगी; अर्थात् वे दोनों के दोनों एक ही दिन मर जाएँगे। 35और मैं अपने लिये एक विश्वासयोग्य याजक ठहराऊँगा, जो मेरे हृदय और मन की इच्छा के अनुसार किया करेगा, और मैं उसका घर बसाऊँगा और स्थिर करूँगा, और वह मेरे अभिषिक्त के आगे आगे सब दिन चला फिरा करेगा। 36और ऐसा होगा कि जो कोई तेरे घराने में बचा रहेगा वह उसी के पास जाकर एक छोटे से टुकड़े चाँदी के या एक रोटी के लिये दण्डवत् करके कहेगा, याजक के किसी काम में मुझे लगा, जिससे मुझे एक टुकड़ा रोटी मिले।”
याजक एली ने अपने बेटों को बहुत उदारता से डाँटा, और उन्हें सुधारा नहीं, जैसा कि उसे करना चाहिए था, और इसलिए परमेश्वर ने एक अनाम भविष्यद्वक्ता को उसके पास भेजा, ताकि वह उसे कड़ी फटकार लगा सके, और उसे आने वाले खतरे से आगाह कर सके। अपने बेटे को न सुधारने में एली की कमजोरी के कारण, उसने उनकी दुष्टता में उनके हाथ मजबूत कर दिए थे। यदि अच्छे लोग अपने कर्तव्य में कमजोर हैं, और अपनी लापरवाही और अनदेखे पापियों के पाप में योगदान करते हैं, तो उन्हें इसके बारे में चेतावनी सुनने और इसके लिए पीड़ित होने की अपेक्षा करनी चाहिए। एली का परिवार उस समय पृथ्वी के सभी परिवारों की तुलना में परमेश्वर के अधिक निकट था, और इसलिए वह उन्हें दंडित करेगा। आमोस 3:2 कहता है, "पृथ्वी के सारे कुलों में से मैं ने केवल तुम्हीं पर मन लगाया है, इस कारण मैं तुम्हारे सारे अधर्म के कामों का दण्ड दूँगा।" संदेश स्वयं एली को भेजा जाता है, शायद इसलिए कि परमेश्वर उसे पश्चाताप करने और उसे बचाने की ओर लाएगा; न कि उसके बेटों को, जिन्हें उसने पहले ही नष्ट करने का निश्चय कर लिया था। और यह अंत में अपना कर्तव्य निभाने के लिए उसे जागृत करने का एक साधन हो सकता है, और इसलिए दण्ड को भी रोका जा सकता था। परन्तु हमें इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिलता है कि इसका उन पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ा। यह भविष्यद्वक्ता परमेश्वर की ओर से जो संदेश देता है, वह बहुत ज्यादा कठोर है।
1. वह उसे उन बड़े कामों की स्मरण दिलाता है, जो परमेश्वर ने उसके पूर्वजों के घराने और उसके परिवार के लिए किए थे। वह मिस्र में हारून को दासता के घर में आगे के अनुग्रह के संकेत के रूप में दिखाई दिया, जो उसने उसके लिए दिखाया था। उसने हारून को याजक पद पर पदोन्नत किया, उसे उसका घराना दिया, और उसे इस्राएल के किसी भी परिवार से ऊपर प्रतिष्ठित किया। उसने उसे सम्मानजनक कार्य सौंपा, परमेश्वर की वेदी पर बलिदान चढ़ाने के लिए, धूप जलाने के लिए, और उस एपोद को पहनने के लिए, जिसमें न्याय की पट्टिका थी। उसने उस पर एक सम्मानजनक प्रावधान रखा, जो आग पर चढ़ाई गई सभी भेंटों में से एक हिस्सा था। वचन 28 और 29 में कहा गया है, "28और क्या मैं ने उसे इस्राएल के सब गोत्रों में से इसलिये चुन नहीं लिया था कि मेरा याजक होकर मेरी वेदी के ऊपर चढ़ावे चढ़ाए, और धूप जलाए, और मेरे सामने एपोद पहिना करे? और क्या मैं ने तेरे मूलपुरुष के घराने को इस्राएलियों के सारे हव्य न दिए थे? 29इसलिये मेरे मेलबलि और अन्नबलि को, जिन्हें मैं ने अपने धाम में चढ़ाने की आज्ञा दी है, उन्हें तुम लोग क्यों पाँव तले रौंदते हो? और तू क्यों अपने पुत्रों का मुझ से अधिक आदर करता है, कि तुम लोग मेरी इस्राएली प्रजा की अच्छी से अच्छी भेंटें खा खाके मोटे हो जाओ?" उन्हें अपने प्रति विश्वासयोग्य रहने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए परमेश्वर उनके लिए इससे अधिक क्या कर सकता था? परमेश्वर के सेवकों को जो विशिष्ट अनुग्रह प्राप्त हुए हैं, विशेष रूप से आत्मिक याजकवर्ग के रूप में, वे पाप के लिए संभावित प्रलोभन हैं, और यदि हम अपनी जिम्मेदारियों की उपेक्षा करते हैं और अपनी मान्यताओं को धोखा देते हैं, तो यह हमारा लेखा लिए के दिन हमारे विरुद्ध स्मरण किया जाएगा।
भविष्यद्वक्ता एली और उसके परिवार के विरुद्ध एक उच्च आरोप की घोषणा करता है। उसके बच्चों ने दुष्टता की, और उसने इसकी अनुमति दी, और ऐसा करने में स्वयं को अपराध में शामिल किया; इसलिए पाप का आरोप उन सभी के विरुद्ध है। उसके बेटों ने अधर्मी तरीके से परमेश्वर की पवित्र वस्तुओं पर आँखें लगाई थीः "इसलिये मेरे मेलबलि और अन्नबलि को, जिन्हें मैं ने अपने धाम में चढ़ाने की आज्ञा दी है, उन्हें तुम लोग क्यों पाँव तले रौंदते हो? और तू क्यों अपने पुत्रों का मुझ से अधिक आदर करता है, कि तुम लोग मेरी इस्राएली प्रजा की अच्छी से अच्छी भेंटें खा खाके मोटे हो जाओ?" उन्होंने परमेश्वर के भेंटों के लिए कल्पना के बावजूद हथियाने का पूरा प्रयास किया, जब उन्होंने अपने पसंदीदा भागों को अपने लिए ले लिया और उसे खाया। जो लोग अपने बच्चों को किसी भी बुरे तरीके से अनुमति देते हैं और उनके साथ उदारता से पेश आते हैं, और उन्हें रोकने और दण्डित करने के लिए अपने अधिकार का उपयोग नहीं करते हैं, वे वास्तव में परमेश्वर से अधिक उनका सम्मान करते हैं, परमेश्वर की महिमा की तुलना में मनुष्यों की दृष्टि में उनकी उपस्थिति के प्रति अधिक कोमल होते हैं और उन्हें सम्मानित करने की तुलना में उनका ठट्ठा उड़ाने की अधिक इच्छा रखते हैं। परमेश्वर क्रोधित हो गया और उसने एली को यही कुछ बताने के लिए एक भविष्यद्वक्ता को भेजा।
2. भविष्यद्वक्ता घोषणा करता है कि महायाजक का पद उसके परिवार से हटा लिया जाएगा। वचन 30-32
“30इसलिये इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, कि मैं ने कहा तो था कि तेरा घराना और तेरे मूलपुरुष का घराना मेरे सामने सदैव चला करेगा; परन्तु अब यहोवा की वाणी यह है, कि यह बात मुझ से दूर हो; क्योंकि जो मेरा आदर करें मैं उनका आदर करूँगा, और जो मुझे तुच्छ जानें वे छोटे समझे जाएँगे। 31सुन, वे दिन आते हैं कि मैं तेरा भुजबल और तेरे मूलपुरुष के घराने का भुजबल ऐसा तोड़ डालूँगा कि तेरे घराने में कोई बूढ़ा होने न पाएगा। 32इस्राएल का कितना ही कल्याण क्यों न हो, तौभी तुझे मेरे धाम का दु:ख देख पड़ेगा, और तेरे घराने में कोई कभी बूढ़ा न होने पाएगा। 30इसलिये इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, कि मैं ने कहा तो था कि तेरा घराना और तेरे मूलपुरुष का घराना मेरे सामने सदैव चला करेगा; परन्तु अब यहोवा की वाणी यह है, कि यह बात मुझ से दूर हो; क्योंकि जो मेरा आदर करें मैं उनका आदर करूँगा, और जो मुझे तुच्छ जानें वे छोटे समझे जाएँगे। 31सुन, वे दिन आते हैं कि मैं तेरा भुजबल और तेरे मूलपुरुष के घराने का भुजबल ऐसा तोड़ डालूँगा कि तेरे घराने में कोई बूढ़ा होने न पाएगा। 32इस्राएल का कितना ही कल्याण क्यों न हो, तौभी तुझे मेरे धाम का दु:ख देख पड़ेगा, और तेरे घराने में कोई कभी बूढ़ा न होने पाएगा।” हमें इस परिच्छेद पर कुछ क्षण ध्यान देना चाहिए। इस्राएल का प्रभु यहोवा परमेश्वर, जो अपने और इस्राएल के सम्मान के लिए ईर्ष्या करता है, कहता है, और आपको यह बताता है, कि आपका कार्य निरस्त और निलंबित कर दिया गया है। परमेश्वर के सामने चलना परमेश्वर के साथ हमारे संबंध की बड़ी पद-स्थिति है। अब जब तुम मुझे छोड़ देते हो, तो तुम इसके अतिरिक्त किसी और की अपेक्षा नहीं कर सकते कि मैं तुझ छोड़ दूँ। यदि तुम मेरे सामने वैसा नहीं चलोगे, जैसा तुम्हें चलना चाहिए, तो तुम मेरे साथ बिल्कुल नहीं चलोगे। ऐसे दुष्ट और अपमानजनक सेवकों को परमेश्वर त्याग देगा, और उनको सेवा से ही हटा देगा। चार पीढ़ियों में, सुलैमान के समय में, सादोक, जो एली से नहीं, बल्कि एलीआज़र से आया था, ने एली के वंशज एब्यातार का स्थान लिया और यह भविष्यद्वाणी पूरी हुई। परमेश्वर सम्मान और अपमान का स्रोत है और वह सबसे दीन को ऊँचा और सबसे बड़े को नीचा कर सकता है। हम स्वयं, दूसरों को नहीं, सामान्य रूप से माना जाता है, उससे कहीं अधिक निर्णय लेते हैं। भजन संहिता 18:25, 26 कहता है, "दयावन्त के साथ तू अपने को दयावन्त दिखाता; और खरे पुरुष के साथ तू अपने को खरा दिखाता है। 26शुद्ध के साथ तू अपने को शुद्ध दिखाता, और टेढ़े के साथ तू तिर्छा बनता है।" वास्तव में बड़े होने का तरीका वास्तव में अच्छा होना है। यदि हम परमेश्वर का सम्मान करने के लिए स्वयं को विनम्र और अस्वीकार करते हैं, और उसकी महिमा करने के हमारे प्रयासों में उसकी ओर एक दृष्टि रखते हैं, तो हम इस प्रतिज्ञा पर भरोसा कर सकते हैं, कि वह हमें ऊपर उठाएगा। यूहन्ना 12:26 कहता है, "यदि कोई मेरी सेवा करे, तो पिता उसका आदर करेगा।" वह उन लोगों को नीचा दिखाता है, जो उसकी सेवा नहीं करते हैं। एली के बेटे और अगली चार पीढ़ियों में उसके परिवार का इतिहास इसे दर्शाता है, क्योंकि उन्हें याजक पद से हटा दिया गया था।
3. भविष्यद्वक्ता एली के परिवार पर आने वाले दण्डों की भविष्यद्वाणी करता है। उसकी भावी पीढ़ियों पर एक शाप लगाया जाना था, और यह एक भयानक शाप है, और यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपनी आराधना के विषयों में कितना ईर्ष्यालु है और वह इसे कितना अधिक नकारात्मक रूप से लेता है, उसे तब बहुत ज्यादा बुरा लगता है, जब वे लोग—जो अपने ऊँचे आत्मिक पद के कारण, आज्ञाकारी होकर उसकी महिमा को बनाए रखने और उसे आगे बढ़ाने के लिए बाध्य हैं—इसके विपरीत, वे अपने भरोसे के प्रति बेईमान हो जाते हैं और अपनी ही शारीरिक इच्छाओं को पूरा करने की कोशिश करते हैं। यदि परमेश्वर के सेवक, जो परमेश्वर की महिमा करने की कोशिश कर रहे हैं, परमेश्वर के लोग उसके लिए जो बलिदान लाते हैं, उन पर अनादर से दृष्टि डालते हैं, तो उन्हें अन्य पापियों की तुलना में यहाँ और सदैव के लिए कितना बुरा दण्ड मिलेगा! आइए हम यहाँ एली के घराने पर घोषित न्यया के बारे में पढ़ते हैं, और उससे काँपते हैं। यहाँ 5 विशेष दण्ड दिए गए हैं।
अ. उनकी शक्ति टूट जाएगी, क्योंकि वचन 31 में कहा गया है, "सुन, वे दिन आते हैं कि मैं तेरा भुजबल और तेरे मूलपुरुष के घराने का भुजबल ऐसा तोड़ डालूँगा कि तेरे घराने में कोई बूढ़ा होने न पाएगा।" उन्हें उनके सभी अधिकार से वंचित कर दिया जाएगा, याजकों के रूप में उन्हें उनके पदों से मुक्त कर दिया जाएगा, और लोगों पर उनका कोई प्रभाव नहीं रहेगा, जैसा कि उनके पास था। एली, उनके पिता ने उन्हें रोकने और दण्डित करने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग नहीं किया था, जो कि उसे करना चाहिए था, और इसलिए यह उचित रूप से चेतावनी दी गई थी कि उसके भुजबल को तोड़ दिया जाएगा, उसकी शक्ति बढ़ाई नहीं जाएगी, जैसा कि होना चाहिए था।
ब. उनका जीवन छोटा हो जाएगा। वह स्वयं एक वृद्ध व्यक्ति था; परन्तु परमेश्वर की सेवा और सच्ची आराधना के समर्थन के लिए अपनी आयु के ज्ञान, खिचाव, अनुभव और अधिकार का उपयोग करने के बजाय, उसने आयु की कमजोरियों को अपने कर्तव्य में निष्क्रिय और लापरवाह होने दिया था, और इसलिए उसे बताया गया था कि उसकी कोई भी भावी पीढ़ी बूढ़ी होने के लिए जीवित नहीं रहना चाहिए, जैसा कि वचन 32 स्पष्ट करती है। "...और तेरे घराने में कोई कभी बूढ़ा न होने पाएगा। इसका समर्थन वचन 33 में किया गया है।" इसका अर्थ यह नहीं होगा कि वे पूरी तरह से विलुप्त हो जाएँगे, परन्तु कोई भी पूर्ण जीवन नहीं जी पाएगा या एक महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं बन पाएगा।
स. उनकी सभी सुख-सुविधाओं को हटा दिया जाएगा। यह पलिश्तियों के आक्रमणों और इस्राएल को किए गए नुकसान में पूरा हुआ, जिससे देश निर्धन हो गया था। इसमें कोई संदेह नहीं कि याजकों की आय बहुत ज्यादा कम हो गई थी। उसके दुष्ट पुत्रों की मृत्यु और फिर सन्दूक का कैद में जाना शत्रुता के ऐसे कार्य थे कि उन्होंने एली का मन तोड़ दिया। यह समाचार सुनते ही एली पीछे की ओर गिर गया और उसकी मौत हो गई। एक मृत सन्तान के लिए दु:ख बहुत बड़ा होता है, परन्तु क्या एक बुरी सन्तान के लिए दु:ख और भी अधिक नहीं होगा?
द. उनका सार ही नष्ट हो जाएगा और वे अत्याधिक निर्धनता में चले जाएँगे। वचन 36 में कहा गया है, "और ऐसा होगा कि जो कोई तेरे घराने में बचा रहेगा वह उसी के पास जाकर एक छोटे से टुकड़े चाँदी के या एक रोटी के लिये दण्डवत् करके कहेगा, याजक के किसी काम में मुझे लगा, जिससे मुझे एक टुकड़ा रोटी मिले।" एली के बेटों के पास सबसे अच्छे मांस के टुकड़े होने चाहिए, परन्तु उसके बेटे रोटी के एक टुकड़े से ही प्रसन्न होंगे। जो लोग व्यंजनों और विभिन्न किस्मों के बिना संतुष्ट नहीं हो सकते थे, उन्हें आवश्यक वस्तुओं की भी बहुत आवश्यकता की स्थिति में लाया जाता है। दुरुपयोग होने पर बहुत कुछ और उनकी शक्ति समाप्त हो जाती है।
य. परमेश्वर जल्द ही होप्नी और पीनहास की मृत्यु में इन दण्डों को निपटारा करना आरम्भ कर देगा, जिसका दु:खद समाचार एली को स्वयं सुनने के लिए जीवित रहना चाहिए। होप्नी और पीनहास ने कई बार एक साथ पाप किया था, और यहाँ यह भविष्यद्वाणी की गई है कि वे दोनों एक ही दिन में एक साथ मर जाएँगे।
एली के घराने के विरुद्ध इन सभी चेतावनियों के बीच, यहाँ इस्राएल के लिए दया की प्रतिज्ञा की गई है। वचन 35 कहता है, "और मैं अपने लिये एक विश्वासयोग्य याजक ठहराऊँगा, जो मेरे हृदय और मन की इच्छा के अनुसार किया करेगा, और मैं उसका घर बसाऊँगा और स्थिर करूँगा, और वह मेरे अभिषिक्त के आगे आगे सब दिन चला फिरा करेगा।" सेवकों की दुष्टता, हालाँकि यह स्वयं को नष्ट कर देती है, सेवकाई को नष्ट नहीं करेगी। अधिकारी कितने भी बुरे क्यों न हों, यह पद संसार के अंत तक सदैव बना रहेगा। यदि कुछ लोग अपने विश्वास के साथ विश्वासघात करते हैं, तो अन्य लोग उठ खड़े होंगे। बेनाम नबियों द्वारा परमेश्वर के याजकों को दिया गया संदेश प्रस्तुत करना मुश्किल होता, परन्तु बेनाम नबियों ने वही किया, जो उन्हें बताया गया था और उन्होंने वही कहा, जो उन्हें कहना था। यह एक नबी की सेवकाई है। क्या आप परमेश्वर के लिए एक भविष्यद्वक्ता अर्थात् नबी बनना चाहेंगे?